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जिन साइकिलों पर रखे बम से हुईं 71 मौतें, वो आरोपियों के लिए कैसे बनीं कवच, जानिए जयपुर ब्लास्ट की पूरी कहानी

साल 2008 में जयपुर में 8 सीरियल ब्लास्ट हुए थे. इस ब्लास्ट की जिम्मदारी एक दिन बाद इंडियन मुजाहिदिन ने ली थी. आतंकियों ने 9 साइकिलों में बम लगाकार उन्हें सर्वाधिक भीड़ वाले स्थानों पर रखा था. शाम साढ़े सात बजे के आस-पास ये ब्लास्ट हुए और इनमें 71 लोग मारे गए, 185 घायल हो गए थे. इस मामले में हाई कोर्ट ने निचली अदालत से फांसी की सजा पाए चारों दोषियों का फैसला पलट दिया है.

जयपुर में 2008 में हुए थे सीरियल बम ब्लास्ट जयपुर में 2008 में हुए थे सीरियल बम ब्लास्ट
विकास पोरवाल
  • नई दिल्ली,
  • 29 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 6:54 AM IST

साल 2008 की मई में जयपुर में सिलसिले वार 8 ब्लास्ट हुए थे. इन सीरियल ब्लास्ट में 71 जानें गई थीं और 185 लोग घायल हो गए थे. मामले में चली लंबी जांच और कोर्ट ट्रायल के बाद साल 2019 में जयपुर की निचली अदालतों ने चार आरोपियों को दोषी माना था और फांसी की सजा सुनाई थी. बुधवार को इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला पलट दिया और आरोपियों को बरी कर दिया. जानिए 15 साल पहले के इस मामले की पूरी कहानी.

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यहां ब्लास्ट में हुई थीं सबसे अधिक मौतें

तारीख 13 मई 2008. गुलाबी नगरी कहे जाने वाले जयपुर में चांदपोल बाजार नाम से जगह है. यहां हनुमान जी का मंदिर है. शाम का समय था और मंगलवार का दिन होने के कारण रोजाना से कुछ ज्यादा ही भीड़ यहां मौजूद थी. बजरंग बली के दर्शन के लिए श्रद्धालु जुटे हुए थे. इसी बीच घड़ी ने ज्यों ही साढ़े सात बजाए, घंटे-घड़ियालों की आवाज न जाने कैसे एक धमाके की आवाज के बीच कहीं गुम हो गई. सेकेंड के कई गुजरते हिस्से में तो पता ही नहीं चला कि क्या हुआ है और धूल-धुआं के बीच जब कान कुछ सुनने लायक और त्वचा कुछ महसूस करने लायक हुई तो जिंदा-घायल लोगों के आगे तकरीबन 20 से अधिक लाशें बिखरी पड़ी थीं. 

जयपुर में हुए थे सिलसिलेवार 8 ब्लास्ट

ये धमाका मंदिर के ही आगे बने पार्किंग स्टैंड में हुआ था. जो जद में आए उनके तो चीथड़े उड़ गए और जो समझ गए कि यहां क्या हुआ वह इधर-उधर भागे. लेकिन भागते भी कहां? वह जैसे ही चांदपोल चौक पहुंचे तो सामने से भी बदहवास लोगों की भीड़ आ रही थी. वो जयपुर के त्रिपोलिया बाजार से भागे आ रहे थे, जो ठीक इसी समय एक और ब्लास्ट का शिकार बने थे, तब तक ऐसा ही धमाका छोटी चौपड़ में भी हुआ. बदहवास लोग वहां से भी भागे तो जौहरी बाजार में धमाका हो गया. अब लोगों को समझ में आ गया था कि उनके शहर में सीरियल बम ब्लास्ट हो रहा है और वे कहीं भी भागकर जाएं, अगर मरना हुआ तो मर ही जाएंगे. उस दिन शहर में एक बाद एक आठ ब्लास्ट हुए थे. गुलाबी शहर उस शाम लाल हो गया.  

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शाम 7:20 बजे- पहला विस्फोट, हवा महल के सामने खांदा माणिक चौक, एक की मौत
शाम 7:25 बजे- दूसरा विस्फोट, त्रिपोलिया बाजार, 6 लोगों की मौत
शाम 7:30 बजे- तीसरा विस्फोट, छोटी चौपड़ कोतवाली के सामने, 2 पुलिसकर्मियों की मौत
शाम 7:30 बजे- चौथा विस्फोट, त्रिपोलिया बाजार में एक और ब्लास्ट, 5 की मौत
शाम 7:30 बजे- पांचवी विस्फोट, चांद पोल, हनुमान मंदिर पार्किंग के पास, 25 की मौत
शाम 7:30 बजे- छठा विस्फोट, हनुमान मंदिर विस्फोट के कुछ सेकेंड बाद ही जौहरी बाजार में ब्लास्ट, 9 लोगों की मौत
शाम 7:35 बजे- सातवां विस्फोट, छोटी चौपड़ के पास, 2 की मौत
शाम 7:36 बजे- आठवा विस्फोट, सांगनेरी गेट हनुमान मंदिर, 17 लोगों की मौत

