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RSS से जुड़े भारतीय किसान संघ ने सरकार को कंफ्यूज बताकर रख दी ये बड़ी मांग

बीते दो हफ्तों से पंजाब और दिल्ली के बॉर्डर्स पर किसान और पुलिस के बीच गतिरोध थम भले गया हो, लेकिन खत्म नहीं हुआ है. वहीं आरएसएस से संबंधित भारतीय किसान संघ ने मौजूदा गतिरोध की वजह से किसान और सरकार दोनों को आड़े होथों लिया.

फाइल फोटो फाइल फोटो
राम किंकर सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 11:57 PM IST

बीते दो हफ्तों से पंजाब और दिल्ली के बॉर्डर्स पर किसान और पुलिस के बीच गतिरोध थम भले गया हो, लेकिन खत्म नहीं हुआ है. वहीं आरएसएस से संबंधित भारतीय किसान संघ ने मौजूदा गतिरोध की वजह से किसान और सरकार दोनों को आड़े होथों लिया.

भारतीय किसान संघ का मानना है कि मान लें कि ये आंदोलन है, किसान भी बैठे हुए हैं फिर भी यह पूरा राजनीतिक है. अगर हर किसान आंदोलन के लिए बोलते रहेंगे तो पूरे देश के किसी कोने में इस तरह का आंदोलन करने से पहले लोग 100 बार सोचेंगे. सरकार भी गलत संदेश देश को दे रही है जो हिंसा करेगा, गड़बड़ करेगा उससे ही सरकार बात करेगी. इसमें सरकार को अपनी मंशा बदलनी चाहिए. अभी का आंदोलन एक दूसरी दिशा में जा रहा है. भारतीय किसान संघ के आल इंडिया जनरल संक्रेटरी मोहिनी मोहन मिश्रा ने इसी वजह से कहा कि किसान बैठे हैं, लेकिन हम इसे किसान आंदोलन नहीं बोलते हैं.

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MSP को हां तो MRP को ना क्यों?
मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि मैक्सिमम रिटेल प्राइस पर हम अपने सामान क्यों नहीं बेचे ? इस पर किसान और सरकार की सहमति होनी चाहिए. C2 + 50% की जो बात एमएसपी के बारे में हो रही है, स्वामीनाथन ने भी इसकी वकालत की थी, लेकिन C2 + 50% एक कन्ज्यूरिंग स्टेट है. 

आइए इसे समझते हैं. इसमें हर राज्य में जितना कॉस्ट आफ प्रोडक्शन यानी खर्चा होता है उसको इकट्ठा करके उसका एवरेज निकाला जाता है और फिर प्राइस डिक्लेअर करते हैं. लेकिन ऐसे बहुत से राज्य हैं जहां पर किराया बहुत ज्यादा लगता है, फर्टिलाइजर की कास्ट काफी ज्यादा है. कहीं 800 रुपये लेबर है तो कहीं 250 में ही मिल जाती है. वहीं खाद नहीं डालते तो कई राज्यों में अपना बीज डालते हैं. यही वजह है कि कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन हर राज्य का अलग अलग होता है. और इस पर एवरेज निकालेंगे तो बॉर्डर पर बैठे किसानों को ही सबसे ज्यादा नुकसान होगा. ऐसे में अलग-अलग राज्य केंद्र से मिलकर बात करें और अपनी अपनी राज्य के बारे में तय कर लें.

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एग्री इनपुट पर जीएसटी खत्म हो- भारतीय किसान संघ
ट्रैक्टर,पंप, और दूसरे खेती के इनपुट पर जीएसटी लगता है. कानून के हिसाब से किसानों को इनपुट क्रेडिट मिलना चाहिए. भारतीय किसान संघ ने मांग की है कि जीएसटी इनपुट पर खत्म करके किसानों को क्रेडिट इनपुट देना चाहिए. इतने सालों से जीएसटी पर क्रेडिट इनपुट नहीं मिल रहा है, समझ से परे है कि सरकार ने ऐसा क्यों नहीं किया.

भारतीय किसान संघ की ये मांग
भारतीय किसान संघ ने मांग की है कि किसान का खर्चा और महंगाई बढ़ रही है लिहाजा किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी की जानी चाहिए. तभी किसानों का भला होगा. किसान सम्मन निधि सरकार के द्वारा शुरू होने के पहले से ही भारतीय किसान संघ ने कहा था कि किसानों के खाते में डायरेक्ट पैसे डाले जाने चाहिए. फर्टिलाइजर सब्सिडी के नाम पर कंपनियों को पैसा नहीं दिया जाना चाहिए.

मोहिनी मोहन मिश्र का कहना है कि सरकार मौजूदा किसानों की मांग को लेकर कंफ्यूज है. देश में हजारों फसलें पैदा करने वाला किसान हैं. सरकार को अहिंसक और अराजनीतिक आंदोलन करने वाले लोगों से बातचीत करके रास्ता निकाला जाना चाहिए. मेडिसिनल प्लांट, फूल और सेब की भी खेती होती है इन फसलों के बारे में कौन सोचेगा? सरकार भी चाहती है कि डायवर्सिफिकेशन फसल का हो.

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भारतीय किसान संघ के बैनर तले राजस्थान के किशनगढ़ में देश के 500 किसान प्रतिनिधि संगठनों ने सरकारी तंत्र के माध्यम से मंडियों के बाहर लूट पर विरोध जताया. किसान मंडी में और मंडी के बाहर भी टैक्स दे रहे हैं इसको सरकार खत्म करें. सारी बीजों का मालिक किसान ही है कंपनी और सरकार नहीं.

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