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दोषियों की रिहाई पर बोलीं बिलकिस बानो- 20 साल पुराना सदमा फिर कहर बनकर टूटा

बिलकिस बानो केस के सभी 11 दोषियों को रिहा कर दिया गया है. दोषियों पर बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप करने के साथ-साथ उसके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या करने का भी इल्जाम था. दोषियों की रिहाई पर फैसला गुजरात सरकार ने लिया है. सभी दोषियों को 2008 में अदालत की तरफ से उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

बिलकिस बानो (File Photo) बिलकिस बानो (File Photo)
सौरभ वक्तानिया
  • अहमदाबाद,
  • 18 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 8:53 AM IST

बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों को गुजरात सरकार ने जेल से रिहा कर दिया. अब इस फैसले पर बिलकिस बानो की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. बिलकिस ने कहा, '15 अगस्त 2022 को मुझपर जैसे पिछले 20 सालों का सदमा फिर से कहर की तरह टूट पड़ा, जब मैंने सुना कि जिन 11 आरोपियों ने मेरा पूरा जीवन नष्ट किया. मेरी आंखों के सामने मेरे पूरे परिवार को खत्म किया. मेरी 3 साल की बेटी मुझसे छीन ली, वो सभी रिहा कर दिए गए. अब वो आह्लाद (खुश होकर) घूम रहे हैं. ये सुनने के बाद मेरे पास कोई शब्द नहीं हैं. मैं सुन्न और खामोश सी हो गई हूं.'

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उन्होंने आगे कहा कि मैं केवल इतना कह सकती हूं. क्या एक औरत को दिए गए न्याय का अंत यही है. मैंने इस देश के सबसे ऊंचे न्यायालय पर विश्वास रखा. मैंने इस व्यवस्था पर विश्वास रखा. मैं धीरे-धीरे अपने सदमे के साथ जीना सीख रही थी. लेकिन इन 11 आरोपियों की रिहाई ने मुझसे मेरी शांति छीन ली और न्याय की व्यवस्था पर मेरे भरोसे को हिला दिया है.

बिल्किस बानो ने कहा कि मेरा दुख और ये डगमगाता विश्वास सिर्फ अपने लिए नहीं उन सब औरतों के लिए है, जो इंसाफ की तलब में अदालतों में लड़ाई लड़ रही हैं. इन आरोपियों को रिहा करने के इतने बड़े और अन्यायपूर्ण फैसले से पहले किसी ने मुझसे नहीं पूछा. मेरी सुरक्षा और बहाली के बारे में नहीं सोचा.

उन्होंने आगे कहा, 'मैं गुजरात सरकार से अपील करती हूं कि इस हानिकारक फैसले को वापस लें और शांति से, निडर होकर मेरे जीने का अधिकार मुझे वापस लौटाएं. मेरे और मेरे परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें. ये बयान बिलकिस बानो की तरफ से एडवोकेट शोभा ने जारी किया है.'

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बिलकिस के पति ने क्या कहा था?

बिलकिस के पति याकूब ने कहा था कि घर पर माहौल बहुत खराब है. हम सब इस फैसले से दुखी हैं. हम पहले भी डर से साये में जी रहे थे. लेकिन अब दोषियों के जेल से रिहा होने के बाद डर और बढ़ गया है. हमें अभी तक कोई सुरक्षा नहीं मिली, हम अभी तक जगह बदल-बदल कर रहते रहे हैं. आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद वे और उनका परिवार शांति से रह रहा था. लेकिन अब डर और बढ़ गया है. हमने इस हादसे में सब कुछ गंवा दिया था. हमारी तीन साल की बेटी की जान चली गई. बिलकिस के साथ ये हादसा हुआ.

ये था पूरा मामला

27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के कोच को जला दिया गया था. इस ट्रेन से कारसेवक अयोध्या से लौट रहे थे. इससे कोच में बैठे 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी. इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे. दंगों की आग से बचने के लिए बिलकिस बानो अपनी बच्ची और परिवार के साथ गांव छोड़कर चली गई थीं. बिलकिस बानो और उनका परिवार जहां छिपा था, वहां 3 मार्च 2002 को 20-30 लोगों की भीड़ ने तलवार और लाठियों से हमला कर दिया. भीड़ ने बिलकिस बानो के साथ बलात्कार किया. उस समय बिलकिस 5 महीने की गर्भवती थीं. इतना ही नहीं, उनके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या भी कर दी थी. बाकी 6 सदस्य वहां से भाग गए थे.

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