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जांच कमेटी, मुआवजा, पॉलिटिक्स और बुलडोजर का सिंबोलिक एक्शन... क्या इससे रुक पाएंगे ओल्ड राजेंद्र नगर जैसे हादसे?

दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में स्थित कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से तीन स्टूडेंट्स की मौत का मामला गरमा गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने घटना की जांच के लिए सोमवार को एक कमेटी गठित कर दी है. इससे पहले पुलिस ने सोमवार को बिल्डिंग के चारों मालिक समेत उस एसयूवी के ड्राइवर को भी गिरफ्तार कर लिया, जिसकी वजह से मुख्य सड़क पर जमा पानी प्रेशर से आगे बढ़ा और कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में घुस गया था.

दिल्ली के राजेंद्र नगर में राव IAS स्टडी सर्कल में हादसे के बाद सोमवार को मौके पर बुलडोजर पहुंचा. दिल्ली के राजेंद्र नगर में राव IAS स्टडी सर्कल में हादसे के बाद सोमवार को मौके पर बुलडोजर पहुंचा.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 30 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 11:49 AM IST

सेंट्रल दिल्ली के ओल्ड राजेंद नगर इलाके में राव IAS स्टडी सर्कल में बेसमेंट में पानी भरने से तीन स्टूडेंट्स की मौत हो गई. इनमें दो लड़कियां शामिल हैं. घटना शनिवार की है और शासन से लेकर तीन दिन बाद यानी सोमवार को नींद से जागा. केंद्र सरकार ने जांच के लिए सात सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है. ये कमेटी हादसे की जांच करेगी और जवाबदेही तय करेगी. नीति में बदलाव की सिफारिश करेगी और सरकार को 30 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट सबमिट करेगी और उसमें ये बताएगी कि ऐसे हादसे रोकने के लिए क्या उपाय लागू किए जाने चाहिए.

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इस बीच, दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना भी सोमवार को मौके पर पहुंचे और उन्होंने स्टूडेंट्स से बात की. LG ने आश्वासन दिया कि जिम्मेदारी तय की जाएगी और एक्शन लिया जाएगा. उन्होंने हादसे में मारे गए तीनों स्टूडेंट्स के परिजन को 10-10 लाख रुपए मुआवजा दिए जाने का ऐलान किया. घटना के लिए दोषी पाए जाने वाले दिल्ली अग्निशमन सेवा, पुलिस और दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ 24 घंटे के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया. हालांकि, छात्रों का गुस्सा कम नहीं हुआ. उनका कहना है कि हमें मुआवजा नहीं, न्याय चाहिए.

AAP के खिलाफ बीजेपी-कांग्रेस धरने पर...

सोमवार को इस हादसे पर राजनीति भी खूब देखने को मिली. एमसीडी सदन में भी हंगामा हुआ, जिसके कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. दिल्ली की सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर आम चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस भी मैदान में आई और धरना दिया. MCD बैठक स्थगित होते ही BJP-कांग्रेस के नेता धरने पर बैठ गए. बीजेपी ने भी केजरीवाल सरकार को घेरा. बीजेपी ने जलबोर्ड, फायर सर्विस और एमसीडी के विरोध में AAP कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. BJP ने सीएम केजरीवाल का इस्तीफा भी मांगा. वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी नालों से गाद निकालने के निर्देश जारी करने में कथित तौर पर विफल रहने वाले अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग की और एलजी सचिवालय के पास विरोध प्रदर्शन किया.

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संसद में भी गूंजा मामला

यह मामला संसद में भी गूंजा और लोकसभा में बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराया. सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पूछा, यूपी सरकार अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाती है. क्या यहां भी बुलडोजर चलाया जाएगा? कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, सेफ्टी मानकों का उल्लंघन हुआ है. नालों की सफाई की जानी चाहिए. ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए.

दिल्ली पुलिस ने एमसीडी को भी नोटिस दिया है और जानकारी मांगी है. दिल्ली पुलिस ने पूछा, ओल्ड राजेंद्र नगर इलाके में ड्रेनेज सिस्टम की जिम्मेदारी किस अफसर की है? इलाके में साफ-सफाई का काम कौन देखता है? क्या क्षेत्र में ठेके पर भी किसी को काम दिया गया था?

एक्शन में आई MCD, बुलडोजर लेकर पहुंची

दिल्ली नगर निगम की टीमें भी सोमवार को एक्शन में दिखीं. टीमें बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचीं और कोचिंग सेंटर वाले इलाकों में अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाया. ओल्ड राजिंदर नगर में बरसाती पानी की नालियों को कवर करने वाले अतिक्रमण को ध्वस्त किया गया है. यह अभियान अगले कुछ दिन तक जारी रहेगा. इससे पहले एमसीडी की टीमों ने ओल्ड राजेंद्र नगर और मुखर्जी नगर में ऐसे करीब 20 कोचिंग सेंटर सील हुए हैं, जहां बेसमेंट में लाइब्रेरी और क्लासेस संचालित की जा रही थी. एमसीडी का कहना था कि अतिक्रमण के कारण ड्रेनेज चोक हुए. कई कोचिंग सेंटर्स ने बिल्डिंग का निर्माण किया और ड्रेनेज सिस्टम बंद कर दिया. लापरवाही पाए जाने पर एक जेईएन को नौकरी से निकाल दिया है. एक एईएन को सस्पेंड कर दिया है. क्षेत्रीय एक्सईएन को कारण बताओ नोटिस दिया है.

