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गुजरात की जेल से तीस्ता सीतलवाड़ की रिहाई, जमानत मिलने के बाद रवाना हुईं मुंबई

सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद तीस्ता सीतलवाड़ मुंबई के लिए निकल चुकी हैं. गुजरात दंगों से जुड़े एक मामले में वह अहमदाबाद की साबरमती महिला जेल में बंद थीं. शनिवार को सेशन कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया.

तीस्ता सीतलवाड़ (फाइल फोटो) तीस्ता सीतलवाड़ (फाइल फोटो)
गोपी घांघर
  • अहमदाबाद,
  • 03 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 11:49 PM IST

गुजरात दंगों से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार की गईं तीस्ता सीतलवाड़ शनिवार को अहमदाबाद की साबरमती महिला जेल से रिहा हो गईं. तीस्ता को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम जमानत दे दी थी. इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उन्हें अहमदाबाद की सेशन कोर्ट में पेश किया. जमानत पर रिहा होने के बाद तीस्ता सीतलवाड़ मुंबई के लिए रवाना हो गईं.

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शनिवार को शाम 5 बजे के करीब गुजरात पुलिस तीस्ता सीतलवाड़ को अहमदाबाद सेशन कोर्ट के लिए जेल से लेकर निकली. जहां पर उन्हें जमानत दे दी गई और उसके बाद खबर आई कि तीस्ता सीतलवाड़ मुंबई के लिए रवाना हो चुकी है.

सेशन कोर्ट में तीस्ता को पेश करते वक्त उन्होंने कहा कि रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने में पुलिस ने जानबूझ कर देरी की.

गुजरात दंगे मामले में गिरफ्तार की गईं तीस्ता सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम जमानत दे दी थी. इसी के साथ कोर्ट ने कहा था कि उनकी रेगुलर बेल पर हाई कोर्ट फैसला सुना सकता है. फिलहाल के लिए उन्हें अंतरिम जमानत दे दी गई है. अपने आदेश में कोर्ट ने ये भी साफ कर दिया था कि तीस्ता को अपना पासपोर्ट सरेंडर करना पड़ेगा. जब तक हाई कोर्ट से उन्हें रेगुलर बेल नहीं मिल जाती, वे देश के बाहर नहीं जा सकतीं.

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साथ ही तीस्ता को इस मामले में जांच एजेंसियों को लगातार अपना सहयोग देना होगा. कोर्ट का कहना है कि वे तीस्ता को बेल पर नहीं छोड़ रहे हैं, सिर्फ जब तक हाई कोर्ट रेगुलर बेल पर कोई फैसला नहीं कर लेती, सुप्रीम कोर्ट उन्हें अंतरिम जमानत दे रही है.

जिस मामले में ये सुनवाई हुई है वो 2002 के गुजरात दंगे से जुड़ा हुआ है. तीस्ता पर आरोप है कि उन्होंने गवाहों को भड़काया था. सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री (अब प्रधानमंत्री) नरेन्द्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने की एसआईटी रिपोर्ट को चुनौती देने वाली जाकिया जाफरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि तीस्ता सीतलवाड़ अपने स्वार्थ सिद्ध करने में जुटी रहीं. कोर्ट ने संजीव भट्ट और आरबी श्रीकुमार की ओर से झूठा हलफनामा दायर किए जाने का भी जिक्र किया था.

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