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दिल्ली की 123 संपत्तियों पर वक़्फ़ बोर्ड के कब्जे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई 13 दिसंबर को होगी. कोर्ट को न्याय मित्र ने बताया कि इस मामले पर अभी केंद्र सरकार की तरफ स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई है. लिहाजा सरकार को थोड़ी मोहलत दी जाए.
इस मसले को लेकर हाई कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं. कोर्ट में दायर याचिकाओं में 1 जून 1984 के आदेश पर अमल करने की गुहार लगाई गई है. इसके तहत हाई कोर्ट ने इन प्रॉपटीज को सरकारी कब्जे में लेने का निर्देश दिया था.
क्या है मामला?
इस मामले पर याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मनमोहन सिंह सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष यानी 2014 की शुरुआत में इस आदेश को धता बताकर इन संपत्तियों को वक़्फ़ बोर्ड को ट्रांसफर करने का फैसला ले लिया था. जबकि मोदी सरकार ने यूपीए सरकार के रुख के विपरीत इन सम्पत्तियों को वापस सरकार के कब्जे में लेने की कवायद शुरु कर दी है.
केंद्र और वक्फ बोर्ड ने किया HC का रुख
केंद्र सरकार के आवास और शहरी विकास मंत्रालय के लैंड और डवलपमेंट ऑफिस ने पिछले साल फरवरी में दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के चैयरमैन अमानतुल्लाह खान को पत्र लिखकर इसकी सूचना भी दी थी. इसके खिलाफ दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड ने भी दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है.
वक्फ क्या है?
'वक्फ' अरबी भाषा के 'वकुफा' शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है ठहरना. वक्फ का मतलब, दरअसल उन संपत्तियों से है जो इस्लामी कानून के तहत विशेष रूप से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए समर्पित हैं. इस्लाम में ये एक तरह का धर्मार्थ बंदोबस्त है. वक्फ उस जायदाद को कहते हैं, जो इस्लाम को मानने वाले दान करते हैं. ये चल-अचल दोनों तरह की हो सकती है. ये दौलत वक्फ बोर्ड के तहत आती है. जैसे ही संबंधित संपत्ति का स्वामित्व बदलता है तो यह माना जाता है कि यह संपत्ति मालिक से अल्लाह को हस्तांतरित हो गई है. इसके साथ ही यह अपरिवर्तनीय हो जाता है.