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जांच में सामने आया है कि बारिश होने से अतिरिक्त पानी सड़क पर जमा हो गया था. सड़क किनारे जो नालियां हैं, उन्हें अतिक्रमणकारियों ने ढक दिया, जिससे साफ-सफाई भी नहीं हो पाती थी और जब बाढ़ आई तो सैलाब सड़कों पर आ गया.

अब तक सात गिरफ्तारियां?

पुलिस ने अब तक सात गिरफ्तारियां की हैं. इनमें कोचिंग सेंटर के मालिक अभिषेक गुप्ता और कोऑर्डिनेटर देशपाल, चारों बिल्डिंग मालिक और उस एसयूवी कार के ड्राइवर मनुज कथूरिया को भी अरेस्ट कर लिया है, जिसकी वजह से सड़क का पानी प्रेशर से बढ़ा और कोचिंग सेंटर का गेट तोड़कर बेसमेंट में घुस गया था. सातों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है. बिल्डिंग के चार मालिक हैं. पुलिस उपायुक्त (मध्य) एम हर्ष वर्धन का कहना था कि बिल्डिंग की प्रत्येक मंजिल के अलग-अलग व्यक्ति मालिक हैं. इनमें तेजिंदर सिंह, परविंदर सिंह, हरविंदर सिंह और सरबजीत सिंह का नाम शामिल है.

कैसे हो गया हादसा?

रविवार को मरने वालों की पहचान यूपी की श्रेया यादव (22 साल), तेलंगाना की तान्या सोनी (21 साल), केरल की नेविन डाल्विन (29 साल) के रूप में हुई. राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने गैर इरादतन हत्या, लापरवाही के कारण मौत, बिल्डिंग के रखरखाव में लापवाही, जानबूझकर चोट पहुंचाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है. पुलिस एफआईआर में साफ लिखा गया है कि पानी की निकासी का उचित इंतजाम नहीं था, इसलिए बेसमेंट में पानी भर गया. बेसमेंट में भी सिर्फ एक ही एंट्री-एग्जिट पॉइंट था और लाइब्रेरी अवैध रूप से चल रही थी. रही सही कसर बायोमेट्रिक सिस्टम ने पूरी कर दी. बाढ़ के कारण बायोमेट्रिक सिस्टम बंद हो गया था. अगर एग्जिट फ्री होता तो छात्र भाग सकते थे. बेसमेंट में 3 मिनट में 12 फीट पानी भर गया था. जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से बचाव अभियान के दौरान पानी बाहर निकालने में पांच घंटे से ज्यादा का वक्त लगा.

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क्या हादसे रोक पाएंगी एजेंसियां?

अब बड़ा सवाल यह उठता है कि देर से जगी एजेंसियां क्या ओल्ड राजेंद्र नगर जैसे हादसे रोक पाएंगी? या ऐसे हादसे दोबारा नहीं होंगे? हालांकि, यह कह पाना मुश्किल है, लेकिन अब तक यही देखने को मिलता रहा है कि हादसे के कुछ दिनों तक ही सरकारी एजेंसियां सक्रिय रहती हैं और कड़ाई से नियमों का पालन करवाए जाने का दावा करती हैं. बाद में हालात जस के तस हो जाते हैं और बेपरवाह सिस्टम लोगों को उनके हाल पर छोड़ देता है. दिल्ली में इस तरह के हादसों से ना सिर्फ सिस्टम की पोल खुलती है, बल्कि लोगों की जिंदगी भी खतरे में चली जाती है. यहां केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, उपराज्यपाल और दिल्ली नगर निगम के हाथों में व्यवस्थाएं संभालने की जिम्मेदारी है. जब कोई बड़ा हादसा होता है तो प्रशासन ताबड़तोड़ एक्शन लेने के दावे करता है. कड़े नियम लागू करने का आश्वासन देता है. कुछ लोगों के खिलाफ एक्शन भी लिया जाता है, लेकिन वक्त के साथ पूरा सिस्टम सुस्त पड़ जाता है. जून 2023 में भी मुखर्जी नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर में आग लग गई थी. जान बचाने के लिए स्टूडेंट्रस बिल्डिंग की तीसरी मंजिल से कूद गए थे. इस घटना के बाद फायर ब्रिगेड की एनओसी से लेकर निर्माण कार्य तक सवालों के घेरे में आए थे. एमसीडी से लेकर अन्य जांच एजेंसियों ने ऑडिट किए जाने का दावा किया था. लेकिन कुछ दिन बाद फिर वही हालात बन गए और अब ओल्ड राजेंद्र नगर जैसे हादसे ने सिस्टम को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. दिल्ली में ऐसे हादसों की लंबी लिस्ट है.

