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मायूस चेहरे, रूंधे गले और भविष्य की चिंता... दिल्ली में Bike Taxi बैन होने से बेपटरी हुई इनकी जिंदगी

दिल्ली में बाइक टैक्सी (ओला, उबर, रैपिडो) पर बैन लगने के बाद इस व्यापार से जुड़े लोगों के सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा हो गया है. दिल्ली में एक लाख से ज्यादा बाइक टैक्सी राइडर हैं. इन सभी का जीवन बाइक टैक्सी के जरिए होने वाली कमाई से चल रहा था. मगर, अब सभी की कमाई ठप हो गई है. आगे पढ़िए इनकी रुला देने वाली कहानी...

सांकेतिक तस्वीर. सांकेतिक तस्वीर.
मनीष चौरसिया
  • नई दिल्ली,
  • 17 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 7:32 AM IST

दिल्ली में मेट्रो की भीड़ और कैब के महंगे किराए के बीच आम आदमी फंसा हुआ था. तभी उसे एक राहत की सांस लेने का उस वक्त मौका मिला, जब बाइक टैक्सी का ऑप्शन सामने आया. बाइक टैक्सी घर और ऑफिस के बीच दौड़ लगाने वाले आम आदमी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं थी, क्योंकि एक तो इसके जरिए ट्रैफिक में फंसने की कम से कम गुंजाइश थी. साथ ही इसका किराया प्राइवेट कैब से कहीं ज्यादा कम और किफायती था. 

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देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में इसकी डिमांड दिन पर दिन बढ़ती जा रही है. इसी बीच अचानक बाइक टैक्सी को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने बाइक टैक्सी को मोटर व्हीकल एक्ट के हिसाब से अवैध बता दिया. इसके बाद हाल ही में दिल्ली में भी दिल्ली सरकार ने बाइक टैक्सी को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का आदेश जारी कर दिया. 

'दिल्ली में एक लाख से ज्यादा बाइक टैक्सी राइडर'

बात सिर्फ दिल्ली की करें तो यहां एक लाख से ज्यादा बाइक टैक्सी राइडर हैं. इन सभी का जीवन बाइक टैक्सी के जरिए होने वाली कमाई से चल रहा था. मगर, अब सभी की कमाई ठप हो गई है. दिल्ली के रहने वाले बाइक टैक्सी राइडर नरेंद्र कहते हैं कि कोरोना काल से पहले वो पेंट का काम करते थे. कोरोना में उनका काम लगभग बंद हो गया. इसके बाद उन्हें बाइक टैक्सी के बारे में मालूम पड़ा और उन्होंने यह काम करना शुरू कर दिया.

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'इस उम्र में कोई और काम मिल नहीं रहा'

नरेंद्र बताते हैं, "उनका एक बेटा और एक बेटी है. कोविड में बच्चों की पढ़ाई बेहद प्रभावित हुई. बेटा 5th क्लास में होना चाहिए था लेकिन वो अभी 1st में है. एक टाइम पर फीस न भर पाने से बच्चों को स्कूल भी छोड़ना पड़ा लेकिन बाइक टैक्सी के जरिए जीवन थोड़ा संभल गया. बच्चे भी स्कूल जाने लगे और उनके लिए ही बाइक टैक्सी राइडर का काम करना शुरू किया. मगर अब फिर से यह काम बंद हो गया है. इस उम्र में कोई और काम मिल नहीं रहा है. अब समझ नहीं आ रहा कि बच्चों की फीस कैसे भरूं. उनकी पढ़ाई पर एक बार फिर संकट खड़ा हो गया है".

'सपने अब बिखरते नजर आ रहे हैं'

इसी दौरान एक ऐसा शख्स सामने आया जो आईएएस अफसर बनना चाहता है. यूपी के छोटे से गांव से वह दिल्ली आकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा है. घर वालों से पैसे न लेने पड़ें, इसलिए खुद ही पार्ट टाइम बाइक टैक्सी राइडर बन गया था. पहचान जाहिर न करते हुए उसने कहा कि अपनी पढ़ाई करने के लिए यह काम कर रहा था. मगर, दिल्ली सरकार के फैसले ने चोट पहुंचाई है और उसके सपने अब बिखरते नजर आ रहे हैं.

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26 साल के बाइक राइडर अजय कहते हैं कि दिल्ली में ही उनका परिवार रहता है. परिवार का खर्चा रेहड़ी-पटरी पर कचौड़ी की दुकान लगाकर चलता है. 12वीं तक की पढ़ाई का खर्चा रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगा कर निकाला. फिर 12वीं के बाद हायर स्टडी के लिए उसने स्टडी लोन ले लिया और बाइक टैक्सी राइडर का पार्ट टाइम काम करने लगा.

'परिवार की गरीबी दूर करना चाहता हूं, मगर...'

बताया कि स्टडी लोन को बाइक कैसे चलाकर निकाल लेते लेकिन अब काम पूरी तरह से बंद हो गया है. बैंक से लगातार फोन आ रहे हैं. अजय कहता है कि उसका परिवार बेहद गरीब है. वह पढ़-लिखकर परिवार की गरीबी दूर करना चाहता है. मगर, अब यह सपना और दूर होता जा रहा है. नरेंद्र और अजय के साथ ही ऐसे कई अन्य चेहरे सामने आए, जो दिल्ली सरकार के फैसले से मायूस हैं. रूंधे गले से अपना दर्द बयां कर रहे हैं.

इन लोगों का कहना है कि दिल्ली सरकार के निर्णय के बाद समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर अब क्या करें. इस समस्या से पीड़ित लोगों ने एक ग्रुप बनाया है. आगे क्या करना चाहिए, इस बारे में आए दिन इस ग्रुप में चर्चा होती है. इन लोगों का कहना है कि सरकार को उनकी समस्या पर विचार करना चाहिए. बाइक टैक्सी राइडर संदीप का कहना है कि इस मामले में क्या कानूनी मदद मिल सकती है, इस बारे में वकीलों से सलाह ले रहे हैं.

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'केंद्र और राज्य सरकार दोनों को साथ आना होगा'

आखिर बाइक टैक्सी को लेकर अचानक से यह स्थिति क्यों पैदा हो गई कि इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया अब जो भी बाइक टैक्सी राइडर चल भी रहे हैं तो उन्हें मोटे मोटे चालान का सामना करना पड़ रहा है.. लेकिन एक्सपर्ट इस हालात को बहुत ही अजीबोगरीब बताते हैं। 

रोड सेफ्टी एक्सपर्ट अनुराग का कहना है कि पहले तो सरकार ने गैरकानूनी तरीके से इस बाइक टैक्सी के धंधे को बढ़ने दिया. अब जब संकट खड़ा हुआ तो इन्हें चलाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई न करके सिर्फ जिसकी बाइक है, उस के खिलाफ कार्रवाई हो रही है. इससे दिल्ली सरकार की नियत पर सवाल खड़े हो रहे हैं. हालांकि, सब कुछ ठीक करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को साथ आना होगा.
 

 

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