
दिल्ली के निर्माण विहार के रहने वाले अतुल सहरावत ने अपनी बेटी के लिए संपत्ति बेचकर पैसे इकट्ठे किए थे. लेकिन सिम स्वैपिंग गैंग उनके अकाउंट से 13 लाख रुपये उड़ा लिए. धोखाधड़ी करने वाला यह गैंग पहले से ही उनकी धनराशि पर नजर बनाए हुए था. धोखेबाजों ने अतुल की सभी व्यक्तिगत बैंक जानकारी एकत्र की और उन्हें 10 मिनट के टेलीफोनिक बातचीत के माध्यम से फंसाया और 13 लाख रुपये की चपत लगा दी.
अतुल सहरावत की शिकायत पर जिले की साइबर सेल इकाई में मामला दर्ज किया गया और इसे दिल्ली पुलिस के आर्थिक अपराध विंग में ट्रांसफर कर दिया गया है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.
अतुल सहरावत ऐसे पहले व्यक्ति नहीं हैं जो सिम स्वैपिंग गिरोह का शिकार हुए हों. इससे पहले भी यह गैंग राजधानी में लोगों के बैंक खातों नकदी निकालकर चपत लगा चुका है. ऐसे मामलों में दिल्ली पुलिस बैंक ऑपरेटर, सेवा केंद्र और धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले इन गिरोहों की आपसी मिलीभगत से परेशान है और चिंतित है.
नाम न बताने की शर्त पर विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यहां हर दिन सिम-स्वैपिंग गिरोहों द्वारा लोगों को पैसों की चपत लगाने की कम से दो शिकायतें आती हैं.
इंडियन साइबर आर्मी (एनजीओ) के अध्यक्ष किस्ले चौधरी ने कहा कि सिम स्वैपिंग की धोखाधड़ी एक पहचान चोरी है जो सिम सिस्टम को हैक करके किया जाता है. यह एक ऐसा तरीका है जिसमें गिरोह का व्यक्ति या चोर टारगेट व्यक्ति के फोन और उससे होने वाली बातचीत से जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करते हैं.
धोखाधड़ी के तरीके को समझाते हुए डीसीपी रैंक के अधिकारी ने कहा, 'ये धोखेबाज पहले टॉली-कॉलर्स के रूप में खुद को आपके बैंक या टेलिकॉल सर्विस प्रोवाइडर के रूप में पेश करते हैं. इसके बाद आपको सूचना मिलेगी कि आधे घंटे के अंदर आपका सिम कार्ड ब्लॉक कर दिया जाएगा क्योंकि वो केवाईसी (आधार) अपडेट नहीं है. आपके मन घबराहट पैदा कर वो आपके सामने एक ही विकल्प छोड़ेंगे कि आपके मोबाइल नंबर पर भेजे गए मैसेज को कॉपी करना है. इसके बाद आपको इसे ऑफिशियल कस्टमर केयर नंबर पर भेजने के लिए कहा जाएगा. ऐसा करने के बाद 15 मिनट के अंदर आपकी सिम ब्लॉक हो जाएगी.'
वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि टेलीकॉम सर्विस देने वाली कंपनी के ऑपरेटरों की मदद से ये धोखेबाज खाली सिम कार्ड पा जाते हैं. इस दौरान, गैंग के अन्य सदस्य अपने टारगेट की पहचान करते हैं और बैंकों के साथ गठजोड़ का उपयोग करके टारगेट की सभी व्यक्तिगत बैंक की जानकारी हासिल कर लेते हैं.
सभी जानकारी निकालने के बाद गैंग का एक सदस्य टारगेट को फोन करता है और सिम ब्लॉक करने की जानकारी देता है. इसके बाद वो टारगेट को मैसेज भेजने के लिए तैयार कर लेता है. इस मैसेज में नए सिम कार्ड के 16 अंकों वाली संख्या होती है, जो कि पहले से ही धोखेबाजों के पास होती है. मैसेज भेजने के बाद पहले वाला सिम ब्लॉक हो जाता है.
नतीजतन, गिरोह टारगाट के सभी बैंक खाते का विवरण और अन्य संभावित क्षेत्रों तक पहुंच बना लेता है जहां मोबाइल नंबर का उपयोग ओटीपी या अन्य सुरक्षा पासवर्ड प्राप्त करने के लिए किया जाता है. और कुछ ही मिनटों में गिरोह के सदस्य टारगेट की जानकारी का उपयोग करते हुए उसके बैंक खाते से पैसों की चपत लगा देते हैं.