
गुजरात के सूरत में टीचर और छात्रा के रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. इस मामले में खुद सरकार के आदिवासी विकास विभाग ने शिकायत दर्ज कराई है. राज्य सरकार के आदिवासी विकास विभाग को सूचना मिली थी कि नरेना आश्रम शाला में आचार्य छात्राओं से छेड़छाड़ और शोषण करता है. फिलहाल, आरोपी आचार्य को गिरफ्तार कर लिया गया है. बता दें कि आश्रम शाला वह जगह है जहां आदिवासी और अनुसूचित जनजातियों के बच्चों को आवासीय सुविधा के साथ माध्यमिक स्तर तक शिक्षा दी जाती है.
दरअसल, मांडवी के नरेना आश्रम शाला में आदिवासी विकास विभाग की एक टीम औचक निरीक्षण के लिए पहुंची, जिसने गृह माता और छात्राओं से बात की. छात्राओं की बातें सुनकर टीम हैरान रह गई. गृह माता ने खुद भी उन्हें आचार्य की घिनौनी हरकत के बारे में बताया. छात्राओं ने बताया कि खाने की घंटी बजने के बाद आचार्य उन्हें अपने कमरे में बुलाता है. फिर वह उनसे छेड़छाड़ और शोषण करता. इसके बाद विभाग की टीम ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस ने आचार्य को गिरफ्तार कर लिया.
ये भी पढ़ें- गुजरात के वडोदरा में बॉयफ्रेंड को बंधक बनाकर नाबालिग लड़की से गैंगरेप
छात्राओं के सीने को छुआ और उनके होठों को चूमा
डीएसपी ने बताया कि पीड़ित छात्राओं के बयान लिए गए हैं, जिसमें चार छात्राओं ने छेड़छाड़ की शिकायत की है. कक्षा 7-8 में पढ़ने वाले 4 छात्राओं ने आचार्य के खिलाफ बयान दिए हैं. इसके अलावा शिक्षकों से भी पूछताछ की गई है. गृह माता से पूछताछ के बाद सूरत जिला आदिवासी आश्रम स्कूल के अधिकारी ने सरकार की ओर से ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. जिसमें आरोप लगाया गया है कि आचार्य ने 24 जुलाई को कक्षा 7-8 के 4 छात्राओं को अपने कमरे में बुलाया और उनके सीने को छुआ और उनके होठों को भी चूमा. शिक्षकों से भी पूछताछ की जा रही है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी थी या नहीं.
योगेश पटेल वर्ष 2013 में बना आचार्य
वहीं, 4 छात्राओं के अलावा अन्य छात्राओं से भी पूछताछ की जा रही है कि उनके साथ ऐसी कोई छेड़छाड़ या शोषण की घटना हुई या नहीं. आचार्य योगेश पटेल पर छात्राओं की अलग-अलग टोली बनाकर उनसे अपने कपड़े धुलवाने या शर्बत बनवाने और छेड़छाड़ करने का भी आरोप है. बता दें कि आचार्य वर्ष 2003 से इस आश्रम से जुड़े थे. फिर वर्ष 2013 में वे आचार्य बन गए.