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मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर वकीलों में जोरदार बहस, ED बोली AAP को बनाएंगे आरोपी... HC ने सुरक्षित रखा फैसला 

शराब नीति घोटाले में मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान वकीलों में जोरदार बहस हुई. बहस के दौरान ईडी और सीबीआई ने भी अपनी-अपनी दलीलें देते हुए सिसोदिया की जमानत याचिका का विरोध किया है. सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सोसिदया (फाइल फोटो) दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सोसिदया (फाइल फोटो)
कनु सारदा/संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2024,
  • अपडेटेड 11:52 PM IST

दिल्ली शराब नीति घोटाले में मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान वकीलों में जोरदार बहस हुई. बहस के दौरान ईडी और सीबीआई ने भी अपनी-अपनी दलीलें देते हुए सिसोदिया की जमानत याचिका का विरोध किया है. सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

अदालत में सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि वह शराब घोटाले में आम आदमी पार्टी को आरोपी बनाएंगे.ईडी के वकील ने न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा के समक्ष दलील दी, मामले में दायर की जाने वाली अगली अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) में आप को सह-अभियुक्त बनाया जा रहा है.

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जांच एजेंसी के वकील ने आगे कहा कि मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया में देरी करने के लिए आरोपी व्यक्तियों द्वारा ठोस प्रयास किए जा रहे हैं. ईडी की दलीलों को स्वीकार करते हुए सीबीआई ने भी भ्रष्टाचार के मामले में आप नेता की जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि देरी के लिए पूरी तरह से आरोपी व्यक्ति जिम्मेदार हैं.

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि एक राजनीतिक दल एंटी मनी लॉन्ड्रिंग कानून के दायरे में नहीं आता है. ये मामला हाईकोर्ट में लंबित है. हाल ही में उच्च न्यायालय ने मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी को बरकरार रखते हुए माना है कि मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) की धारा 70 की धारा के तहत धांधली की गई है. ईडी ने आप की तुलना एक कंपनी और केजरीवाल की तुलना निदेशक के रूप में की थी.

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'ट्रायल शुरू होने का अभी कोई सवाल नहीं है'

मनीष सिसोदियो के लिए जमानत की दलील देते हुए उनके वकील ने कहा कि ईडी और सीबीआई अभी भी मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामले में लोगों को गिरफ्तारियां कर रही है.और मुकदमे का ट्रायल जल्द शुरू होने का कोई सवाल ही नहीं है.

सिसोदिया का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने कहा कि निचली अदालत के न्यायाधीश ने जमानत याचिका खारिज करते हुए यह नहीं दिखाया कि आप नेता ने देरी में कैसे योगदान दिया है.

उन्होंने तर्क दिया कि मैंने अपनी पत्नी से मिलने के लिए आवेदन किया था. इसके बाद मैंने चेक पर हस्ताक्षर करने के लिए एक आवेदन दिया. इससे सुनवाई में देरी कैसे होती है? मैंने कार्यवाही में देरी में कैसे योगदान दिया है? निचली अदालत ने कहा है कि 38 आवेदनों में से 13 सिसोदिया ने दायर किए थे, लेकिन अदालत ने यह नहीं कहा कि मेरे आवेदन ने देरी में कैसे योगदान दिया. मेरी पिछली जमानत खारिज होने के बाद तीन आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है. ईडी मामले में बेनॉय बाबू, संजय सिंह और हाल ही में अरविंद केजरीवाल को जमानत मिल चुकी है. जहां तक मेरे भागने का सवाल है, उस बारे में कोई खतरा नहीं है. मैं (सिसोदिया) 14.5 महीने से हिरासत में हूं.

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मामले में दायर हैं 250 याचिकाएं: ED

आरोपी व्यक्तियों के आचरण को दिखाते हुए, ईडी के वकील ने कहा कि केवल 17 गिरफ्तारियां होने के बावजूद ट्रायल कोर्ट के समक्ष 250 याचिकाएं दायर की गई हैं. उन्होंने कहा, जांच अधिकारी को लगभग हर दिन अदालत में रहना होगा. मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध को आतंकवाद और अन्य गंभीर अपराधों के समान ही गंभीर अपराध माना गया है.

ईडी के वकील ने तर्क दिया और कहा कि एजेंसी के पास रिश्वत देने वालों के डिजिटल सबूत और बयान हैं. साजिश यह देखने के लिए थी कि AAP रिश्वत के रूप में गलत लाभ कमाती है और इस प्रक्रिया में रिश्वत देने वाले व्यक्तियों को अतिरिक्त लाभ सुनिश्चित करती है. वर्तमान आरोपी (सिसोदिया) GoM का हिस्सा थे. वह पार्टी में सर्वोच्च निकाय के सदस्य थे, वह डिप्टी सीएम का पद संभाल रहे थे और आबकारी नीति के प्रमुख थे और एक्साइज विभाग के मंत्री थे. उन्होंने कहा कि रिश्वत के पैसे का इस्तेमाल पार्टी ने गोवा चुनाव में किया था.

मामले के ट्रायल में देरी पर विस्तार से बताते हुए ईडी के वकील ने आरोपी व्यक्तियों में से एक के हवाला देते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में केवल 100 डॉक्यूमेंट का निरीक्षण किया है और 1700 में से 1600 का निरीक्षण करना अभी बाकी है. उच्च न्यायालय में सिसोदिया ने निचली अदालत के 30 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिकाएं इस आधार पर खारिज कर दी गई थीं कि उन्हें जमानत देने के लिए सही समय नहीं था.

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ट्रायल कोर्ट ने खारिज की थी याचिका

ट्रायल कोर्ट ने 2021-22 के लिए दिल्ली शराब नीति के बनाने और कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं के संबंध में सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी.

सीबीआई और ईडी के अनुसार, उत्पाद शुल्क नीति को संशोधित करते समय अनियमितताएं की गईं और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया है. सिसोदिया को घोटाले में उनकी कथित भूमिका के लिए 26 फरवरी, 2023 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. ईडी ने उन्हें 9 मार्च, 2023 को सीबीआई की एफआईआर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था.

बता दें कि दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर, 2021 को नई आबकारी नीति लागू की थी, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सितंबर 2022 के अंत में इसे रद्द कर दिया गया था.

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