
हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले 'चौटाला परिवार' को एकजुट करने में जुटीं खाप पंचायतों के अरमानों पर दुष्यंत चौटाला ने पानी फेर दिया है. इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) से अलग होकर अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) द्वारा शुक्रवार को अपने सात प्रत्याशियों की पहली सूची घोषित करने के साथ ही चौटाला परिवार में एकजुटता के सारे कयासों पर पूर्णविराम लग गया है.
हालांकि खाप पंचायतें पिछले कई दिनों से अभय सिंह चौटाला और दुष्यंत सिंह चौटाला के बीच खड़ी सियासी दिवार को गिराने की कवायद कर रही थीं. इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला और अभय सिंह चौटाला द्वारा इसके लिए खाप पंचायतों को अधिकृत करने के साथ-साथ पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल की मध्यस्थता के बावजूद भी कोई राजनीतिक हल नहीं निकल सका. इसके साथ ही साफ हो गया है कि अब चौटाला परिवार राजनीतिक तौर पर एक नहीं हो सकता है.
बता दें कि चौटाला परिवार की एकजुटता को लेकर किए जा रहे प्रयास के मद्देनजर शनिवार को रोहतक के जाट भवन में बैठक हुई. इसमें खाप प्रतिनिधियों ने चौटाला परिवार को एकजुट करने के लिए तानाबाना बुना और सर्वसम्मति के साथ एक प्रस्ताव पास किया था.
हालांकि इसी के बाद जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने साफ कर दिया कि राजनीति में चौटाला परिवार एक नहीं हो सकता है. दुष्यंत ने कहा कि चौधरी अजय सिंह चौटाला ने स्पष्ट कर दिया है कि वह परिवारिक तौर पर एक हो सकते हैं, लेकिन राजनीतिक तौर पर कभी नहीं मिल सकते हैं.
खाप नेताओं के चौटाला परिवार को एकजुट करने के सवाल पर पूर्व सांसद ने कहा कि जब हमें इनेलो से निकाला गया तब हमारे साथ कोई नहीं खड़ा था. अगर परिवार को एक करने की बात है तो इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला जहां भी बुलाएंगे हम चले आएंगे. लेकिन जब राजनीति में जेजेपी का अपना वजूद बना तो खाप नेताओं को परिवार एक करने की याद आ रही है. इससे पहले कभी उन्होंने हमारी खबर नहीं ली.
हालांकि खाप पंचायत से पहले ही दुष्यंत चौटाला ने शुक्रवार को अपने सात प्रत्याशियों की सूची जारी करके अपने मंशा साफ कर दी थी. इसके बाद भी खाप पंचायतों ने बैठक की और सर्वसम्मति के साथ प्रस्ताव पास किया गया था. इस प्रस्ताव को दुष्यंत ने मानने से इनकार कर दिया है. इसके साथ ही चौटाला परिवार की एकजुटता को लेकर जो मुहिम शुरू की गई थी उसे खाप पंचायत ने भी खत्म कर दिया है.