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ढांगरी आतंकवादी हमला मामले में नाबालिग गिरफ्तार, आतंकवादियों को शरण देने का आरोप

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार को आतंकवादियों को शरण देने के आरोप में एक नाबालिग को गिरफ्तार किया है. दरअसल, आतंकवादी हमला 1 जनवरी 2023 को हुआ था और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के पांच लोग मारे गए थे. हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. आरोप है कि गिरफ्तार नाबालिग ने आतंकवादियों को शरण दिया था.

प्रतीकात्मक फोटो. प्रतीकात्मक फोटो.
जितेंद्र बहादुर सिंह/कमलजीत संधू
  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 4:14 PM IST

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार को आतंकवादियों को शरण देने के आरोप में एक नाबालिग को गिरफ्तार किया है. पिछले साल जनवरी में जम्मू-कश्मीर के जिला राजौरी के ढांगरी गांव में पांच नागरिकों की हत्या कर दी गई थी. नाबालिग को जिला पुंछ में दर्ज एक अन्य मामले में पर्यवेक्षण गृह में रखा गया था. उसे कल एनआईए ने हिरासत में ले लिया और रिमांड के लिए किशोर न्याय बोर्ड राजौरी के समक्ष पेश किया.  

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दरअसल, आतंकवादी हमला 1 जनवरी 2023 को हुआ था और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के पांच लोग मारे गए थे. हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. मामले को लेकर थाना राजौरी में आईपीसी की धारा 302/307/120B/452/323, यूए (पी) अधिनियम 1967 की धारा 13/16/18 और शस्त्र अधिनियम की धारा 7/27 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.

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NIA ने दोबारा दर्ज की एफआईआर

इसके बाद एनआईए ने 13 जनवरी को मामला अपने हाथ में लेकर दोबारा एफआईआर दर्ज की. एनआईए की जांच से पता चला था कि पकड़ा गया नाबालिग पहले गिरफ्तार किए गए दो अन्य शख्स निसार अहमद उर्फ हाजी निसार और मुश्ताक हुसैन उर्फ चाचा के साथ उन आतंकवादियों को शरण देने में शामिल था, जिन्होंने आतंकवादी हमले को अंजाम दिया था.

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दो महीने तक आतंकवादियों की सहायता 

निसार अहमद और मुश्ताक हुसैन को एनआईए ने 31 अगस्त 2023 को गिरफ्तार किया था और वर्तमान में जम्मू के सेंट्रल जेल कोट भलवाल में बंद है. दोनों ने दो महीने से अधिक समय तक आतंकवादियों को सहायता प्रदान की थी और उन्हें एक ठिकाने में आश्रय दिया था. जिसे उन्होंने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आकाओं सैफुल्ला उर्फ साजिद जट, अबू कताल के निर्देश पर बनाया था. 

मामले में अभी भी चल रही है जांच

एनआईए अधिकारियों की एक टीम ने जांच के दौरान अपराध के वास्तविक अपराधियों की तलाश में नियमित रूप से जम्मू-कश्मीर के राजौरी, पुंछ और रियासी जिलों के पहाड़ी इलाकों में डेरा डाला था. टीम ने बड़ी संख्या में संदिग्ध स्थानों की जांच की और बाद में उपयुक्त आरोपी व्यक्तियों पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्होंने आतंकवादियों को सहायता प्रदान की थी. मामले में जांच अभी भी चल रही है.

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