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कोरोनिल दवा मामला: बाबा रामदेव की मुश्किलें बढ़ीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi Highcourt) ने बाबा रामदेव की कोरोनिल दवाई (Coronil Medicine) को लेकर कथित झूठे दावे पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए बाबा रामदेव को नोटिस जारी किया है.

स्वामी रामदेव (फाइल फोटो) स्वामी रामदेव (फाइल फोटो)
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 8:21 PM IST
  • कोरोनिल दवा मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में हुई सुनवाई
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव को किया नोटिस जारी
  • जनवरी 2022 में होगी अगली सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi Highcourt) ने बाबा रामदेव की कोरोनिल दवाई को लेकर कथित झूठे दावे पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई की. जिसके बाद बाबा रामदेव (Baba Ramdev) को नोटिस जारी किया है. साथ ही हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2022 में होगी.

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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बाबा रामदेव की ओर से पेश वकील राजीव नय्यर से कहा कि आपके मुवक्किल ने एलोपैथी और अस्पतालों का मजाक उड़ाया. कोर्ट ने कहा कि याचिका निश्चित रूप से सुनवाई योग्य है. आप आरोपों से इनकार कर रहे हैं, आप जवाब दाखिल कीजिए. तब नय्यर ने कहा कि केस की मेरिट पर कोई राय मत बनाइए क्योंकि मीडिया में इसकी बड़े पैमाने पर रिपोर्टिंग हो रही है. कोर्ट ने केवल नोटिस जारी करने पर दलीलें सुनी हैं.

कोर्ट ने 25 अक्टूबर को कहा था कि लाभ कमाना ना तो अनुचित है और ना ही गैरकानूनी. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील अखिल सिब्बल ने कहा था कि बाबा रामदेव ने अपने व्यावसायिक फायदे के लिए कोरोनिल टैबलेट के बारे में प्रचार किया कि वो कोरोना की दवाई है. तब कोर्ट ने कहा था कि आप व्यावसायिक लाभ में मत जाइए. हर व्यक्ति लाभ कमाता है. आप यह बताइए कि गलत कहां हुआ है.

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तब अखिल सिब्बल ने कहा था कि व्यवसाय करने से कोई मना नहीं कर रहा है. लेकिन वो कह रहे हैं कि एलोपैथी आपको मार रहा है और उसका इलाज हमारे पास है. वो कहते हैं कि हमने 90 फीसदी लोगों को ठीक किया है. एलोपैथी से महज दस फीसदी लोग ठीक हुए हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भी कहा था कि बाबा रामदेव ऐसा बयान सार्वजनिक रूप से नहीं दे सकते हैं कि कोरोनिल को कोरोना की दवा के रूप में लाइसेंस मिला है.

क्या है मामला

बता दें, बाबा रामदेव और एलोपैथी डॉक्टरों की संस्था आईएमए के बीच विवाद चल रहा है. बाबा रामदेव ने एलोपैथी को लेकर विवादास्पद बयान किया था, जिसके बाद आईएमए ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर बाबा के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भी बाबा रामदेव को अपना बयान वापस लेने को कहा था. आईएमए ने बाबा रामदेव के खिलाफ लीगल नोटिस भी भेजा था. पिछले 1 जून को देश भर के एलोपैथी डॉक्टरों ने बाबा रामदेव के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर काली पट्टी बांधकर काम किया था.


 

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