
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा केस में भूमिका को लेकर फेसबुक अधिकारी पेश नहीं हुए हैं. फेसबुक की तरफ से दिल्ली विधानसभा समिति को चिट्ठी लिखकर नोटिस पर आपत्ति जाहिर की गई है. साथ ही कहा गया है कि ये नोटिस वापस लिया जाए.
शांति और सद्धभाव पर गठित दिल्ली विधानसभा की कमेटी की तरफ से फेसबुक को नोटिस भेजा गया था. इस नोटिस में फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन को 15 सितंबर को 12 बजे तक कमेटी के सामने पेश होने के लिए कहा गया था.
फेसबुक अधिकारी तो पेश नहीं हुए लेकिन फेसबुक की तरफ ट्रस्ट एंड सेफ्टी के डायरेक्टर विक्रम लांगा ने कमेटी को चिट्ठी भेजी है. इस चिट्ठी में विधानसभा समिति के नोटिस पर आपत्ति जाहिर करते हुए इसे वापस लेने को कहा गया है. चिट्ठी में ये भी कहा गया है कि लॉ एंड आर्डर का मामला केंद्र सरकार के अधिकार में है. दूसरी तरफ संसद की एक समिति बनी हुई है जिसमें फेसबुक ने जवाब दिया है.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, इसी साल फरवरी में नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में दंगे हुए थे. इसके बाद दिल्ली विधानसभा की सद्भाव एवं शांति कमेटी के पास फेसबुक पर नफरत भरी सामग्री पोस्ट होने और फेसबुक द्वारा उसकी अनदेखी करने की शिकायतें आईं.
इस कमेटी के अध्यक्ष आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा हैं. राघव चड्ढा ने बताया है कि प्राथमिक तौर पर कमेटी ने ये पाया है कि दिल्ली दंगों को भड़काने में फेसबुक का भी हाथ था, लिहाजा फेसबुक को आरोपी मानते हुए उसके खिलाफ भी जांच होनी चाहिए. कमेटी ने सबूतों का हवाला देते हुए ये मांग उठाई थी और इसी कड़ी में फेसबुक के वाइस प्रेसिडेंट को तलब किया गया था, लेकिन फेसबुक ने नोटिस वापस लेने की बात कही है.
विधानसभा कमेटी ने बताया अपमान
फेसबुक के इस रवैये को राघव चड्ढा ने दिल्ली विधानसभा की तौहीन बताया है. उन्होंने कहा, ''ये दिल्ली के 2 करोड़ लोगों का अपमान है. फेसबुक के वकीलों और सलाहकारों ने उनको बहुत गलत सलाह दी है. संसद और विधानसभा में एक ही मुद्दे और अलग-अलग मुद्दे पर चर्चा हो सकती है लेकिन यहां तो मुद्दे अलग हैं. दिल्ली विधानसभा समिति और संसद की समिति अलग अलग मुद्दे पर चर्चा कर रही हैं. दिल्ली विधानसभा दिल्ली दंगों में फेसबुक के रोल के ऊपर चर्चा कर रही है. ये कहना है कि संसद की समिति इस पर विचार कर रही है और हमने वहां जवाब दे दिया है ये गलत है.''
राघव चड्ढा ने ये भी बताया कि विधानसभा समिति चाहे तो वारंट जारी करवा सकती है. फेसबुक इस समिति से भाग रहा है, कुछ छुपा रहा है. ऐसा लगता है जो आरोप दिल्ली दंगों के बारे में फेसबुक पर लगे शायद वो सही हैं. ऐसा लगता है चोर की दाढ़ी में तिनका है.
राघव चड्ढा ने ये भी कहा कि चेतावनी के साथ एक आखिरी मौका दे रहे हैं. फेसबुक इंडिया के MD और वाइस प्रेजिडेंट अजित मोहन पेश हों.