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कुतुब मीनार से नहीं हटेंगी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां, कोर्ट ने पुरातत्व विभाग को रोका

कुतुबमीनार परिसर में बनी क़ुव्वत उल इस्लाम मस्जिद परिसर में रखी हुई देवी-देवताओं की मूर्ति को परिसर में उचित स्थान पर रखने की मांग हुई थी. अब साकेत कोर्ट ने पुरातत्व विभाग को कुतुबमीनार के परिसर से मूर्तियां हटाने पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया.

कुतुब मीनार परिसर में भगवान गणेश की मूर्ति. कुतुब मीनार परिसर में भगवान गणेश की मूर्ति.
अनीषा माथुर/संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 12:49 PM IST
  • शाम तक जारी होगा साकेत कोर्ट का विस्तृत आदेश
  • मूर्तियों के आधार पर मांगा गया है कब्जा

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) विभाग को कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद के ढांचे से सनातन हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां हटाने से रोक दिया है. याचिकाकर्ताओं के वकील  विष्णु जैन ने बताया कि कोर्ट का ये आदेश उनकी प्रार्थना के अनुकूल है जिसमें मूर्तियों के आधार पर ही उस जगह पर कब्जा मांगा गया था. साथ ही वहां अपने आराध्य देवी देवताओं की पूजा सेवा का अधिकार भी मांगा गया था.

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सनातन हिंदू देवी देवताओं की ओर से वकील हरिशंकर जैन ने संकेत कोर्ट में कहा कि क़ुव्वत उल इस्लाम मस्जिद परिसर में भगवान गणेश की दो मूर्तिया नीचे पड़ी हुई है, जिसकी वजह से करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं. याचिका में गुहार लगाई गई है कि भगवान गणेश की मूर्तियों को लेकर नेशनल मोन्यूमेंट ऑथिरिटी द्वारा ASI को दिए गए सुझाव के मुताबिक नेशनल म्यूज़ियम में रखने के बजाए परिसर में ही उचित स्थान पर रखा जाना चाहिए.

याचिका में कहा गया है कि जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान गणेश भगवान शिव, देवी गौरी, भगवान सूर्य और हनुमान जी समेत 27 मंदिरों के अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं. कई मूर्तियां पूर्ण हैं, लेकिन कुछ के अंग मुस्लिम आक्रांताओं ने भंग कर दिए थे.

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पुजारियों का ये है दावा

बता दें कि कुतुब मीनार के पास स्थित योगमाया मंदिर के पुजारियों का दावा है कि कुतुब मीनार के अंदर भगवान गणेश की पूजा कई सालों से होती आ रही थी. इनका यह भी दावा है कि राजा पृथ्वीराज चौहान द्वारा यहां पर मंदिर का निर्माण किया गया था. यहां पर पारंपरिक तरीके से पूजा-पाठ होती थी, लेकिन मुगलों के आने के से बाद इन मंदिरों को तोड़कर यहां मस्जिद बना दी गई.

उन्होंने यह भी दावा किया कि 2000 तक कुतुब मीनार के अंदर भगवान की आरती में हिस्सा भी ले चुके हैं. पारंपरिक पुजारी परिवार की मांग है कि जिस मंदिर को मुगलों ने तोड़ा था उसे पुनः स्थापित कर वहां पर पूजा और आरती शुरू की जाए. 

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