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'स्कूल की जमीन पर मस्जिद और दुकानों का अवैध कब्जा तो नहीं...', दिल्ली हाईकोर्ट का MCD को निर्देश

एमसीडी के वकील ने अदालत को बताया कि धार्मिक ढांचा स्कूल से पहले का बना हुआ है और यदि कोई शिकायत है, तो इसे धार्मिक समिति के पास ले जाना चाहिए, जो अधिकृत धार्मिक स्थलों के मामलों को देखती है. हालांकि, अदालत ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों का समाधान जरूरी है.

दिल्ली हाईकोर्ट. (प्रतीकात्मक तस्वीर) दिल्ली हाईकोर्ट. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 5:46 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया कि वह वज़ीरपुर में एक स्कूल की जमीन पर मस्जिद और दुकानों के अतिक्रमण की जांच करे और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करे. मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने एमसीडी से कहा कि वह 'सेव इंडिया फाउंडेशन' की जनहित याचिका (PIL) को शिकायत मानकर उस पर कार्रवाई करे.

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एमसीडी के वकील ने अदालत को बताया कि धार्मिक ढांचा स्कूल से पहले का बना हुआ है और यदि कोई शिकायत है, तो इसे धार्मिक समिति के पास ले जाना चाहिए, जो अधिकृत धार्मिक स्थलों के मामलों को देखती है. हालांकि, अदालत ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों का समाधान जरूरी है. कोर्ट ने एमसीडी को निर्देश दिया कि वह आरोपों की जांच करे और सर्वे के बाद रिपोर्ट तैयार करे.

अगर धार्मिक ढांचे से जुड़ा कोई अवैध निर्माण पाया जाता है, तो मामला उचित कार्रवाई के लिए धार्मिक समिति को भेजा जाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि स्कूल में सुरक्षा का ध्यान रखना एमसीडी की जिम्मेदारी है, खासकर छात्राओं की सुरक्षा को लेकर. कोर्ट ने कहा, "चूंकि स्कूल एमसीडी द्वारा संचालित किया जाता है, इसलिए छात्रों, विशेष रूप से लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है."

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अदालत ने निर्देश दिया कि यदि स्कूल में कोई अनधिकृत प्रवेश द्वार हैं, तो एमसीडी उन्हें बंद करने के लिए उचित कदम उठाए. जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि स्कूल की जमीन पर एक ऊंचा धार्मिक ढांचा बनाया गया है, जिसके नीचे कई दुकानें चल रही हैं. यह अवैध निर्माण एमसीडी की लापरवाही के कारण हुआ और इसमें लगे लाउडस्पीकर तथा स्कूल की ओर खुलने वाली खिड़कियां और दरवाजे सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं.

याचिकाकर्ता ने अदालत से स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार की अवैध घुसपैठ को रोकने और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी.

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