
आम आदमी पार्टी सरकार ने डीटीसी बसों में पैनिक बटन की शुरुवात की है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पैनिक अलार्म को लांच किया. बस में यदि कोई महिलाओं को परेशान करें, तो साथ लगे पैनिक बटन को दबाकर मदद की गुहार लगा सकती हैं.
दिल्ली सरकार के मुताबिक फिलहाल यह सुविधा कुछ बसों में होगी, जिसे मार्च 2019 तक सभी बसों में शुरू कर दिया जाएगा. परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने बताया कि दिल्ली सरकार ने महिला सुरक्षा को मजबूत करते हुए बसों में तीसरी सुविधा दी है. इससे पहले सभी डीटीसी बसों में मार्शल लगाए गए थे. 200 बसों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और अब पैनिक बटन की मदद से महिला सुरक्षा और मजबूत किया जाएगा.
गहलोत ने दावा कि 2019 तक सभी डीटीसी और कलस्टर बसों को पैनिक फ्री बना दिया जाएगा. हमारी कोशिश है कि महिला सुरक्षा को बेहतर किया जाए. बसों में महिला सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए चालक और परिचालक को भी ट्रेनिंग दी गई है. पैनिक अलार्म बजने पर चालक और परिचालक जवाब भी देंगे.
इसके साथ ही बसों में एलईडी डिस्प्ले बोर्डों पर जानकारी दी जाएगी. बताया जाएगा कि बस में पैनिक अलार्म सिस्टम है. यदि कोई महिला बटन दबाती है तो 40 सेकेंड्स तक अलार्म बजेगा. इस दौरान इसे निष्क्रिय नहीं किया जा सकता है.
वहीं, कंडक्टर को यह पता चल जाएगा कि कौन सा अलार्म बटन दबाया गया था. यदि कंडक्टर को लगता है कि मामला गंभीर है तो वह तुरंत डीपो मैनेजर और पीसीआर वैन फोन करेगा. साथ ही बस को जीपीएस से जोड़ा जाएगा, ताकि उसपर नजर रखी जा सके. बटन दबाते ही सूचना डीपो मैनेजर और कश्मीरी गेट स्थित कार्यालय पर पहुंच जाएगी. सूचना मिलने के बाद वह सतर्क होकर आगे की कार्रवाई करेंगे.
पायलेट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किए गए इस योजना के तहत फिलहाल राजघाट-2 डीपो से चलने वाली पांच बसों को जोड़ा गया है. रूट नंबर 522 पर चलने वाली इन बसों में चार पैनिक बटन लगाए गए हैं. इनकी ऊंचाई सामान्य है ताकि महिलाएं सीट पर से भी बटन को आसानी से दबा सकें.