
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के काफिले में शुक्रवार रात एक तेज रफ्तार अज्ञात कार घुस गई. कार ने काफिले में चल रहे सुरक्षा कर्मी की गाड़ी में टक्कर मार दी. दरअसल, जब राज्यपाल का काफिला गुजर रहा था तभी ब्लैक कलर की स्कॉर्पियो कार गवर्नर के रास्ते में आ गई और फ्लीट में चल रही सुरक्षा कर्मी की गाड़ी से टकरा गई. गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान निजी प्रोग्राम में नोएडा सेक्टर-77 में आए थे. पुलिस ने मौके से कार को बरामद कर 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ये घटना नोएडा सेक्टर-113 थाना क्षेत्र की है.
घटना पर नोएडा पुलिस का बयान आया है. नोएडा पुलिस ने कहा है कि उक्त प्रकरण में थाना 113 में FIR रजिस्टर्ड हो गई है और स्कॉर्पियो को चालान कर सीज किया गया है. साथ ही दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने बताया कि दोनों व्यक्ति शराब के नशे में थे. दोनों आरोपियों की पहचान गाजियाबाद निवासी गौरव सोलंकी और मोनू कुमार के रूप में हुई है.
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान नोएडा में एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद दिल्ली जा रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार कार उनके काफिले में घुस गई. तेज रफ्तार वाहन ने राज्यपाल के काफिले में दो बार टक्कर मारी.
गौरतलब है कि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान अपनी बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. पिछले दिनों उन्होंने UCC को लेकर कहा था कि इसका विरोध गलत तरीके से किया जा रहा है. उन्होंने साफ करने की कोशिश की थी, कि यह कानून रीति-रिवाजों पर बिल्कुल भी चोट नहीं है. राज्यपाल ने कहा था कानून का लक्ष्य केवल न्याय की समानता है. चंडीगढ़ में दिए बयान में राज्यपाल ने कहा था कि UCC सभी समुदायों को समान न्याय देने का संवैधानिक उद्देश्य है. हालांकि इसको लेकर गलत नैरेटिव गढ़ा जा रहा है.
राज्यपाल ने कहा था कि UCC के इर्द-गिर्द एक गलत नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि इसे अपनाने से हमारी धार्मिक प्रथाओं में घुसपैठ होगी. ऐसा बिलकुल नहीं है बल्कि इससे सभी समुदाय की महिलाओं को समान न्याय मिलेगा. चाहे वह वैवाहिक हो या संपत्ति विवाद.
UCC पर क्या था बयान
फरवरी में चंडीगढ़ में शामिल एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि आज जो आपत्ति उठाई जा रही है कि समान नागरिक संहिता लागू हो जाती है तो इससे हर समुदाय की पहचान मिट जाएगी और वे विवाह संपन्न कराने, मृतकों को दफनाने और सभी प्रकार की चीजों के लिए एक समान पद्धति अपनाने के लिए मजबूर हो जाएंगे. पूरी तरह से निराधार है. इसका उद्देश्य ये नहीं कि आप क्या रीति-रिवाज और अनुष्ठान अपनाएंगे. यह केवल न्याय की समानता के लिए है.