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'केजरीवाल की इस योजना से 6,000 नौकरियों पर खतरा' राशन संघ ने क्यों कही ये बात?

दिल्ली में राशन की डोर स्टेप डिलीवरी के लिए केजरीवाल सरकार 'मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना' लेकर आई है. केंद्र सरकार ने इस योजना पर रोक लगा रखी है. अब राशन संघ भी इस योजना के विरोध में आ गया है.

केजरीवाल डोर स्टेप डिलीवरी स्कीम को लागू करना चाहते हैं (फाइल फोटो-PTI) केजरीवाल डोर स्टेप डिलीवरी स्कीम को लागू करना चाहते हैं (फाइल फोटो-PTI)
सुशांत मेहरा
  • नई दिल्ली,
  • 22 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 9:30 PM IST
  • डोर स्टेप डिलीवरी के खिलाफ राशन संघ
  • राशन संघ ने कहा इससे नौकरियां जाएंगी

दिल्ली की केजरीवाल सरकार की घर-घर राशन बांटने की योजना डोर स्टेप डिलीवरी को लेकर सियासत और विरोध दोनों ही बढ़ता जा रहा है. एक तरफ जहां दिल्ली के मुख्यमंत्री इस योजना को लागू करने के पक्ष में हैं, तो वहीं अब दिल्ली राशन संघ भी इस योजना के विरोध में उतर आया है.

दिल्ली राशन संघ का कहना है कि भले ही दिल्ली सरकार इस योजना से राशन बांटने की प्रणाली को बेहतर करने की बात कर रही हो, लेकिन राजधानी में पिछले कई सालों से करीब 2 हजार राशन की दुकानें हैं, जो लोगों को राशन देने का काम कर रहे हैं. राशन संघ का कहना है कि अगर ये योजना लागू होती है, तो इससे 2 हजार राशन डीलर से जुड़े करीब 6 हजार लोग बेरोजगार हो जाएंगे. उनकी रोजी-रोटी छीन जाएगी.

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राशन डीलर के पेट पर लात है ये योजना

दिल्ली राशन संघ के अध्यक्ष शिव कुमार का कहना है कि लॉकडाउन के वक्त जान जोखिम में डालकर दिल्ली के सभी राशन डीलर्स ने लोगों के घरों में जाकर राशन दिया. इससे 5 राशन डीलर कोरोना से अपनी जान भी गंवा बैठे. लेकिन सरकार की ये योजना राशन डीलर के पेट पर लात है. शिव कुमार बताते हैं कि महीने की शुरुआत में ही ज्यादातर राशन कार्ड होल्डर अपना राशन ले जाते हैं. कई बार इनके पास पैसे नहीं होते, तो वो उधार भी ले जाते हैं. लेकिन डोर स्टेप डिलीवरी लागू होने के बाद गरीबों को उधार राशन भी नहीं मिल पाएगा. इनके पास पैसे होंगे, तभी राशन मिलेगा.

वहीं, संघ के सचिव सौरव गुप्ता का कहना है कि अगर दिल्ली सरकार इस योजना से राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना भी चाहती है, तो दिल्ली में EPOS प्रणाली से राशन बांटने का काम अब तक शुरू क्यों नहीं किया गया? EPOS प्रणाली में अगर किसी कार्डधारक को अपनी राशन की दुकान से किसी प्रकार की समस्या है, तो वो किसी दूसरी राशन की दुकान से राशन ले सकता है.

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सौरव गुप्ता ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस योजना के तहत सरकार अपना आर्थिक भार बड़ी कंपनियों को मुनाफे के नाम पर देना चाहती है. कोरोनाकाल में एक-दो महीने में नॉन-एनएफएसए का राशन दिल्ली के कई गरीब परिवारों को मिला, लेकिन अब उनका राशन बंद कर दिया गया है. ये पैसा इन गरीबों को राशन ना देकर बड़ी-बड़ी मिलों और कंपनियों को दिया जा रहा है.

दिल्ली सरकार का क्या है कहना?

इस मामले पर दिल्ली सरकार के खाद्य आपूर्ति विभाग का कहना है कि डोर स्टेप डिलीवरी से राशन दुकानदारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. बल्कि इससे आम लोगों के लिए ऑप्शन ही खुलेगा. अगर कार्डधारक दुकानदार से राशन लेना चाहते हैं, तो वो दुकान जाकर राशन ले सकते हैं. लेकिन जिन्हें घर पर ही राशन चाहिए, उन्हें घर बैठे ही राशन मिल जाएगा.

25 मार्च से लागू होनी थी योजना

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार डोर स्टेप डिलीवरी की योजना को 25 मार्च से लागू करने की तैयारी कर रही थी. लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर रोक लगा दी. इसके बाद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार इस योजना के नाम से खुश नहीं है, तो हम इस योजना का नाम मुख्यमंत्री घर-घर राशन योजना से बदलकर कुछ और कर देते हैं, लेकिन ये योजना लागू होनी चाहिए.

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