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चौधरी देवीलाल की विरासत, जाट पॉलिटिक्स, विवाद पर विवाद... ऐसी रही ओम प्रकाश चौटाला की पॉलिटिक्स लाइफ

ओम प्रकाश चौटाला ने शुक्रवार को गुरुग्राम स्थित आवास पर अंतिम सांस ली. शिक्षक भर्ती घोटाले में ओम प्रकाश ने सजा काटी और फिर राजनीति में सक्रिय हो गए थे. उन्होंने आखिरी बार 2005 में रोड़ी विधानसभा से चुनाव लड़ा था.

हरियाणा के पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला का निधन हो गया. (फाइल फोटो) हरियाणा के पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला का निधन हो गया. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 20 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:09 PM IST

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला नहीं रहे. वे 89 साल के थे. ओम प्रकाश चार बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे और इंडियन नेशनल लोकदल के प्रमुख थे. हरियाणा की राजनीति में चौटाला फैमिली का खासा दबदबा रहा है. विधानसभा चुनाव से ठीक से पहले ओम प्रकाश चौटाला ने दावा किया था कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और अब वो 115 साल तक जीवन व्यतीत करने वाले हैं. हालांकि, कुदरत ने किस्मत में यहीं तक का सफर तय करके रखा था. 

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ओम प्रकाश चौटाला ने शुक्रवार को गुरुग्राम स्थित आवास पर अंतिम सांस ली. शिक्षक भर्ती घोटाले में ओम प्रकाश ने सजा काटी और फिर राजनीति में सक्रिय हो गए थे. उन्होंने आखिरी बार 2005 में रोड़ी विधानसभा से चुनाव लड़ा था. चौटाला परिवार मूल रूप से हिसार का रहने वाला है और ये इलाका जाटों का गढ़ माना जाता है. हरियाणा की राजनीति में जाट समुदाय का अच्छा खासा प्रभाव है. राज्य में करीब 26 से 28 फीसदी आबादी है और 36 विधानसभाओं में प्रभाव है.

ओम प्रकाश, हरियाणा के दिग्गज नेता रहे चौधरी देवीलाल के बेटे थे. देवीलाल देश के डिप्टी पीएम भी रहे हैं. दो बार मुख्यमंत्री भी चुने गए. देवीलाल को ताऊ के नाम से जाना जाता था.

चौटाला फैमिली की हरियाणा की राजनीति में 'धमक'

चौधरी देवीलाल का परिवार हरियाणा की सियासत के केंद्र में रहता है. इस परिवार के सदस्य जननायक जनता पार्टी (JJP), इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) से लेकर कांग्रेस और बीजेपी तक का हिस्सा रहे हैं. इस फैमिली से जुड़े सदस्य पार्टियां बदलते रहे, लेकिन कुनबे की चमक और धमक राजनीति के मैदान में धुंधली नहीं पड़ी. हिसार जिले के तेजाखेड़ा गांव में जन्मे देवीलाल 15 साल की उम्र में आजादी की लड़ाई में शामिल हुए थे. 

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1930 में महात्मा गांधी के आंदोलन में शामिल हुए तो जेल जाना पड़ा. 1938 में वे कांग्रेस का हिस्सा बने. 1942 में 'अंग्रेजो भारत छोड़ो' आंदोलन के दौरान करीब दो साल तक जेल में रहना पड़ा. देवीलाल देश के उपप्रधानमंत्री रहे और दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने. उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला भी हरियाणा के मुख्यमंत्री बने. चौथी पीढ़ी से आने वाले दुष्यंत चौटाला डिप्टी सीएम रहे.

ओमप्रकाश को मिली राजनीतिक विरासत 

देवीलाल की 5 संतानों में चार बेटे ओमप्रकाश चौटाला, प्रताप चौटाला, रणजीत सिंह और जगदीश चौटाला हुए. जब देवीलाल डिप्टी पीएम बने तो बड़े बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने राजनीतिक विरासत संभाली और हरियाणा के मुख्यमंत्री बने. ओमप्रकाश 1989 से 1991 तक मुख्यमंत्री रहे. 1991 में लोकसभा चुनाव हारे और यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा समाप्त हो गई. 1999 में ओमप्रकाश चौटाला ने बीजेपी की मदद से हरियाणा में सरकार बनाई. 2005 तक वे हरियाणा के सीएम बने. 2001 में देवीलाल का देहांत हो गया. ओमप्रकाश चार बार हरियाणा के सीएम रहे. 

