Advertisement

पनामा के जंगल, कैंप में डेरा और जेल का टॉर्चर... कितना मुश्किल है डंकी रूट, US से डिपोर्ट किए गए अंकित की आपबीती

अंकित ने बताया कि अमेरिका पहुंचने की प्रक्रिया के दौरान घर वालों से बात नहीं होती थी, समय पर खाना नहीं मिलता था. जेल में टॉर्चर किया जाता था. ऐसे कई कैम्प और जेल में वक्त बिताया. बाद में जब बॉन्ड भी नहीं भरा तो उसे अमेरिका से डिपोर्ट कर दिया गया.

अंकित को साल 2020 में अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था अंकित को साल 2020 में अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था
aajtak.in
  • करनाल,
  • 06 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 6:43 AM IST

अमेरिका से 104 अवैध भारतीय प्रवासियों को हथकड़ियों में डिपोर्ट किया गया है. भारतीय प्रवासियों को लेकर स्पेशल विमान बुधवार को अमृतसर पहुंचा था. डिपोर्ट किए गए लोगों ने अपनी आपबीती सुनाई है, जो काफी पीड़ादायक है. 

इसी तरह हरियाणा के करनाल के रहने वाले अंकित ने अपने पुराने दिन याद किए. अंकित डंकी रूट से अमेरिका गए थे, हालांकि वह साल 2020 में ही वापस लौट आए थे. आजतक से खास बातचीत में अंकित ने बताया कि वह करनाल के कैमला गांव के रहने वाले हैं. वह साल 2019 में 32 लाख रुपए लगाकर डंकी रूट से अमेरिका गए थे, लेकिन उनका बॉन्ड नहीं भरा, इसलिए उन्हें वापस लौटना पड़ा. इतना ही नहीं, इस प्रक्रिया में उनका 32 लाख रुपए का भी नुकसान हो गया. 

Advertisement

'डंकी रूट में हर पल मौत नजर आती थी'

अमेरिका से डिपोर्ट किए गए अंकित ने कहा कि साल 2019 में वह सबसे पहले दिल्ली गए, दिल्ली से फ्लाइट पकड़कर इथोपिया गए, इसके बाद ब्राजील की फ्लाइट पकड़ी. कुछ दिन तक ब्राजील में एक होटल में रुके रहे. इसके बाद उन्होंने ब्राजील से सड़क के रास्ते से पेरु में एंट्री की. पेरु से 28 घंटे का सफर बस में तय किया और उसके बाद पिकअप के माध्यम से एक्वाडोर पहुंचे. इस दौरान एक नदी भी पार करनी पड़ी थी. एक्वाडोर से कोलंबिया तक रोड रूट से पहुंचे. इसमें करीब 10 दिन लगे. कोलंबिया से समुद्र के जरिए आगे का सफर तय किया. ये सफर 4.30 घंटे का था. अंकित ने बताया कि ये काफी खतरनाक था, वहां हर पल मौत नजर आती थी. 

Advertisement

पनामा के जंगल में माफिया का खतरा

अंकित ने कहा कि ये रिस्की रूट तय करके वह पनामा के जंगल तक पहुंचे. जिसे पैदल पार करने में 5 दिन लग गए. वहां माफिया भी मिलते हैं, जो डॉलर या बाकी कीमती सामान छीन लेते हैं. उसके बाद पनामा के कैंप में पहुंचे. 3 अलग-अलग कैंप में कई दिन बिताए, उसके बाद सड़क के माध्यम से क्रोस्टीका पहुंचे और उसके बाद सड़क के माध्यम से निकारोगोआ का बॉर्डर पार किया. 

दीवार क्रॉस करके USA में दाखिल हुए

डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने वाले अंकित ने बताया कि निकारोगोआ के बाद होंडुरास का बॉर्डर पार किया. फिर ग्वाटेमाला पहुंच गए और सड़क के माध्यम से मैक्सिको पहुंच गए. मैक्सिको पहुंचने के बाद कई दिन तक कैंप में रहे. मैक्सिको पहुंचने के बाद यूएसए के बॉर्डर तक बस ली और फिर दीवार क्रॉस करके USA में दाखिल हुए. यूएसए के अलग-अलग कैंप और जेल में कई दिन बिताए. 

युवाओं से ये अपील कर रहे अंकित

अंकित ने बताया कि अमेरिका पहुंचने की प्रक्रिया के दौरान घर वालों से बात नहीं होती थी, समय पर खाना नहीं मिलता था. जेल में टॉर्चर किया जाता था. ऐसे कई कैम्प और जेल में वक्त बिताया. बाद में जब बॉन्ड भी नहीं भरा तो उसे अमेरिका से डिपोर्ट कर दिया गया. अंकित ने युवाओं से अपील की है कि डंकी रूट के जरिए न जाएं, सही रास्ता अपनाएं और पैसे हैं तो यहीं रहकर काम करें. हार ना मानें. बता दें कि अंकित साल 2020 में वापस भारत आ गए थे और अब अपना कैफे चलाते हैं. अंकित अब कभी दोबारा विदेश नहीं जाना चाहते. 

(रिपोर्ट- कमलदीप)

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement