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पीएमओ, सीबीआई, रॉ और NIA के नाम से सरकारी अफसरों को ठगा... लग्जरी कार से चलता था आरोपी

गुजरात के अहमदाबाद (Ahmedabad) में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक ठग ने पीएमओ, सीबीआई, रॉ और एनआईए के नाम पर फ्रॉड किया और सरकारी अफसरों से ठगी की. जब इस मामले की शिकायत पुलिस को मिली तो हड़कंप मच गया. पुलिस ने आनन-फानन में केस दर्ज कर जांच शुरू की. आरोपी को अरेस्ट करने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है.

ठगी का आरोपी रूपेश दोशी. (File) ठगी का आरोपी रूपेश दोशी. (File)
अतुल तिवारी
  • अहमदाबाद,
  • 27 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 12:29 PM IST

Gujarat News: अहमदाबाद (Ahmedabad) में रूपेश दोशी नाम के शख्स ने खुद को पीएमओ, सीबीआई, रॉ और एनआईए जैसी सुरक्षा एजेंसियों का अफसर बताकर सरकारी अधिकारियों से धोखाधड़ी की. यह ठग पिछले चार साल से फ्रॉड कर रहा था. उसके खिलाफ अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई गई है.

अहमदाबाद के बोपल में रहने वाला रूपेश दोशी शेयर बाजार का ट्रेडर है. इसी के साथ वह ठगी भी करने लगा. उसने एएमसी अधिकारियों, पुलिस समेत सरकारी कर्मचारियों को लाखों का चूना लगा दिया. रूपेश पटेल ने खुद को पीएमओ, सीबीआई, रॉ और एनआईए का अफसर साबित करने के लिए कई सिम का इस्तेमाल किया.

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यह आरोपी अपने टारगेट के अनुसार व्यक्ति को अपना नंबर देता रहता था. गुजरात सरकार के कर्मचारी को चूना लगाने के लिए वह पीएमओ या रॉ से जुड़ा नंबर देता था. वह सामने वाले को प्रभावित करने के लिए ट्रू कॉलर में उस नंबर का नाम पीएमओ के नाम से सेव करता था.

सूत्रों के मुताबिक, पता चला है कि रूपेश दोशी ने कुछ पुलिसकर्मियों के तबादले के नाम पर भी ठगी की है. रूपेश को कहीं कोई असुविधा होती तो वह सरकारी कर्मचारियों को फोन कर व्यवस्था करने का आदेश देता था. रूपेश को लग्जरी कारों का शौक था. इसलिए उसने महंगी कार भी खरीदी थी और खुद को अमीर दिखाने के लिए लोगों को वह तस्वीरें दिखाता रहता था.

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हालांकि, रूपेश दोशी सिर्फ शेयर बाजार का कारोबारी था. शेयर बाजार में लगातार घाटे के बाद उसके पास कोई काम नहीं था. लोगों को अपनी बातों से फंसाने के लिए होटल में लंच-डिनर की बात हो या मॉल में शॉपिंग की बात हो, रूपेश अधिकारियों को कॉल करता था और जरूरी व्यवस्थाएं करवाता था. फिलहाल क्राइम ब्रांच की टीम रूपेश को गिरफ्तार करने के लिए गुजरात के बाहर रवाना हो गई है. पुलिस का कहना है कि रूपेश को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

मेवाती गैंग भी पीएमओ के नाम पर कर रहा था ठगी, 6 सदस्य गिरफ्तार

'प्रधानमंत्री आपके काम से खुश हैं, आपको 10 लाख रुपये का इन्वेस्टमेंट करना है और 4 करोड़ का फार्म हाउस मिलेगा.' ये बातें बोलकर मेवाती गैंग के सदस्य भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं से ठगी करते थे. इस गैंग के 6 सदस्यों को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है. जांच के दौरान आरोपियों ने कबूल किया है कि वे प्रधानमंत्री के नाम पर लोगों को टारगेट करते थे.

पुलिस की गिरफ्त में गैंग के सदस्य.

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में बीजेपी कार्यकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके पास एक कॉल आया था. फोन करने वाले कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय से बोल रहा हूं. प्रधानमंत्री आपके काम से खुश हैं और राजस्थान के पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की अगुवाई में जयपुर-दिल्ली हाइवे पर फार्म हाउस स्कीम शुरू हो रही है. इसमें आपको 10 लाख इन्वेस्ट करने हैं. इस इन्वेस्टमेंट के बाद आपको 4 करोड़ तक का एक फार्म हाउस दिया जाएगा.

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बीजेपी कार्यकर्ता की शिकायत के बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की. जिस नंबर से कॉल आया, उसकी डिटेल निकाली गई. इसके बाद हरियाणा के पलवल से भरतसिंह जाटव, इरशाद खान मेव, इरशाद मेव, साबिर मेव, राकिब मेव, मोहम्मद जहां मेव को गिरफ्तार किया गया. यह गैंग फर्जी तरीके से सिमकार्ड खरीदकर उसका इस्तेमाल ठगी में करते थे. ये लोग बीजेपी कार्यकर्ता और नेताओं को कॉल कर इन्वेस्टमेंट के नाम पर निशाना बनाते थे.

पूरे मामले को लेकर अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के एसीपी ने क्या बताया?

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के एसीपी भरत पटेल ने कहा कि मेवाती गैंग के सभी 6 सदस्य नटराज कंपनी की पेंसिल पैकिंग के लिए वर्क फ्रॉम होम का विज्ञापन फेसबुक के माध्यम से निकालते थे और झांसे में आए लोगों से ठगी करते थे. अधिक रुपये कमाने के लालच में प्रधानमंत्री कार्यालय के नाम पर ठगी शुरू कर दी थी. गैंग की तरफ से फार्म हाउस प्रोजेक्ट के फोटो भी वॉट्सएप पर शेयर किए जाते थे.

एसीपी भरत पटेल ने बताया कि मेवाती गैंग के सभी आरोपियों पर इससे पहले भी अहमदाबाद और बनासकांठा में केस दर्ज हुआ है. इस केस का मास्टर माइंड इरशाद है, जो सिविल इंजीनियर है. क्राइम ब्रांच ने सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर अब तक जितने लोगों से इन्वेस्टमेंट के नाम पर ठगी की है और रुपये वसूले हैं, इसकी जांच शुरू की है.

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