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क्या फाइनेंशियल पावर्स हैं MCD की स्थायी समिति के, जिसके चुनाव के लिए रातभर AAP और बीजेपी में हुई भिड़ंत? 

दिल्ली नगर निगम की इस स्टैंडिंग कमेटी के 18 सदस्यों का चुनाव दो तरीके से होता है. छह सदस्यों का चुनाव सबसे पहले सदन की बैठक में किया जाता है. इनके अलावा 12 सदस्यों को 12 अलग-अलग जोन से चुनकर लाया जाता है. जोन की मीटिंग में एल्डरमैन यानी मनोनीत पार्षदों को भी वोटिंग का अधिकार है.

दिल्ली नगर निगम में AAP-BJP पार्षदों में भिड़ंत (फोटो- ANI) दिल्ली नगर निगम में AAP-BJP पार्षदों में भिड़ंत (फोटो- ANI)
कुमार कुणाल
  • नई दिल्ली,
  • 23 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 11:04 AM IST

दिल्ली में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव शांति से हो गया, लेकिन स्टैंडिंग कमेटी सदस्यों के चुनाव पर जमकर बवाल हो रहा है. दरअसल स्टैंडिंग कमेटी दिल्ली नगर निगम की सबसे ताकतवर कमेटी है. दिल्ली नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर के पास फैसले लेने की शक्तियां काफी कम हैं. उसकी एक बड़ी वजह यह है कि लगभग सभी किस्म के आर्थिक और प्रशासनिक फैसले 18 सदस्यों वाली स्टैंडिंग कमेटी ही लेती है और उसके बाद ही उन्हें सदन में पास करवाने के लिए भेजा जाता है. ऐसे में स्टैंडिंग कमेटी काफी पॉवरफुल होती है और इसका चेयरमैन एक किस्म से एमसीडी का असली राजनीतिक हेड होता है. 

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दिल्ली नगर निगम की इस स्टैंडिंग कमेटी के 18 सदस्यों का चुनाव दो तरीके से होता है. छह सदस्यों का चुनाव सबसे पहले सदन की बैठक में किया जाता है. यह वोटिंग सीक्रेट वोटिंग तो होती है, लेकिन आम वोटिंग की तरह नहीं. इन सदस्यों का चुनाव राज्यसभा सदस्यों की तरह प्रेफरेंशियल वोटिंग के आधार पर किया जाता है. यानी सभी पार्षदों को अपने उम्मीदवार को पसंदीदा क्रम में प्रेफरेंस के तौर पर नंबर देने होते हैं. अगर पहले प्रेफरेंस के आधार पर चुनाव नहीं हो पाता है तो फिर दूसरे और तीसरे प्रेफरेंस की काउंटिंग आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर की जाती है. यानी यहां पर गणित अच्छा खासा पेचीदा हो जाता है. 

 

डिप्टी मेयर चुनाव में क्रॉस वोटिंग

आम आदमी पार्टी ने मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव तो आसानी से जीत लिया, लेकिन 6 सदस्यों में से अपने 4 उम्मीदवार को जिताने में उसे खासी मुश्किल पेश आने वाली है. एक तो उनके पास इन चार उम्मीदवारों को जिताने के लिए पहले प्रिंस के वोट जरूरत से काफी कम है. दूसरी दिक्कत यह आ रही है कि डिप्टी मेयर के चुनाव में आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर दी है जिससे गणित और मुश्किल हो गया है. 

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अलग-अलग जोन से चुनकर आते हैं 12 सदस्य

कुल 18 सदस्यों की स्टैंडिंग कमेटी में इन छह के अलावा 12 सदस्यों को 12 अलग-अलग जोन से चुनकर लाया जाता है. जोन की मीटिंग में एल्डरमैन यानी मनोनीत पार्षदों को भी वोटिंग का अधिकार है. बिना एल्डरमैन के आम आदमी पार्टी को 12 में से 8 जोन आसानी से मिलने चाहिए थे जबकि बीजेपी को 4 जोन में जीत हासिल होनी चाहिए थी. लेकिन उपराज्यपाल के जारी किए गए नोटिफिकेशन में एल्डरमैन को सिर्फ 3 जोन में नियुक्त किया गया है ताकि बीजेपी 4 की बजाय 7 जोन से अपने सदस्यों को स्टैंडिंग कमेटी में भेज सके. 

 

स्टैंडिंग कमेटी बहुत ही महत्वपूर्ण

अगर बीजेपी हाउस से स्टैंडिंग कमेटी की 3 सीटें जीत लेती है और साथ ही  7 सदस्य उसके अलग-अलग जोन से चुने जाते हैं तो बीजेपी का बहुमत स्टैंडिंग कमेटी में हो जाएगा क्योंकि उसके 18 में से 10 सदस्य चुन लिए जाएंगे. ऐसे में आम आदमी पार्टी अपना मेयर बनवा करके भी स्टैंडिंग कमेटी पर कब्जा नहीं कर पाएगी और अपने प्रोजेक्ट स्टैंडिंग कमेटी में पास नहीं करवा सकेगी. अगर कोई प्रोजेक्ट स्टैंडिंग कमेटी में ही पास नहीं हो पाया तो फिर वह हाउस में नहीं जाएगा यानी मेयर बनाने का कोई भी फायदा आम आदमी पार्टी को नहीं मिलेगा और टकराव कहीं अधिक बढ़ जाएगा. 

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