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फिलहाल, इस घटना के बाद उपराज्यपाल कार्यालय ने एक बयान में कहा, इस साल की शुरुआत में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के तहत गठित एमसीडी और डीएफएस की एक संयुक्त टास्क फोर्स राजेंद्र नगर क्षेत्र की सभी बिल्डिगों का सर्वे करेगी. यह सभी बेसमेंट और अन्य अवैध स्ट्रक्चर को सील करेगा जो बिल्डिंग बायलॉज, एमपीडी 2021 और अग्नि सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन कर रहे हैं.

शिकायतें हुईं, लेकिन कर दिया नजरअंदाज

जांच में पता चला है कि बिल्डिंग मालिक ने MCD से जो क्लीयरेंस सर्टिफिकेशन हासिल किया था, उसमें साफ लिखा था कि ग्राउंड फ्लोर के नीचे बनी पार्किंग और उसके नीचे बने बेसमेंट का इस्तेमाल सिर्फ वाहनों की पार्किंग और स्टोरेज के लिए किया जाएगा. लेकिन, उसकी जगह यहां लाइब्रेरी संचालित की जा रही थी. दिल्ली फायर सर्विस ने 9 जुलाई को ही इस बिल्डिंग की NOC तीन साल के लिए रिन्यू की थी. इतना ही नहीं, 24 जून को छात्रा कनिष्का तिवारी ने कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर जाने की शिकायत दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में की थी. इस शिकायत में उन्होंने क्षेत्र में जलभराव की समस्या को उजागर किया था. कनिष्का तिवारी को पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से कन्फर्मेशन भी दिया गया कि उनकी शिकायत आगे एमसीडी को फॉर्वर्ड कर दी गई है. 

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सूत्रों का कहना है कि पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि एक स्टूडेंट ने महीनेभर पहले दिल्ली सरकार के पास शिकायत दर्ज कराई थी कि बेसमेंट में अवैध रूप से लाइब्रेरी संचालित की रही है. हालांकि, कोई एक्शन नहीं लिया गया. यह पहली बार नहीं है, जब बारिश का पानी किसी लाइब्रेरी में भर गया. ओल्ड राजेंद्र नगर में ऐसी कई बिल्डिंग हैं, जिनमें बेसमेंट में लाइब्रेरी का संचालन किया जा रहा है और उनमें बारिश का पानी भर जाता है. पुलिस जांच में पता चला है कि बिल्डिंग मालिकों ने 2021 में बेसमेंट को कोचिंग सेंटर को किराए पर दे दिया था. बेसमेंट में जल निकासी की व्यवस्था नहीं थी. अब पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के बारे में एमसीडी अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है.

सिस्टम से क्या उम्मीदें....

ओल्ड राजेंद्र नगर जैसे हादसे रोकने के लिए एजेंसियों को कई स्तरों पर काम करने की जरूरत है. दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समय पर एक्शन लिया जाए. नियमित निरीक्षण हों और बेहतर प्लानिंग की जरूरत है. हालांकि, ये उपाय पूरी तरह से हादसों को रोक नहीं सकते, लेकिन इससे खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. स्थानीय एजेंसियों की सक्रियता और नागरिकों की सतर्कता से ही ऐसे हादसों को रोका जा सकता है.
सख्त नियम और निरीक्षण: निर्माण कार्यों के लिए सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए और उनका नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करना जरूरी है. इसके लिए स्थानीय नगर निगम और विकास प्राधिकरणों को सक्रिय रूप से काम करना होगा.
फायर सेफ्टी: बिल्डिगों में फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता और उनका सही ढंग से काम करना जरूरी है. हर इमारत में फायर ड्रिल और इमरजेंसी एक्जिट प्लान होना चाहिए.
संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान: संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करना चाहिए और वहां पर विशेष ध्यान देना होगा. यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण कार्य सुरक्षित हैं और किसी भी तरह के हादसे का खतरा कम हो.

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नागरिकों की भागीदारी: स्थानीय निवासियों को भी जागरूक की जरूरत है. उन्हें किसी भी असुरक्षित गतिविधि की जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है. इसके लिए हेल्पलाइन नंबर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाए जा सकते हैं.
स्ट्रक्चर की मजबूती: सभी पुरानी बिल्डिंगों की संरचनात्मक मजबूती की जांच करनी होगी. यदि किसी भी बिल्डिंग में कोई खतरा पाया जाता है तो उसे तुरंत ठीक किया जाना चाहिए.
सक्रिय निगरानी: एजेंसियों को निर्माण स्थलों की सक्रिय निगरानी करना होगा और किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई करना चाहिए.
आधुनिक तकनीक का उपयोग: ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों का उपयोग करके निर्माण स्थलों की निगरानी और निरीक्षण किया जा सकता है.
नियमों का पालन: निर्माण संबंधित सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए. किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करना जरूरी होगा. 

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