
दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी नेता सत्येंद्र जैन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. कारण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जैन पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस चलाने की अनुमति दे दी है. हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सत्येन्द्र कुमार जैन के विरुद्ध बीएनएस की धारा 218 के तहत कोर्ट में मामला चलाने के लिए अनुमित मांगी थी.
जानकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिली सामग्री के आधार पर सत्येन्द्र कुमार जैन (60) के खिलाफ इस मामले में अभियोजन चलाने के लिए स्वीकृति देने के पर्याप्त साक्ष्य पाए गए हैं. इसलिए कोर्ट में केस चलाए जाने कि मांग की गई है.
मई 2022 में ईडी ने किया था गिरफ्तार
ईडी ने जैन पर हवाला कारोबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मामला दर्ज किया था और मई 2022 में उन्हें गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के समय जैन के पास स्वास्थ्य, बिजली और कुछ अन्य मंत्रालय थे, लेकिन बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया. पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई में देरी का हवाला देते हुए 18 महीने की सजा के बाद जैन को जमानत दे दी थी. वह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं और ईडी ने उनके खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया है.
ईडी ने पहले कहा था कि उसकी जांच में पाया गया कि "2015-16 के दौरान, सत्येंद्र जैन एक लोक सेवक थे और चार कंपनियों (जिनका स्वामित्व और नियंत्रण उनके पास था) को फर्जी कंपनियों से 4.81 करोड़ रुपये की आवास प्रविष्टियाँ (हवाला) प्राप्त हुईं, जिसके बदले हवाला के माध्यम से कोलकाता स्थित एंट्री ऑपरेटरों को नकद राशि हस्तांतरित की गई."
एजेंसी ने कहा था, "इन राशियों का उपयोग कृषि भूमि की सीधी खरीद या दिल्ली और उसके आसपास कृषि भूमि की खरीद के लिए लिए गए ऋण के पुनर्भुगतान के लिए किया गया था."
2017 में सीबीआई ने दर्ज किया था केस
मनी लॉन्ड्रिंग का मामला अगस्त 2017 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में दर्ज की गई एफआईआर से उपजा है. अगले साल दिसंबर में केंद्रीय जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि कथित आय से अधिक संपत्ति 1.47 करोड़ रुपये की थी. यह 2015-17 के दौरान जैन की आय के ज्ञात स्रोतों से करीब 217 फीसदी ज्यादा था.