आरोपियों को 2019 में मिली फांसी की सजा

इस ब्लास्ट के बाद जांच का दौर शुरु हुआ. राजस्थान सरकार ने मामले के जल्द खुलासे और आतंकियों को पकड़ने के लिए एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड़ (एटीएस) का गठन किया था. पुलिस ने मामले में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया था. इनमें से 3 आरोपी अब तक फरार हैं, जबकि 3 हैदराबाद और दिल्ली की जेल में बंद हैं. दो गुनहगार दिल्ली में बाटला हाउस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं. चार आरोपी जयपुर जेल में बंद थे, जिन्हें निचली अदालत ने साल 2019 में फांसी की सजा सुनाई थी. साल 2019 में 11 साल बाद जयपुर की निचली अदालत ने चार आरोपियों को दोषी करार दिया था. आरोपियों को UAPA के तहत अलग-अलग धाराओं में दोषी माना गया था और एक को बरी भी किया गया था. इस मामले की सुनवाई में विशेष कोर्ट के न्यायाधीश अजय कुमार शर्मा ने फैसला सुनाया था.

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साइकिल में लगाए गए थे बम

एटीएस की जो थ्योरी इस मामले में सामने आई थी. उसके मुताबिक, इंडियन मुजाहिदीन ने इस ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली थी. 2008 में 12 आतंकी दिल्ली से बस से बम लेकर जयपुर आए थे. जयपुर में ही उन्होंने 9 साइकिलें खरीदीं और इन्हीं साइकिलों में बम लगाकर टाइम सेट करके अलग-अलग जगहों पर खड़ी कर दी थीं. इसके बाद आतंकी शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली आ गए थे. आतंकियों ने 9 बम लगाए थे, जिनमें 8 बम तो 16 मिनट में फट गए थे, लेकिन नौवें बम को एक गेस्ट हाउस के पास प्लांट किया गया था. इसके फटने का समय अन्य ब्लास्ट से डेढ़ घंटे बाद का था. बम डिफ्यूजन स्क्वाड ने इसे फटने के टाइम के कुछ मिनट पहले डिफ्यूज कर दिया था. 

हाईकोर्ट ने इस आधार पर किया बरी

अब इस मामले में वर्तमान में चलें तो हाईकोर्ट में साइकिल खरीदने वाली थ्योरी के कारण ही दोषियों को बरी किया गया है. जस्टिस पंकज भंडारी और समीर जैन की बेंच इस मामले में बीते 48 दिनों से सुनवाई कर रही थी. उन्होंने 2019 में निचली कोर्ट का फैसला बदलने से पहले कोर्ट ने कहा कि एटीएस को ब्लास्ट के चार महीने बाद पहली बार साइकिल खरीदने की सूचना मिली, तो उन्हें तीन दिन बाद किसने बताया कि आतंकियों ने जयपुर आकर साइकिल खरीदी थी. कोर्ट ने यह भी कहा कि 13 मई को ही आतंकी आए, साइकिल खरीदी, बम लगाए और उसी दिन शताब्दी एक्सप्रेस से चले गए. यह कैसे हो सकता है? कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी कुछ भी ठीक से सिद्ध नहीं कर सके हैं. 

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अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मामले में जांच एजेंसी को उनकी लापरवाही, सतही और अक्षम कार्यों के लिए जिम्मेदार/जवाबदेह बनाया जाना चाहिए. ऊपर बताए गए कारणों से मामला जघन्य प्रकृति का होने के बावजूद 71 लोगों की जान चली गई और 185 लोगों को चोटें आईं, जिससे न केवल जयपुर शहर में, बल्कि हर नागरिक के जीवन में अशांति फैल गई. पूरे देश में हम जांच दल के दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित जांच/अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के लिए राजस्थान पुलिस के महानिदेशक को निर्देशित करना उचित समझते हैं.

कोर्ट ने कहा कि यह मामला संस्थागत विफलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके परिणामस्वरूप गलत/त्रुटिपूर्ण/घटिया जांच हुई है. हमें डर है कि जांच एजेंसियों की विफलता के कारण पीड़ित होने वाला यह पहला मामला नहीं है और अगर चीजों को वैसे ही जारी रहने दिया जाता है तो यह निश्चित रूप से आखिरी मामला नहीं होगा, जिसमें घटिया जांच के कारण न्याय प्रशासन प्रभावित हुआ हो. इसलिए, हम राज्य, विशेष रूप से मुख्य सचिव को जनहित में इस मामले को देखने का निर्देश देते हैं.

जख्म के 15 साल

बदन में सिरहन पैदा कर देने वाली उस शाम को आज 15 साल हो चुके हैं. जयपुर के सीने में उस रोज जो जख्म हुआ, इन 15 सालों में उसे कई बार कुरेदा गया है. आज उसकी याद फिर इसलिए आ गई क्योंकि राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले के 4 दोषियों को मिली फांसी की सजा को पलट दिया है. वहीं राज्य सरकार फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है. इन चारों आरोपियों को जयपुर जिला कोर्ट ने न सिर्फ दोषी माना था, बल्कि फांसी की सजा भी सुनाई थी. 

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(इनपुट: जयकिशन शर्मा)

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