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Soumya vishwanathan case: 6 महीनों तक हत्यारों का सुराग नहीं था, जिगिशा केस में कुबूलनामे से हुआ था खुलासा, पढ़ें पूरी टाइमलाइन

Soumya Vishwanathan murder case: आज पंद्रह साल पुराने सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड में कोर्ट का फैसला आने वाला है. इस मामले में कुल 5 लोगों के खिलाफ फैसला सुनाया जाना है. बता दें कि लूटपाट के इरादे से सौम्या की कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

सौम्या स्वामीनाथन (File Photo) सौम्या स्वामीनाथन (File Photo)
नलिनी शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 18 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 1:42 PM IST

पंद्रह साल पुराने पत्रकार सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड में आज दिल्ली का साकेत कोर्ट अपना फैसला सुनाने जा रहा है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार पांडे ने फैसले के समय सभी आरोपियों को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है. दरअसल, दफ्तर से घर लौटती महिला पत्रकार की हत्या के इस केस में फैसले का लोगों को लंबे समय से इंतजार था. इस मामले में पिछले 13 साल में 320 सुनवाई हुईं.

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दिल्ली की महिला टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या 30 सितंबर 2008 को दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर हुई थी. तब सौम्या नाइट शिफ्ट करके दफ्तर से अपने घर लौट रही थीं. पुलिस को सौम्या की लाश उनकी कार में मिली थी. इस मर्डर केस की सबसे खास बात यह है कि इसका खुलासा करने में पुलिस को करीब 6 महीने का समय लग गया. पुलिस ने किसी दूसरे हत्याकांड में आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने सौम्या की हत्या की बात भी कबूल ली. आइए टाइमलाइन के जरिए बताते हैं कि सौम्या हत्याकांड से लेकर कोर्ट के फैसले तक कब क्या हुआ?

15 पॉइंट में पढ़ें पूरी टाइमलाइन

1. 30 सितंबर 2008 को पत्रकार सौम्या विश्वनाथन दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज इलाके के पास अपनी कार में मृत पाई गईं थीं, शुरू में माना गया कि यह एक कार दुर्घटना हो सकती है.

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2. शुरुआती फोरेंसिक जांच में यह बात सामने आई कि सौम्या के सिर में गोली लगने के कारण उनकी मौत हुई है. इस तरह सौम्या की मौत की जांच ने नया मोड़ ले लिया.

3. जांच में पता चला कि सौम्या अपने दफ्तर से देर रात घर लौट रही थीं. पुलिस को यह संदेह था कि सौम्या का पीछा किया गया और किसी दूसरी चलती गाड़ी से गोली चलाई गई.

4. इस केस की जांच आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले. पुलिस को इस जांच में एक मैरून रंग की कार के बारे में पता चला, जो सौम्या का पीछा कर रही थी.

5. इस काम में मुंबई क्राइम ब्रांच की टीमों को लगाया गया और ज्यादा से ज्यादा सबूत इकट्ठा करने के लिए गहन तलाशी अभियान की शुरुआत हुई.

6. छह महीने बाद मार्च 2009 में दिल्ली पुलिस ने रवि कपूर और अमित शुक्ला को एक दूसरे केस ( BPO कर्मचारी जिगिशा घोष हत्याकांड) में गिरफ्तार किया. 

7. पूछताछ के दौरान रवि कपूर और अमित शुक्ला ने ना सिर्फ सौम्या के मर्डर की बात स्वीकार की, बल्कि उसे रोमांचक गतिविधि बताया.

8. सीसीटीवी की गहन जांच करने पर पता चला कि जो मैरून सौम्या की हत्या के वक्त देखी गई थी, उसका इस्तेमाल जिगिशा की हत्या के समय भी किया गया. 

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9. अप्रैल 2009 में दिल्ली पुलिस ने सौम्या हत्याकांड में रवि कपूर गैंग के खिलाफ मकोका लगाया.  6 फरवरी 2010 को रवि कपूर, बलजीत सिंह, अमित शुक्ला, अजय कुमार और अजय सेठी के खिलाफ मकोका, हत्या, डकैती और अन्य अपराधों के तहत आरोप तय किए गए.

10. जून 2010 में दिल्ली पुलिस ने इस हत्याकांड में रवि कपूर, अमित शुक्ला और उनके दो अन्य साथी बलजीत मलिक और अजय सेठी के खिलाफ एक आरोप पत्र दायर किया.

11. सौम्या हत्याकांड में मुकदमे की कार्यवाही 16 नवंबर 2010 को साकेत कोर्ट में शुरू हुई.

12. लंबी सुनवाई के दौरान हत्यारों के पास मिली बन्दूक से गोलियों का मिलान किया गया. साथ ही निगरानी फुटेज और आरोपियों के कबूलनामे सहित प्रमुख फोरेंसिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए.

13. 19 जुलाई 2016 को साकेत कोर्ट ने मामले में सुनवाई पूरी कर ली और अगली सुनवाई के लिए अपना आदेश सुरक्षित रख लिया.

14. तब से लेकर अब तक कई कानूनी जटिलताओं के कारण फैसले को कई बार टाला गया.

15. लंबी कानूनी लड़ाई और तमाम सबूतों की बारीकी से जांच के बाद 18 अक्टूबर 2023 को यानी आज दिल्ली की साकेत कोर्ट चारों आरोपियों के खिलाफ अपना फैसला सुनाएगी.

सबूत पेश करने में लगा 13 साल का समय

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साकेत कोर्ट आज रवि कपूर, बलजीत सिंह, अमित शुक्ला, अजय कुमार और अजय सेठी के खिलाफ फैसला सुनाने जा रहा है. सौम्या विश्वनाथन हत्या मामले में सभी सबूत अदालत के सामने पेश करने में अभियोजन पक्ष को 13 साल से अधिक समय लगा. सौम्या विश्वनाथन हेडलाइंस टुडे टीवी के आउटपुट डेस्क पर स्टार प्रोड्यूसर थीं. वह अपने साथियों के बीच सबसे कम उम्र की शिफ्ट सुपरवाइजर थीं. पांचों आरोपियों पर हत्या, संगठित अपराध, डकैती और आपराधिक साजिश सहित अन्य अपराध का आरोप है. जिगिशा घोष हत्याकांड में भी यही लोग आरोपी थे, जिसके लिए उन्हें 2018 में दोषी ठहराया गया था.

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