
दिल्ली नगर निगम में अप्रैल 2024 में तीसरे मेयर का चुनाव होना था जो अभी तक नहीं हुआ है. निगम ने इसी महीने तीसरे मेयर का चुनाव कराने की मंजूरी मांगी थी, लेकिन मौजूदा महापौर ने चुनाव में मंजूरी नहीं है. हाल ही में दिल्ली के पूर्व सीएम और आप के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने 16 अक्टूबर को पत्र लिखकर मेयर का चुनाव कराने की बात कही थी.
इसी बीच एमसीडी की मौजूदा मेयर शैली ओबेरॉय ने 28 अक्टूबर को निगम सदन की बैठक बुलाई है. लेकिन ये बैठक महापौर के चुनाव के लिए नहीं है. वहीं, एमसीडी ने मेयर से इसी महीने चुनाव कराने की मंजूरी मांगी थी. पर निगम को चुनाव की मंजूरी नहीं मिली.
शैली ओबेरॉय को इसलिए मिला एक्सटेंशन
अप्रैल 2024 में महापौर के चुनाव के वक्त बीजेपी और आप ने प्रत्याशी घोषित कर दिया, लेकिन पीठासीन अधिकारी तय करने वालों को ये बोलकर लौटा दिया कि फाइल पर सीएम का रिकमेंडेशन नहीं है. साथ ही नए मेयर चुने जाने तक मौजूदा मेयर को पद पर बने रहने के लिए कहा. तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उस वक्त जेल में थे, लिहाजा वो रिकमेंडेशन नहीं कर पाए. तभी अप्रैल 2024 महापौर का चुनाव लंबित चल रहा है.
क्या कहता है MCD का एक्ट
दिल्ली नगर निगम का एक्ट ये कहता है कि नए मेयर के चुनाव की तारीख और वक्त मेयर निर्धारित करता है तो वहीं चुनाव कराने के लिए पीठासीन अधिकारी दिल्ली के उपराज्यपाल तय करते हैं.
एमसीडी एक्ट के अनुसार, महापौर पद पर पहला साल महिला पार्षद के लिए आरक्षित, दूसरा जनरल और तीसरा साल अनुसूचित जाति के पार्षद के लिए आरक्षित होता है.
दिल्ली नगर निगम के मेयर का चुनाव हर साल अप्रैल में होता है. दिसंबर 2022 में जब निगम के आम चुनाव हुए तो आप ने 134 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इसके बाद आप पार्षद डॉ. शैली ओबेराय फरवरी 2023 महापौर बन गई थीं. वित्तीय वर्ष खत्म हुआ तो अप्रैल 2023 में हुए महापौर के चुनाव में फिर शैली ओबेराय महापौर चुनी गईं. अप्रैल 2024 का महापौर चुनाव हो नहीं पाया थी.
बीजेपी ने साधा निशाना
चुनाव जब भी टलता है तो आप और बीजेपी दोनों एक-दूसरे पर अनुसूचित जाति विरोधी होने का आरोप लगाया. बीजेपी के सीनियर नेता और निगम केशवपुरम जोन के चेयरमैन योगेश वर्मा का दावा है कि मेयर चाहें तो आज चुनाव हो जाए, लेकिन अनुमति नहीं देने से साफ हो गया कि ये लोग अनुसूचित जाति विरोधी हैं.
योगेश का दावा है कि नवंबर के दूसरे हफ्ते में ब्राजील में मेयर्स की बड़ी कांफ्रेंस है, लेकिन मौजूदा मेयर तो सरकारी खर्चे पर घूमने जाना चाहती हैं. यही वजह है कि नए मेयर के चुनाव की अनुमति नहीं दी गई. जो कि एक रिजर्व कैटेगरी का पद है.