
दिल्ली में पिछले साल फरवरी के महीने में डीईआरसी द्वारा बढ़ाए गए फिक्स चार्ज को लेकर बुधवार को बैठक बुलाई गई थी. बैठक में कांग्रेस पूरी तरह नदारद नजर आई. इस बैठक में डीईआरसी द्वारा पिछले साल बढ़ाए गए फिक्स चार्ज को लेकर जनसुनवाई होनी थी. जनसुनवाई शुरू होते ही जमकर हंगामा हुआ.
आम आदमी पार्टी और बीजेपी के विधायक आपस में भिड़ गए. एक तरफ आम आदमी पार्टी पिछले 4 सालों में बिजली के दाम ना बढ़ाने को लेकर अपनी पीठ थपथपाती नजर आई तो वहीं बीजेपी ने आम आदमी पार्टी पर जमकर निशाना साधा. बीजेपी ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने फिक्स चार्ज की आड़ में बिजली कंपनियों को 5 से 7 हजार करोड़ रुपए का मुनाफा दिया है. हालांकि इन सबसे परे कांग्रेस इस पूरे मुद्दे पर गायब नजर आई.
पिछले दिनों दिल्ली कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोरों से उठाया था. दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने केजरीवाल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि उनकी सरकार के समय दिल्ली में फिक्स चार्ज 40 से लेकर 100 रुपये तक हुआ करते थे. लेकिन पिछले साल केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में फिक्स चार्ज मिनिमम 125 से बढ़ाकर 450 रुपये तक कर दिया था, जिससे आम आदमी के बिजली के बिलों में काफी इजाफा देखने को मिला.
दिल्ली कांग्रेस ने कहा था कि फिक्स चार्ज की आड़ में केजरीवाल सरकार ने बिजली कंपनियों को 5 हजार करोड़ का मुनाफा दिया. बढ़ते फिक्स्ड चार्ज को लेकर जब कांग्रेस ने मुद्दा बनते देखा तो उस वक्त दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष शीला दीक्षित और दिल्ली सरकार के पूर्व पावर मिनिस्टर हारुन यूसुफ समेत एक पूरा डेलिगेशन मुख्यमंत्री केजरीवाल से मिलने तक पहुंचा था.
उस वक्त कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर काफी आक्रामक थी ओर इस मुद्दे को बार-बार जनता के बीच ले जाने की बात कर रही थी. लेकिन जब आज डीईआरसी की जनसुनवाई की विशेष बैठक से कांग्रेस जिस तरह से गायब रही वो अपने आप में बड़े सवाल खड़े करता है.
अब क्या ये माना जाए कि कांग्रेस के लिए फिक्स चार्ज मुददा नहीं रहा या लापरवाह दिल्ली कांग्रेस अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को तलाशने में इतनी व्यस्त है कि उसने दिल्ली की जनता के बढ़े हुए बिजली बिल के मामले में डीईआरसी की जनसुनवाई बैठक में आना भी जरूरी नहीं समझा.
कांग्रेस का बैठक में ना आना इस बात का भी संकेत है कि विपक्ष की भूमिका में दिल्ली कांग्रेस कितनी सक्रिय है.