
कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच सभी सेवाएं धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं. दिल्ली हाईकोर्ट की कुछ बेंच में भी 1 सितंबर से ही फिजिकल हियरिंग शुरू हो गई है, लेकिन लोगों में खौफ भी है. मंगलवार को कोरोना के डर से दिल्ली हाईकोर्ट के वकील फिजिकल हियरिंग के लिए नहीं पहुंचे. इस वजह से दिल्ली हाईकोर्ट में किसी भी मामले की सुनवाई नहीं हो सकी. सभी मामलों की आज होने वाली सुनवाई रद्द करनी पड़ी.
दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और प्रतीक जालान की बेंच में एक भी मामले की फिजिकल हियरिंग नहीं हो पाई. सभी मामलों में आज की सुनवाई को रद्द किया गया. चीफ जस्टिस की कोर्ट में 22 मामलों की सुनवाई होनी थी, लेकिन किसी भी मामले में वकील कोर्ट रूम में व्यक्तिगत रूप से पेश ही नहीं हुए. इसके चलते सभी मामलों में सुनवाई को टाल दिया गया.
इन वकीलों में सरकारी और गैर सरकारी दोनों तरह के मामलों से संबंधित वकील शामिल थे. ज्यादातर वकीलों की तरफ से कोई ना कोई कारण बताकर अपनी गैर हाजिरी को कोर्ट में दर्ज करा दिया गया. जिस कोर्टरूम में हर रोज सैकड़ो वक़ील सुनवाई के लिए पेश होते थे, आज वहां महज तीन वकील ही पहुंचे थे और उनके मामलों में भी सुनवाई नहीं हो पाई, क्योंकि दुसरे पक्ष से वक़ील अनुपस्थित थे.
पीएमसी बैंक के मामले में याचिका पर ज़िरह करने वाले वकील शशांक देव सुधी ने बताया कि आज वे सुनवाई के लिए कोर्टरूम में जज के सामने पेश हुए तो दूसरे पक्ष के वकील आए ही नहीं थे. लिहाजा मामले में तारीख दे दी गई, जबकि आज की सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण थी. बाकी के और मामलों में भी चीफ जस्टिस की बेंच में वकीलों के पेश न होने के चलते तारीख ही मिली.
उन्होंने बताया कि चीफ जस्टिस की कोर्ट में कुल 3 वकील आज पेश हुए, जबकि 22 मामलों की सुनवाई होनी थी. हर केस में तकरीबन 5 से 7 वकीलों को पेश होना था. वकीलों में कोरोना के डर के चलते फिजिकल पेशी से बचने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही मामलों की सुनवाई करने के लिए चीफ जस्टिस डीएन पटेल के पास कई वरिष्ठ वकीलों ने पत्र भी लिखे हैं.
हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट के साथ-साथ जिला अदालतों में भी कोर्ट स्टाफ के कोरोना से संक्रमित होने के कई मामले सामने आए हैं. हालांकि हाईकोर्ट प्रशासन ने कोरोना से बचाव के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की कोर्ट में वकीलों और जजों के बीच में प्लास्टिक की एक मोटी शीट लगाई गई है. इसके अलावा पहले बैठने के लिए सैकड़ों कुर्सियां लगाई जाती थीं, लेकिन फिलहाल सभी कुर्सियों को हटा दिया गया है. जिस मामले की फिजिकल हियरिंग होती है उससे जुड़े हुए लोग ही जज के सामने कोर्ट रूम में पेश होते हैं.
गौरतलब है कि 1 सितंबर से ही दिल्ली हाईकोर्ट में रोटेशन के आधार पर फिजिकल सुनवाई के लिए 5 बेंच खोली गई थीं. अभी एक दिन पहले ही हाईकोर्ट प्रशासन ने फिजिकल हियरिंग के लिए 15 सितंबर से 10 अक्टूबर की तारीख आगे बढ़ा दी थी, लेकिन स्थिति को देखकर लगता है कि हाईकोर्ट प्रशासन अपने इस आदेश को रिव्यू कर सकता है.