
गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसा और लाल किले वाले मामले में आरोपी दीप सिद्धू को दिल्ली की कोर्ट ने जमानत दे दी है. जरूरी कागजी कार्रवाई करने के बाद वे जल्द ही जेल से बाहर निकल आएंगे.
गणतंत्र दिवस के दिन हुई इस हिंसा मामले में कुछ प्रदर्शनकरियों पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय तिरंगा हटाकर धार्मिक ध्वज लहराने का काम किया. इस मामले में दीप सिद्धू पर आरोप ये है कि उन्होंने भीड़ को भड़काया था. फिलहाल उन्हें जमानत मिल चुकी है. दीप सिद्धू को तीस-तीस हजार रुपये के बांड वाले दो जमानतियों के आधार पर जमानत मिली है.
दीप सिद्धू को जमानत देते हुए अदालत ने कुछ शर्तें रखीं हैं. दीप सिध्दू से अदालत ने कहा है कि वो अपना पासपोर्ट इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर के पास जमा कराएंगे. दीप सिद्धू से कहा गया है कि वो जो फोन नंबर यूज करेंगे उसे इन्वेस्टिगेटिव ऑफिसर को दर्ज कराएंगे. हर महीने की पहली और पंद्रहवीं तारीख को अपनी लोकेशन बताएंगे. दीप सिद्धू के लिए ये भी शर्त रखी गई है कि वे चौबीस घंटे अपने फोन की लोकेशन ऑन रखेंगे और कभी भी अपना फोन स्विच ऑफ नहीं करेंगे.
आपको बता दें कि बीते दिनों अदालत में हो रही सुनवाई के दौरान दीप सिद्धू के वकील ने उनकी जमानत के लिए कोर्ट में दलील दी थी कि वो हिंसा में शामिल नहीं हुए थे और वो एक जिम्मेदार नागरिक हैं. दीप सिद्धू के वकील ने अदालत में तर्क दिया था वो सिर्फ प्रदर्शन से जुड़ा हुए थे हिंसा से उनका कोई मतलब नहीं था, क्योंकि वो एक जाना-पहचाना चेहरा हैं, इसलिए उनको बलि का बकरा बनाया गया है.
वहीं इस मामले पर दिल्ली पुलिस का तर्क है कि दीप सिद्धू ने कानून को अपने हाथ में लिया था और भीड़ को हिंसा के लिए भड़काया था जिसके परिणाम स्वरूप दर्जनों पुलिसकर्मी घायल हो गए.