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रियल टाइम हो सकेगी वायु प्रदूषण के सोर्स की पहचान, दिल्ली में RTSA स्टडी के प्रस्ताव को मंजूरी

दिल्ली सरकार के मुताबिक, यह इस तरह का पहला अध्ययन है. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि AAP सरकार रियल टाइम पर वायु प्रदूषण के सोर्स का पता लगाने और उनकी निगरानी करने के लिए एक अध्ययन शुरू करने वाली पहली सरकार होगी.

Arvind kejriwal Arvind kejriwal
पंकज जैन
  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 12:22 AM IST
  • भारत में पहली बार होगी ऐसी स्टडीः गोपाल राय
  • रियल टाइम ट्रैक हो सकेंगे वायु प्रदूषण के सोर्स
  • वायु प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने में कारगर

दिल्ली कैबिनेट ने शुक्रवार को 'रीयल टाइम सोर्सेज अपोर्शनमेंट स्टडी' (RTSA) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस स्टडी से किसी भी स्थान पर रियल टाइम में वायु प्रदूषण फैला रहे सोर्स की पहचान की जा सकेगी. दिल्ली सरकार के मुताबिक, इस स्टडी से वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और इससे वायु प्रदूषण के स्रोतों को रियल टाइम पर ट्रैक भी किया जा सकेगा.

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केजरीवाल सरकार के मुताबिक, यह इस तरह का पहला अध्ययन है. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि आम आदमी पार्टी सरकार रियल टाइम पर वायु प्रदूषण के सोर्स का पता लगाने और उनकी निगरानी करने के लिए एक अध्ययन शुरू करने वाली पहली सरकार होगी. उन्होंने कहा कि इससे दिल्ली में प्रदूषण बढ़ाने वाले कारकों की पहचान करके उसका समाधान करने में काफी मदद मिलेगी.

रियल टाइम कारकों का पता लगाएगी RTSA स्टडी
रीयल टाइम सोर्सेज अपोर्शनमेंट स्टडी दिल्ली में किसी विशेष स्थान पर वायु प्रदूषण बढ़ाने वाले कारकों की पहचान करने में मदद करेगी. यह वाहनों, धूल, बायोमास, पराली जलाने और उद्योगों से निकलने वाले धुएं जैसे प्रदूषण स्रोतों के वास्तविक समय पर पढ़ने वाले प्रभाव को समझने में मदद करेगा. इससे मिलने वाले नतीजों के आधार पर दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी कदम उठा सकेगी. 

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ये टीम करेगी स्टडी
आईआईटी-कानपुर, आईआईटी-दिल्ली, एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) और आईआईएसईआर मोहाली की एक टीम दिल्ली में RTSA स्टडी करेगी. गोपाल राय ने बताया कि अभी देश के किसी भी शहर में वायु प्रदूषण के रियल टाइम सोर्स का पता लगाने की तकनीक अभी तक लागू नहीं हुई है.

उन्होंने कहा कि कैबिनेट से आज इस परियोजना को मंजूरी मिल गई है और अब वैज्ञानिक इस नई परियोजना पर जोर-शोर से काम शुरू करेंगे. इससे दिल्ली के प्रदूषण बढ़ाने वाले कारकों की पहचान कर उनके समाधान में काफी मदद मिलेगी. 
 

 

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