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कालकाजी मंदिर में बिना परमिशन नहीं हो सकेगा जागरण, हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि बिना अनुमति के कालकाजी मंदिर में कोई भी जागरण या इसी तरह के कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया सकता. न्यायमूर्ति प्रथिबा एम सिंह ने कहा कि मंदिर का पूर्ण प्रबंधन और नियंत्रण हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासक के अधीन है और इसका परिसर जनता के उपयोग के लिए है.कोई भी व्यक्ति या संस्था इसके किसी भी हिस्से पर विशेष नियंत्रण नहीं रख सकती है.

कालकाजी मंदिर कालकाजी मंदिर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 23 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 10:32 PM IST

कालकाजी मंदिर में कुछ दिनों पहले हुए हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त आदेश किए हैं. हाईकोर्ट ने कहा है कि बिना अनुमति के कालकाजी मंदिर में कोई भी जागरण या इसी तरह के कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया सकता. न्यायमूर्ति प्रथिबा एम सिंह ने कहा कि मंदिर का पूर्ण प्रबंधन और नियंत्रण हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासक के अधीन है और इसका परिसर जनता के उपयोग के लिए है.कोई भी व्यक्ति या संस्था इसके किसी भी हिस्से पर विशेष नियंत्रण नहीं रख सकती है.

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पीटीआई के मुताबिक न्यायाधीश ने कहा, "कालकाजी मंदिर में कोई जागरण आयोजित नहीं किया जाएगा. साथ ही इसी तरह के किसी अन्य आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी. यदि कोई संगठन कोई जागरण या इसी तरह का धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करना चाहता है, तो इसके लिए आवेदन के माध्यम से अनुमति लेने के लिए कोर्ट से संपर्क किया जा सकता है." 

कोर्ट ने कहा, "विद्वान प्रशासक को नियुक्त किया गया है और उसे पूर्ण प्रबंधन और नियंत्रण दिया गया है. किसी भी कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए अनुमति की आवश्यकता होगी. इसके बिना, मंदिर परिसर के भीतर कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा."

आदेश में, कोर्ट ने 27 और 28 जनवरी की मध्यरात्रि में हुई हालिया दुर्भाग्यपूर्ण जागरण घटना को ध्यान में रखा और जांच के संबंध में एक स्थिति रिपोर्ट मांगी, जिसे शीघ्रता से आयोजित किया जाना है. यह कार्यक्रम प्रशासक की अनुमति के बिना आयोजित किया गया था. मंदिर के महंत परिसर में आयोजित जागरण के दौरान 45 वर्षीय महिला की मौत हो गई और 17 लोग घायल हो गए. इस कार्यक्रम में लगभग 1,600 लोग शामिल हुए थे.

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कोर्ट ने अपने आदेश में प्रशासक से श्री कालकाजी मंदिर प्रबंधक सुधार समिति के पुनरुद्धार के लिए कदम उठाने को भी कहा, जो भीड़ प्रबंधन के लिए स्वयंसेवकों की भर्ती कर सकती है. अदालत ने इस संबंध में रिपोर्ट मांगते हुए कहा, "यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए जाएंगे कि मंदिर परिसर में उचित भीड़ प्रबंधन हो."

अदालत का आदेश कालकाजी मंदिर परिसर और उसके आसपास नागरिक सुविधाओं और सफाई के मुद्दे पर कई याचिकाओं पर आया है.

बता दें कि 2021 में न्यायमूर्ति सिंह ने धार्मिक स्थान के संबंध में विभिन्न कार्यों को करने के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के जस्टिस जे आर मिधा को मंदिर का प्रशासक नियुक्त किया था. साथ ही अतिक्रमणों और अनधिकृत कब्जेदारों और दुकानदारों को हटाने का भी निर्देश दिया था, जिनके पास दुकानों पर कब्जा करने का कोई वैध कानूनी अधिकार नहीं था. 

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