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HC की तल्ख टिप्पणी, कहा- नेताओं के लिए गलती स्वीकार करना उनके खून में नहीं

दिल्ली में न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा था. कोर्ट ने दिल्ली सरकार को न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने पर विचार करने को कहा है.

दिल्ली हाई कोर्ट दिल्ली हाई कोर्ट
पूनम शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2021,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST
  • न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने को याचिका
  • फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने पर विचार करे दिल्ली सरकारः HC
  • HC ने दिल्ली सरकार को स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा

न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने को लेकर लगाई गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि नेता और अफसरशाही के लिए गलती और अयोग्यता को स्वीकार करना बेहद मुश्किल है और ये उनके खून में नहीं है.

दरअसल, दिल्ली में न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा था. कोर्ट ने दिल्ली सरकार को न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने पर विचार करने को कहा है. कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार को स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा है.

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कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से जुड़े जुडिशल ऑफिसर के लिए ही यह पर्याप्त होगा. हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक अधिकारियों या जजों को इस दायरे में लाने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि इसको लेकर तमाम तरह के अलग प्रोटोकॉल हैं.

3 मौत के बाद याचिका दाखिल
पिछले कुछ वक्त में कोरोना से 3 न्यायिक अधिकारियों की मौत हो चुकी है. ऐसे में न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करके कुछ सुविधाएं देने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी.

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हाई कोर्ट में याचिका दिल्ली जुडिशल सर्विस एसोसिएशन की तरफ से दाखिल की गई है. इस याचिका में कहा गया है कि न्यायिक अधिकारी न्यायिक तंत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए बाहर निकल रहे हैं. बहुत सारे न्यायिक अधिकारियों को जेल जाकर भी मामलों की सुनवाई करनी पड़ रही है. लगातार न्यायिक अधिकारी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं. ऐसे में लोगों को न्याय दिलाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया जाए.

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सिस्टम बनाए जाने की दरकार 
याचिका में कहा गया है कि न्यायिक अधिकारियों को कोई वरीयता या वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं चाहिए, लेकिन एक सिस्टम बनाए जाने की जरूरत है जिससे न्यायिक अधिकारी अगर अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए कोरोना से ग्रसित हो रहे हैं तो उनकी जान बचाने के लिए बेहतर इलाज मिल सके. पिछले दिनों में जिस तरह से अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी और दवाइयों का अकाल रहा है, उससे लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है जिसमें न्यायिक अधिकारी भी शामिल हैं.

इस पर कोर्ट ने कहा कि नेता और अफसरशाही के लिए गलती और अयोग्यता को स्वीकार करना बेहद मुश्किल है. ये उनके खून में नहीं है. दिल्ली सरकार की तरफ से पेश वकील ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा दिए जाने में सरकार को कोई परेशानी नहीं है कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में दिल्ली सरकार अपनी एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे.

 

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