
शंभू बॉर्डर पर बैरिकेडिंग हटाने के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश से पिछले पांच महीनों से यहां प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों को राहत मिली है. एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हरियाणा पुलिस द्वारा लगाई गई सात लेयर की बैरिकेडिंग को एक सप्ताह के भीतर हटाने का आदेश दिया है. जजों ने पंजाब और हरियाणा सरकारों से बैरिकेड हटाने के लिए एक-दूसरे के साथ समन्वय करने को भी कहा.
स्थानीय निवासियों और व्यापारियों द्वारा बैरिकेडिंग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद कोर्ट के निर्देश आए हैं. उनका कहना है कि इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है. नाकेबंदी के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर कारोबार ठप हो गया. छात्रों और स्थानीय लोगों को भी अंबाला और राजपुरा कस्बों तक पहुंचने के लिए गांव की सड़कों का इस्तेमाल करने को मजबूर होना पड़ा.
विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार: कोर्ट
कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा कि जब शंभू में स्थिति शांतिपूर्ण है तो किसानों को आगे बढ़ने से रोकने का कोई मतलब नहीं है. केंद्र सरकार से मांग की जा रही है और उन्हें जाने दिया जाना चाहिए. हरियाणा सरकार ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि बैरिकेडिंग हटाने से किसानों के लिए राज्य में प्रवेश करना और एसपी ऑफिस का घेराव करना आसान हो जाएगा. जजों ने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है और किसानों को हरियाणा में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता.
न्यायमूर्ति जीएस संधावालिया ने कहा, "वर्दीधारी लोग उनसे नहीं डर सकते. हम लोकतंत्र में रह रहे हैं, किसानों को हरियाणा में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता. उन्हें घेराव करने दीजिए."
हाईकोर्ट की पीठ ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को राजमार्ग की बहाली के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भी निर्देश दिया है. हाईकोर्ट की पीठ ने पुलिस कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर मारे गए प्रदर्शनकारी शुभकरण सिंह की एफएसएल रिपोर्ट पर भी विचार किया. एफएसएल रिपोर्ट में कहा गया है कि शॉटगन लगने से उसकी मौत हो गई.
बैठक के बाद आगे की कार्रवाई तय करेंगे: किसान नेता
भारतीय किसान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष मनजीत सिंह घुमाना ने आजतक से कहा, "हम अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि अदालत ने राज्य सरकार को तीनों सीमाओं से बैरिकेडिंग हटाने का निर्देश दिया है या सिर्फ शंभू बॉर्डर से. हम अदालत के आदेश का इंतजार कर रहे हैं और बैठक करने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेंगे."
वहीं बीकेयू बेहरामके के एक अन्य किसान यूनियन नेता चमकौर सिंह उस्मानवाला ने कहा कि यह किसान यूनियन नहीं बल्कि हरियाणा सरकार थी जिसने सड़क को अवरुद्ध किया था. चमकौर सिंह उस्मानवाला ने कहा, "एक दर्जन मांगें हैं जिनमें एमएसपी पर कानूनी गारंटी भी शामिल है. अगर सरकार शंभू बॉर्डर पर ही सभी मांगों को स्वीकार कर लेती है तो हम अपने गांवों में वापस चले जाएंगे. अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो हम दिल्ली की ओर मार्च करेंगे."
400 किसान अब भी शंभू बॉर्डर पर टिके
बता दें कि पंजाब के विभिन्न हिस्सों से करीब 400 किसान अभी भी शंभू बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं. हालांकि चावल की रोपाई के बाद अधिकांश किसान अपने खेतों में वापस लौट गए हैं. अदालत के आदेश से प्रदर्शनकारियों को राहत मिली है, जो कड़ाके की ठंड और चिलचिलाती धूप में डटे हुए हैं. शंभू बॉर्डर पर पांच महीने से चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान दो दर्जन से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है.
किसान यूनियनों ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वे अपना मार्च कब फिर से शुरू करेंगे. इस सप्ताह शंभू बॉर्डर पर किसान यूनियनों की एक बैठक होनी थी.
किसानों की हैं ये मांगें
शंभू बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) कर रहे हैं. किसानों ने तीन प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग को लेकर शंभू रेलवे स्टेशन को जाम कर दिया था, लेकिन एक महीने बाद इसे खाली करा लिया गया. किसान यूनियनों की मांगों में दो दर्जन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, बुजुर्ग किसानों और मजदूरों के लिए मासिक पेंशन और कर्ज माफी शामिल हैं.