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दिल्ली जल बोर्ड के निजीकरण पर सियासत तेज, कांग्रेस बोली- मोदी की राह चले केजरीवाल

अनिल कुमार ने केजरीवाल सरकार को हर मोर्चे पर फेल बताते हुए कहा कि दिल्लीवालों को पीने लायक पानी मुहैया कराने में सरकार असफल साबित हुई है.

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार (फाइल फोटो) दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार (फाइल फोटो)
राम किंकर सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 27 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 8:54 AM IST
  • प्रदेश अध्यक्ष बोले- हर मोर्चे पर सरकार असफल
  • कई कॉलोनियों में टैंकर और ट्यूबवेल पर निर्भरता
  • दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता की मांग, हो सीबीआई जांच 

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड के निजीकरण की बात कही है. अब इसे लेकर दिल्ली में सियासत तेज हो गई है. मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर हमलावर है ही, कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया है. दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल कुमार ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल भी मोदी सरकार की तरह निजीकरण की राह पर चल पड़े हैं.

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उन्होंने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड के निजीकरण के बाद हजारों कर्मचारी बेरोजगार की श्रेणी में आ जाएंगे. दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना महामारी के इस दौर में लाखों लोग बेरोजगारी के कारण जीविका की समस्या से जूझ रहे हैं. अगर केजरीवाल सरकार इस संकट के दौर में दिल्ली जल बोर्ड का निजीकरण करती है तो हजारों लोगों के रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा.

अनिल कुमार ने केजरीवाल सरकार को हर मोर्चे पर फेल बताते हुए कहा कि दिल्लीवालों को पीने लायक पानी मुहैया कराने में सरकार असफल साबित हुई है. उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने 2015 के चुनावी घोषणा पत्र में दिल्ली के हर घर को पानी देने का वादा किया, लेकिन संगम विहार और देवली जैसी कई कॉलोनियों में लोग आज भी पानी के लिए टैंकर और ट्यूब वेल पर निर्भर हैं.

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दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष ने कहा कि इन कॉलोनियों में हर रोज लगभग 20 लाख रुपये का पानी बेचा जाता है. टैंकर माफिया खत्म करने के दावे किए गए, लेकिन इसके बावजूद दिल्ली में पानी के टैंकरों की संख्या 2012 के 817 के मुकाबले 2019 में 1062 पहुंच गई. वहीं, दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम एक खुला पत्र लिखा है.

भाजपा प्रवक्ता ने इस पत्र में कहा है कि 6 साल से दिल्ली जल बोर्ड में लूट का खेल चल रहा है. भाजपा प्रवक्ता ने कहा है कि दिल्ली आज समझ रही है कि मई 2017 में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कपिल मिश्रा को रातोरात जल मंत्रालय से क्यों हटाया था. उन्होंने जल बोर्ड की कार्यप्रणाली की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की भी मांग की है.

 

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