रणजीत कांग्रेस में रहे, लेकिन चुनाव नहीं जीत पाए 

ओमप्रकाश के नेतृत्व से फैमिली में मतभेद हुए और रणजीत ने अलग राह अपना ली. रणजीत लंबे अरसे तक कांग्रेस में रहे. वे जब तक कांग्रेस में रहे, चुनाव नहीं जीत पाए. 2019 में कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो रानिया सीट से निर्दलीय लड़े और जीत हासिल की.इस साल लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल हुए और मंत्री बनाए गए. उसके बाद बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में हिसार सीट से टिकट दिया और वो हार गए.  

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क्यों जेल भेजे गए थे ओम प्रकाश

ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला पर आरोप लगा कि उन्होंने सरकारी अधिकारी की मदद से राज्य में जाली दस्तावेजों के जरिए तीन हजार से ज्यादा शिक्षकों की अवैध रूप से भर्ती करवाई. मामले में सीबीआई ने जांच की और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने फरवरी 2013 में ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को तीन अन्य सरकारी अधिकारियों को 10 साल की सजा सुनाई. वे करीब साढ़े नौ साल तक जेल रहे. उसके बाद दिल्ली सरकार ने 10 साल सजायाफ्ता कैदियों की सजा में नियमित मिलने वाली छूट के अलावा छह माह की छूट दे दी. जिसके बाद चौटाला के बाहर आने का रास्ता साफ हो गया. चौटाला के जेल में रहने को दौरान ही उनके परिवार में कलह हो गई और इनेलो से अलग होकर उनके पोते दुष्यंत चौटाला ने जननायक जनता पार्टी का गठन कर लिया था.

दो खेमों में बंट गया परिवार 

फिलहाल, चौटाला परिवार दो खेमों में बंट चुका है. वर्तमान समय में देवीलाल के कई नाती और पोते हरियाणा की राजनीति में कई दलों में सक्रिय हैं. ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला ने इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो - INLD) से अलग होकर जननायक जनता पार्टी बना ली है. जबकि इनेलो की कमान ओम प्रकाश चौटाला और उनके छोटे बेटे अभय चौटाला के हाथों में है. अजय चौटाला की विरासत उनके दोनों बेटे दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला संभाल रहे हैं. इनेलो और जेजेपी दोनों पार्टियां अपने वजूद को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं. 

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जननायक जनता पार्टी के संयोजक दुष्यंत चौटाला हरियाणा के उप मुख्यमंत्री रहे हैं. वे ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला के सुपुत्र हैं. दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय चौटाला भी चुनाव लड़ चुके हैं. अजय चौटाला खुद सांसद रहे हैं. ओम प्रकाश के दूसरे बेटे अभय चौटाला वर्तमान में ऐलनाबाद सीट से विधायक हैं. वे पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी थे. अजय चौटाला की पत्नी नैना चौटाला दो बार विधायक रही हैं. ओम प्रकाश चौटाला के दूसरे भाई प्रताप चौटाला के बेटे रवि चौटाला की पत्नी सुनैना चौटाला भी चुनाव लड़ चुकी हैं. अभय चौटाला के बेटे करण चौटाला भी राजनीति में सक्रिय हैं. देवी लाल के सबसे छोटे बेटे जगदीश चौटाला के बेटे आदित्य चौटाला भी चुनाव लड़े और हार गए. 

जानिए, चौटाला फैमिली में कौन-कौन?

देवीलाल के चार बेटेः ओमप्रकाश चौटाला, स्व. प्रताप चौटाला, रणजीत सिंह (कांग्रेस) और स्व. जगदीश चौटाला. 

ओमप्रकाश चौटाला के दो बेटेः अजय और अभय चौटाला. 

अजय और अभय के दो-दो बेटे 

अजय चौटाला के बेटेः दुष्यंत और दिग्विजय. दोनों राजनीति में. 

अभय चौटाला के बेटेः कर्ण और अर्जुन. दोनों राजनीति में. 

प्रताप चौटाला के दो बेटेः रवि और जितेंद्र. दोनों बिजनेसमैन. 

रणजीत चौटाला के दो बेटेः गगनदीप और स्व. संदीप सिंह. गगनदीप बिजनेसमैन. 

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जगदीश चौटाला के तीन बेटेः आदित्य (बीजेपी), अभिषेक (वकील) और अनिरुद्ध (वकील)

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