
दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने जनवरी 2025 तक शहर की सभी संपत्तियों को नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम (NGDRS) के तहत रजिस्टर्ड कर प्रॉप्रटी के रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन के निर्देश जारी किए हैं. राजभवन के अधिकारियो के मुताबिक प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस को सुव्यवस्थित करने, पारदर्शिता बढ़ाने, प्रोसेसिंग टाइम कम करने, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार रोकने के लिए राष्ट्रीय राजधानी के सभी 22 सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों में नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम (NGDRS) लागू किया गया है.
दिल्ली में अभी तक 2.31 लाख संपत्तियां NGDRS के तहत रजिस्टर्ड हैं, जबकि LG ने अधिकारियों को जनवरी 2025 तक सभी शेष संपत्तियों को NGDRS के तहत पंजीकृत करने के निर्देश दिए हैं, साथ ही इसे दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली नगर निगम (MCD) के संपत्ति डेटाबेस के साथ एकीकृत करने पर जोर दिया.
क्या है NGDRS, कैसे करता है काम?
बता दें कि NGDRS अप्वॉइंटमेंट, इवेल्युएशन, पेमेंट, डॉक्यूमेंट डेटा एंट्री, प्रेजेंटेशन और रजिस्ट्रेशन के लिए एक ऑनलाइन इंडीग्रेटेड पोर्टल है. वहीं, NGDRS परियोजना वन नेशन वन सॉफ्टवेयर के कॉन्सेप्ट पर आधारित है. जो संपत्ति के डेटा को एक सुलभ डेटाबेस में इंटीग्रेट करती है. इससे संपत्ति के लेन-देन में भारी बदलाव आने की उम्मीद है, जिससे यह प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और बेहतर बन जाएगी.
NGDRS से क्या सुविधा होगी?
अधिकारियों ने एक बयान में कहा कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया संपत्ति खरीदारों को प्रॉपर्टी के वास्तविक स्वामित्व की जांच करने और सर्टिफिकेशन की सुविधा देगी, जिससे धोखाधड़ी की आशंका खत्म हो जाएगी. हालांकि एनजीडीआरएस को पहले ही 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा चुका है, लेकिन दिल्ली में इसकी शुरुआत अहम मानी जा रही है. इसके जरिए एक फेसलेस रजिस्ट्रेशन प्रोसेस का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे फिजिकल डॉक्यूमेंटेशन और रजिस्ट्रेशन ऑफिस में व्यक्तिगत रूप से चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी.
दिल्ली के सभी 22 सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों में NGDRS लागू
अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली में संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन और अन्य सेवाएं अब सभी 22 सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों में NGDRS के कार्यान्वयन के साथ पहले से कहीं अधिक आसान, तेज और पारदर्शी होंगी. लोग इसके माध्यम से उप-पंजीयक कार्यालयों में दस्तावेज़ पंजीकरण के लिए पहले ही अप्वॉइंटमेंट ले सकेंगे.
रजिस्ट्रेशन से संबंधित प्रोसेसिंग टाइम की बचत
अधिकारियों ने कहा कि NGDRS के तहत पंजीकृत दस्तावेज़ एक केंद्रीय सर्वर पर एकत्र किए जाते हैं, इसलिए सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों में डॉक्यूमेंट्स को भौतिक रूप से खोजने की जरूरत नहीं है. कोई भी दस्तावेज आसानी से डीड नंबर, पैन नंबर या संपत्ति नंबर के साथ तुरंत मिल सकेगा. इसके चलते प्रोसेसिंग टाइम में बचत होगी.