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...जहां हुआ था केजरीवाल का उभार, वहीं से मिलेगी दिल्ली को बीजेपी की सरकार!

दिल्ली का रामलीला मैदान वही जगह है जहां अन्ना आंदोलन को एक मजबूत आवाज मिली थी. इसी मैदान के मंच पर भाषण देते हुए और सरकार की नीतियों को ललकारते हुए अरविंद केजरीवाल एक आंदोलनकारी से नेता बने थे. इसी मैदान पर अनशन करके उन्होंने सियासत में कदम रखा था.

 शपथ ग्रहण के लिए बीजेपी ने रामलीला मैदान को चुना. इसी मैदान पर केजरीवाल ने अन्ना के साथ किया आंदोलन. शपथ ग्रहण के लिए बीजेपी ने रामलीला मैदान को चुना. इसी मैदान पर केजरीवाल ने अन्ना के साथ किया आंदोलन.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 17 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 3:10 PM IST

27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी करने वाली बीजेपी का 20 फरवरी को शपथ ग्रहण कार्यक्रम होगा. लेकिन इस आयोजन के लिए जिस जगह का चुनाव किया गया है उसने इस शपथ ग्रहण को कई मायनों में विमर्श का विषय बना दिया है. दरअसल, दिल्ली के जिस रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण की तैयारी हो रही है, वो आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के उभार का भी गवाह रहा है...

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इसी मैदान पर आंदोलनकारी से नेता बने थे केजरीवाल

दिल्ली का रामलीला मैदान वही जगह है जहां अन्ना आंदोलन को एक मजबूत आवाज मिली थी. इसी मैदान के मंच पर भाषण देते हुए और सरकार की नीतियों को ललकारते हुए अरविंद केजरीवाल एक आंदोलनकारी से नेता बने थे. इसी मैदान पर अनशन करके उन्होंने सियासत में कदम रखा था. यहीं से उन्होंने नई पार्टी बनाई और फिर दिल्ली की सत्ता पर काबिज हो गए. इस कहानी को समझने के लिए आपको करीब 14 साल पीछे चलना होगा...

इसी मैदान से केजरीवाल का हुआ उभार

साल 2011 का अगस्त महीना था, जब समाजसेवी अन्ना हजारे ने जन लोकपाल बिल को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. धीरे-धीरे इस प्रदर्शन ने आंदोलन की शक्ल ले ली और देशभर में सरकार के खिलाफ आवाज उठने लगी. रामलीला मैदान पर हर रोज हजारों की संख्या में लोग पहुंचने लगे. 'मैं भी अन्ना' की टोपी लगाकर हर ओर लोगों का हुजूम ही दिखता था. अन्ना हजारे के अलावा एक और नाम धीरे-धीरे लोगों की जुबां पर चढ़ने लगा. वो नाम था अरविंद केजरीवाल. केजरीवाल के प्रशासनिक अधिकारी बनने से लेकर मैग्सेसे पुरस्कार जीतने तक के किस्से रामलीला मैदान पर माइक से चीखने लगे थे. लेकिन इसी मैदान में अभी केजरीवाल का नेता बनना बाकी था.

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यहीं ली सीएम पद की शपथ

अन्ना आंदोलन ने यूपीए सरकार को हिलाकर रख दिया. लेकिन इस आंदोलन के खत्म होने पर केजरीवाल ने अपनी पार्टी का भी ऐलान कर दिया था. उन्होंने साफ कर दिया था कि अब वो सिस्टम में आकर सिस्टम को बदलेंगे. आसान भाषा में कहें तो केजरीवाल ने अब नेता बनकर सियासत करने का ऐलान कर दिया था.

यह भी पढ़ें: दिल्ली के नए सीएम के शपथ ग्रहण की आ गई तारीख, रामलीला मैदान में लगेंगी 30 हजार कुर्सियां

28 दिसंबर 2013 की वो तारीख...

पार्टी के ऐलान के 12 महीनों के भीतर ही अरविंद केजरीवाल की पार्टी को दिल्ली में जबरदस्त सफलता मिली और केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए. केजरीवाल ने सीएम पद की शपथ के लिए इसी रामलीला मैदान को चुना. 28 दिसंबर 2013 को रामलीला मैदान में कहानी कुछ और थी. मंच से अरविंद केजरीवाल के भाषण में भी सत्ता की नरमी महसूस की जा सकती थी. रामलीला मैदान में छाई रहने वाली टोपी पर लिखा स्नोगन 'मैं भी अन्ना' से बदलकर 'मैं हूं आम आदमी' हो गया था.

अब बीजेपी ने भी इसी मैदान को चुना

बीजेपी 27 साल बाद दिल्ली में सरकार बनाने जा रही है. बीजेपी के लिए ये जीत कई मायनों में खास है. इसलिए रामलीला मैदान पर शपथ ग्रहण की तैयारियां भी भव्य दिख रही हैं. बताया जा रहा है कि शपथ ग्रहण समारोह में 3 मंच बनाए जाएंगे. एक बड़ा मंच 40×24 का होगा. वहीं, दो मंच 34×40 के होंगे. मंच पर लगभग 100 से 150 कुर्सियां लगाई जाएंगी. आम लोगों के बैठने के लिए करीब 30 हजार कुर्सियां लगाई जाएंगी.

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यह भी पढ़ें: केजरीवाल भी क्या कांग्रेस के खिलाफ ममता जैसी ही खिचड़ी पका रहे हैं?

बता दें कि हाल ही में संपन्न दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 48 सीटें जीतकर AAP को सत्ता से बेदखल किया. 10 साल से अधिक समय तक दिल्ली पर शासन करने वाली AAP, 8 फरवरी को घोषित हुए कड़े मुकाबले वाले चुनाव में केवल 22 सीटें जीत पाई. वहीं, भाजपा 1993 के बाद पहली बार दिल्ली में सरकार बनाने जा रही है.

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