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कैंसल फ्लाइट के रिफंड का झांसा देकर JNU के प्रोफेसर से 7 लाख की ठगी, जामताड़ा से शातिर अरेस्ट

जेएनयू के प्रोफेसर से 7,32,51 रुपये की साइबर ठगी मामले का खुलासा हुआ है. इस मामले में दिल्ली की साइबर क्राइम पुलिस ने झारखंड के जामताड़ा से आरोपी को गिरफ्तार किया है. जामताड़ा साइबर ठगी करने वाले लोगों का मुख्य ठिकाना है. देशभर में होने वाले आधे से ज्यादा साइबर ठगी जामताड़ा से ही ऑपरेट होता है. पीड़ित प्रोफेसर को एयर एशिया का कस्टमर केयर एजेंट बनकर आरोपी ने ठग लिया था.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
अरविंद ओझा
  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 3:35 PM IST

दिल्ली में JNU के प्रोफेसर से जामताड़ा में बैठे एक साइबर ठग ने सात लाख 32 हजार रुपया ठग लिया था. इस मामले में छह महीने बाद पुलिस को सफलता मिली है और साइबर क्राइम पुलिस ने झारखंड के जामताड़ा से रियाज अंसारी नाम के ठग को गिरफ्तार किया है. बताया जाता है कि प्रो. उदय नाथ साहू को  एयर एशिया का टिकट कैंसिल करना था. इसके लिए उन्होंने गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर सर्च किया और ठग के झांसे में आ गये.

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मिली जानकारी के अनुसार 21 अक्टूबर को वसंत कुंज में रहने वाले जेएनयू के प्रोफेसर ने ठगी की शिकायत दर्ज करायी थी. इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह गूगल पर एयर एशिया की टिकट कैंसिल करने के बाद पैसा वापस कराने के लिए कस्टमर केयर का नंबर खोज करे थे, तो उन्हें एक एडवर्टिजमेंट दिखा. उस पर एयर एशिया के कस्टमर केयर का फोन नंबर था.

एनी डेस्क के सहारे निकाला बैंक डिटेल 
प्रोफेसर ने उस नंबर पर कॉल मिलाया और अपने टिकट का पैसा वापस पाने की जानकारी मांगी. इस पर कस्टमर केयर बने ठग ने उन्हें रिमोट एक्सेस एनी डेस्क ऐप मोबाइल में डाउनलोड करने को कहा. फिर रिफंड के लिए लिंक भेजा. इस लिंक पर परफर्मा खोलकर उसमें उन्हें अपने SBI का पूरा डिटेल भरने को कहा. प्रोफेसर उसकी बातों में आ गए और पूरा डिटेल उसे फर्जी लिंक वाले फार्म में दिया. 

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बातों में उलझाकर प्रोफेसर के खाते से उड़ाए 7 लाख रुपये
इस दौरान ठग ने प्रोफेसर को बातों में उलझाए रखा और उन्हें उनकी रकम वापस हो जाने का दिलासा देते रहा. इसी बीच प्रोफेसर के अकाउंट से 7 लाख 32 हजार 510 रुपया निकाल लिया गया. शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने गूगल पर डाले गए फर्जी कस्टमर केयर नंबर और पैसों के ट्रांजिक्शन की जांच-पड़ताल शुरू की. जांच में पाया गया कि प्रोफेसर के खाते से निकाली गई राशि, कोलकाता, मुंबई, पंजाब और वाराणसी के अलग-अलग लोगों के अकाउंट में डाली गई थी. 

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अलग-अलग नाम के खातों में ट्रांसफर कर दी रकम
आगे की जांच में सामने आया कि अलग-अलग लोगों के नाम से खाता बनाकर इसे एक ही व्यक्ति संचालित कर रहा था. बैंक ने भी सभी खातों को सत्यापित किया और खाते को लॉगिन करने वाले आईपी एड्रेस की जांच पर पता चला कि सभी गतिविधियां एक ही लोकेशन से हो रही है और वो लोकेशन झारखंड का जामताड़ा है. इसके बाद पुलिस ने प्राप्त लोकेशन के आधार पर जामताड़ा से आरोपी रियाज अंसारी को गिरफ्तार किया. 

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साइबर ठगी की आरोपी ने ली थी ट्रेनिंग
पूछताछ में रियाज ने बताया कि वह अपने भाई के साथ मिलकर  इस काम को अंजाम देता था. उसने बताया कि उसने बकायदा साइबर ठगी की ट्रेनिंग ले रखी थी. इसके बाद वह उसने लोगों को ठगने का काम शुरू किया. साइबर ठगी के इस काम में उसका सहयोग अन्य लोग भी देते हैं.

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