
यमुना नदी की सफाई का काम आखिर शुरू हो गया है. दिल्ली की सियासत में यमुना की सफाई एक अहम मुद्दा है और चुनाव में इसकी बानगी भी देखने को मिली थी. विधानसभा चुनाव में AAP की हार की एक वजह यमुना की गंदगी को भी माना जा रहा है. लेकिन अब तीन साल के प्लान के तहत चुनिंदा घाटों पर हाईटेक मशीनें तैनात की गई हैं और यमुना को साफ करने का काम शुरू हो चुका है.
दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) वीके सक्सेना की ओर से बुलाई गई एक हाई लेवल मीटिंग के बाद यमुना को गंदगी से मुक्त करने की कोशिशों में तेजी आई है. हालांकि वासुदेव घाट, कालिंदी कुंज घाट जैसे कुछ घाटों पर सफाई के लिए हाईटेक मशीनें जरूर आ गई हैं लेकिन आईटीओ घाट सहित अन्य इलाके में बने घाटों पर पहले जैसी गंदगी बरकरार है.
वासुदेव घाट पर सफाई का काम जारी
वासुदेव घाट पर कचरा, खरपतवार, गाद और तैरते मलबे को हटाने के लिए ड्रेजर की तैनाती के साथ बड़े पैमाने पर सफाई अभियान शुरू हो गया है. यह पहल यमुना से प्रदूषण को खत्म करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो लंबे समय से नाले का पानी, इंडस्ट्रियल वेस्ट और कचरे का ढेर जमा होने से दूषित हो रही है. अब नदी को चरणबद्ध तरीके से साफ करने के मिशन पर काम किया जा रहा है.
यमुना की सफाई के लिए लागू 3 साल के इस प्लान में सबसे पहले नदी की मुख्य धारा में जमे कचरे, गाद और अन्य प्रदूषकों को हटाया जाएगा. इसके बाद नजफगढ़ नाले, अन्य सप्लीमेंट्री नाले और नदी में मिलने वाले सभी अहम जल निकासी चैनलों में एक साथ सफाई अभियान चलाए जाएंगे. नदी की सफाई करवाने के लिए मौजूदा STP के परफॉर्मेंस और आउटपुट की हर रोज निगरानी की जाएगी. साथ ही हर रोज करीब 400 मिलियन गैलन सीवेज के ट्रीटमेंट में मौजूदा कमी को दूर करने के लिए नए STPs और डीसेंट्रलाइज्ड एसटीपी के निर्माण के लिए एक योजना बनाई जाएगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 फरवरी को बीजेपी की जीत के जश्न के दौरान अपने भाषण में यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को फिर से जाहिर कर दिया था. उन्होंने 'यमुना मैया की जय' से अपने संबोधन की शुरुआत की थी. इसी मिशन को आगे बढ़ाते हुए एलजी वीके सक्सेना ने दिल्ली के अधिकारियों को बिना किसी रुकावट के यमुना की सफाई कराने के निर्देश दिए हैं.
आईटीओ घाट पर अब भी गंदगी
वासुदेव घाट पर प्रगति के बावजूद बाकी इलाकों में स्थित घाटों को अब भी सफाई का इंतजार है. वासुदेव और कुछ अन्य स्थानों से उलट आईटीओ घाट पर साफ-सफाई का कोई भी काम शुरू नहीं हुआ है और न ही कोई मशीन तैनात की गई है. एक साथ सभी घाटों की सफाई तत्काल प्रभाव से न होने पर इस बड़े मिशन को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं.
तीन साल की महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य यमुना को उसका पुराना गौरव दिलाना है. लेकिन इसकी सफलता निरंतर प्रयासों, सख्त निगरानी और सभी प्रभावित क्षेत्रों में एक साथ एक्शन पर निर्भर करेगी. वासुदेव घाट पर मशीनों की तैनाती एक मजबूत शुरुआत दिखाती है, लेकिन आईटीओ घाट पर प्रगति की कमी उन चुनौतियों को उजागर करती है जो आगे आने वाली हैं.