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दुबई में मास्टरमाइंड और 111 करोड़ की ठगी... साइबर गैंग में बांग्लादेश-पाकिस्तान के लोग भी शामिल

सूरत की साइबर सेल ने 111 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने साइबर फ्रॉड रैकेट के लिए 125 से अधिक बैंक अकाउंट कमीशन के आधार पर उपलब्ध करवाए. जांच में पता चला है कि यह रैकेट चीनी गैंग द्वारा संचालित है, जो बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत के लोगों को फ्रॉड के लिए हायर करता था.

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी. पुलिस की गिरफ्त में आरोपी.
संजय सिंह राठौर
  • सूरत,
  • 21 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:49 PM IST

सूरत पुलिस की साइबर सेल ने कुछ दिनों पहले इंटरनेशनल गैंग के साइबर फ्रॉड मामले का भंडाफोड़ किया था. यह केस 111 करोड़ की धोखाधड़ी से जुड़ा है. इस मामले में सूरत साइबर सेल ने दो और लोगों को अरेस्ट किया है. पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों ने साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल होने वाले तकरीबन 125 बैंक अकाउंट गैंग के लोगों को कमीशन के आधार पर मुहैया कराए थे.

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सूरत क्राइम ब्रांच और साइबर सेल के डीसीपी भावेश रोजिया ने बताया कि सूरत शहर के सरथाना और मोटा वराछा इलाके में छापेमारी कर इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड के रैकेट का भंडाफोड़ किया गया था. बीते 22 अक्टूबर को की गई छापेमारी के दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था. उस वक्त उनके पास से बरामद लैपटॉप और कंप्यूटर से 261 बैंक अकाउंट और नेट बैंकिंग की जानकारी मिली थी.

डीसीपी ने बताया कि अलग-अलग बैंक के एटीएम, डेबिट कार्ड, पासबुक और चेक बुक बरामद हुए थे. आरोपियों से पूछताछ में 111 करोड़ से ज्यादा का साइबर फ्रॉड सामने आया था. NCCRP पोर्टल पर करीब 900 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई थीं. पूछताछ में 300 बैंक अकाउंट और मिले थे. उस मामले में अभी कितनी और शिकायतें हो रही हैं, उसकी जानकारी की जा रही है. अभी तक 250 से ज्यादा मामले देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज हो चुके हैं.

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इसी जांच-पड़ताल के दौरान केतन वेकरिया और नानजी को भावनगर के पालीताना के गांव से गिरफ्तार किया गया है. इन आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. केतन वेकरिया और नानजी का मुख्य काम यह था कि उनके अंडर में जो एजेंट होते थे, वे गांव में रहने वाले जरूरतमंद लोगों को 20 से 25 हजार रुपये देकर उनके बैंक अकाउंट खुलवा देते थे. मिलन वाघेला दुबई में रहता है, उसे ये खाते उपलब्ध करवाए जाते थे. इसमें चीनी गैंग फ्रॉड करने के लिए बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत के लोगों का इस्तेमाल करता है. ये गैंग इन लोगों को काम पर रखता है और फ्रॉड कराता है.

साइबर फ्रॉड के बाद अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर होते थे. जब छोटा अमाउंट एक लाख रुपये तक हो जाता था तो दुबई में बैंक से निकाल लेते थे. यह गैंग इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और कम इन्वेस्टमेंट में ज्यादा मुनाफा दिखाने का लालच देकर लोगों को फंसाता था. ये आरोपी डिजिटल अरेस्ट भी करते थे और लोगों से पैसे वसूलते थे.

डीसीपी भावेश रोजिया ने बताया कि इन दोनों आरोपियों सहित अब तक कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और अभी जांच चल रही है. देश के अलग-अलग राज्यों में 250 से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं. अलग-अलग एजेंटों के माध्यम से बैंक अकाउंट दुबई में रहने वाले मिलन वाघेला और विवेक को उपलब्ध कराए जाते थे. जब शुरुआती जांच हुई थी तो 650 बैंक अकाउंट मिले थे, तब एनसीसीआरपी पोर्टल पर 866 मामले दर्ज हुए थे, जिनमें से 250 मामले हमें मिल चुके हैं. बाकी हम वेरीफाई कर रहे हैं.

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1000 बैंक अकाउंट अब तक मिल चुके हैं. इस गैंग के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में मामले दर्ज हो रहे हैं. सूरत से गिरफ्तार आरोपियों का देश के सभी मामलों में डायरेक्ट इंवॉल्वमेंट दिखाई देता है. देश के करीब 29 राज्यों और यूनियन टेरिटरी में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज हैं. हमने सबको सूचित कर दिया है. उनके बैंक अकाउंट नंबर और प्रोफाइल जो भी जानकारी है, सब कुछ शेयर कर दिया है. उसके बाद बारी-बारी से कस्टडी ली जाएगी. अब इसमें मिलन वाघेला और विवेक जो अभी दुबई में है, जो मास्टरमाइंड है और उनके खिलाफ जांच चल रही है.

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