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दिल्ली में बृजभूषण के आवास से हिरासत में लिया गया युवक, जुटा रहा था जानकारी

दिल्ली में बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के आवास पर पहुंचे एक शख्स को पुलिस ने हिरासत में लिया है. ये युवक सिंह के बारे में स्टाफ से पूछ रहा था, जिसके बाद स्टाफ ने आशंका होने पर पीसीआर कॉल की और मौके पर पुलिस को बुला लिया.

भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह. (फाइल फोटो) भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह. (फाइल फोटो)
हिमांशु मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2023,
  • अपडेटेड 1:23 PM IST

दिल्ली पुलिस ने कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के आवास से एक शख्स को हिरासत में लिया है. ये युवक सुबह आवास पर पहुंचा था और बीजेपी सांसद के बारे में स्टाफ से जानकारी जुटा रहा था.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, युवक के बारे में स्टाफ को शक हुआ तो पुलिस को सूचना दी गई. मौके पर पुलिस पहुंची और युवक को हिरासत में ले लिया. उससे पूछताछ की जा रही है. ये युवक गुरुवार से बृजभूषण शरण सिंह से जबरदस्ती मुलाकात करने की कोशिश कर रहा था .सूत्रों के मुताबिक, युवक से एक के कब्जे से लाइटर बरामद किया है. ये लाइटर पिस्टल की शक्ल का है.

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बृजभूषण की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े पहलवान

बता दें कि दिल्ली में बृजभूषण सिंह के खिलाफ पहलवानों ने धरना दिया था. वे बृजभूषण की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया है. हालांकि, एक दिन पहले ही दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में जो चार्जशीट दायर की है, उसमें बृजभूषण को क्लीन चिट दे दी है.

गुरुवार को पुलिस द्वारा कोर्ट में 1 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई. साथ ही दिल्ली पुलिस ने नाबालिग पहलवान से यौन शोषण के आरोप को खारिज करने की कोर्ट में अर्जी दी है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक नाबालिग पहलवान के आरोप पर कोई सबूत नहीं मिले हैं.

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बृजभूषण सिंह के खिलाफ दायर चार्जशीट में पुलिस ने बताया है कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत पीड़ितों द्वारा दिया गया बयान दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट करने का मुख्य सबूत है. नाबालिग के बयान पर, पुलिस उसे कथित अपराध के उक्त स्थान पर ले गई, उन्हें कोई भी सुनसान जगह नहीं मिली, जहां अपराध हो सकता था. पीड़ितों द्वारा प्रदान किए गए डिजिटल साक्ष्य अपराध के कथित स्थान पर अभियुक्तों की उपस्थिति को स्थापित करते हैं. पीड़ितों ने अपने आरोपों के समर्थन में पांच (लगभग) तस्वीरें दी हैं.

सिर्फ सात गवाह पीड़ितों के साथ

चार्जशीट में पुलिस ने आगे कहा कि दो दर्जन गवाहों में से लगभग सात ने पीड़ितों के दावों का समर्थन किया है, बाकी आरोपियों के पक्ष में बोले हैं. वे ट्रायल के दौरान क्रॉस एक्जामिनेशन के अधीन होंगे. दूसरे देशों के कुश्ती महासंघों से डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस एक पूरक आरोपपत्र दायर करेगी. पुलिस ने आरोपी और पीड़िता का पिछले दस साल का सीडीआर मांगा है. यह एक बड़ा दस्तावेज है. 

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गंभीर आरोपों के बावजूद गिरफ्तारी क्यों नहीं?

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरनेश कुमार के एक जजमेंट के मुताबिक, 7 साल से कम सजा वाली धाराओं में गिरफ्तारी जांचकर्ता के खुद के विवेक पर निर्भर करती है. अगर, आरोपी जांच में सहयोग करता है तो गिरफ्तारी जरूरी नहीं. यहां गौर करने वाली बात ये है कि दिल्ली पुलिस का कहना है कि बृजभूषण सिंह को जब भी जांच संबंधी सम्पर्क किया गया, उन्होंने पूरा सहयोग किया, इसीलिए उनकी गिरफ्तारी की कोई खास वजह नहीं थी.

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