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24 सप्ताह की प्रेग्नेंट नाबालिग रेप पीड़िता ने कोर्ट से मांगी अबॉर्शन की इजाजत

याचिका में यह भी बताया है कि इस प्रेग्नेंसी से पीड़िता के जान को खतरा भी है. उन्होंने बताया है कि 25 जनवरी को एक सरकारी अस्पताल में रेप पीड़िता का मेडिकल कराया गया था, इसमें पता चला था कि वह 24 सप्ताह की प्रेग्नेंट है.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
पूनम शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2020,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST

  • पीड़िता की याचिका पर HC में सुनवाई आज
  • जस्टिस विभू बाखरू करेंगे सुनवाई

एक नाबालिग रेप पीड़िता ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका लगाकर गर्भपात की इजाजत मांगी है. पीड़िता के गर्भ में 24 सप्ताह का भ्रूण है. इस याचिका पर आज मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होगी. केंद्र सरकार की कैबिनेट ने मेडिकल टर्मिनशन प्रेग्नेंसी (अमेंडमेंट) बिल को मंजूरी दे दी है. यह बिल मेडिकल टर्मिनशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 में संशोधन करेगा. नया बिल 31 जनवरी से शुरू हुए संसद सत्र में पेश किया जाएगा.

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दिल्ली हाई कोर्ट में एक नाबालिग रेप पीड़िता ने गर्भपात की इजाजत मांगने के लिए याचिका लगाई है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट में आज मंगलवार को इस याचिका पर जस्टिस विभू बाखरू सुनवाई करेंगे. रेप पीड़िता नाबालिग की उम्र 16 साल है और उसके गर्भ में 24 सप्ताह का भ्रूण है. पीड़िता की मां ने यह याचिका लगाई है, क्योंकि मेडिकल टर्मिनेशन प्रेग्नेंसी एक्ट के सेक्शन 3 के मुताबिक 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ का अबार्शन करना मना है.

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स्वरूप नगर थाने में मामला दर्ज

नाबालिग के वकील अवधेश मधुकर और प्राची निर्वाण ने याचिका में यह भी बताया है कि इस प्रेग्नेंसी से पीड़िता की जान को खतरा भी है. उन्होंने बताया है कि 25 जनवरी को एक सरकारी अस्पताल में रेप पीड़िता का मेडिकल कराया गया था, इसमें पता चला था कि वह 24 सप्ताह की प्रेग्नेंट है. रेप के इस मामले का स्वरूप नगर थाने में एक मामला दर्ज है. डॉक्टरों ने चेकअप के बाद बताया था कि गर्भ 20 सप्ताह से अधिक का है, इसलिए अबार्शन के लिए इजाजत की जरूत है.

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दरअसल काफी वक्त से महिलाओं के साथ साथ डॉक्टर और कई स्वयंसेवी संगठनों की ओर से अरसे से ऐसी मांग की जा रही थी. कई बार कई कोर्ट गर्भपात की सीमा को बढ़ाने की भी वकालत कर चुकी है.ऐसे में अब हाइकोर्ट में आई इस याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट से आने वाला फैसला बेहद अहम साबित हो सकता है

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वर्तमान संसद सत्र में प्रेग्नेंसी एक्ट में संशोधन का बिल होगा पेश

बता दें कि केंद्र सरकार की कैबिनेट ने मेडिकल टर्मिनशन प्रेग्नेंसी (अमेंडमेंट) बिल को मंजूरी दे दी है. यह बिल मेडिकल टर्मिनशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 में संशोधन करेगा. नया बिल 31 जनवरी से शुरू हुए संसद सत्र में पेश किया जाएगा. इस बिल में अबार्शन के लिए 20 सप्ताह के प्रेग्नेंसी को विशेष परिस्थितियों में 24 सप्ताह तक किया जाएगा. इस विशेष परिस्थितियों में रेप पीड़िता भी शामिल है.

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