
हरियाणा की राजनीति में देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल के परिवार हमेशा चर्चा में रहते हैं. कई दशकों तक सूबे की सियासत इन्हीं तीन परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रही है. इस बार भी इन परिवारों के 13 सदस्य चुनावी मैदान में थे, हालांकि इस बार के चुनाव में इन तीनों परिवारों का वर्चस्व कम हुआ है. इन परिवारों के 13 सदस्यों में से केवल चार ही हरियाणा की विधानसभा में पहुंचे हैं. आइए जानते हैं कि देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल के कौन-कौन से सदस्य किस विधानसभा सीट पर लड़े थे और किसे विधानसभा पहुंचने का मौका मिला है.
इन तीन परिवारों से चुनावी मैदान में उतरे 13 सदस्यों में से आठ अकेले ही एक ही परिवार से थे, जिसका नाम है देवीलाल यानी चौटाला फैमिली. इस परिवार से रणजीत चौटाला, अभय चौटाला, आदित्य देवीलाल, दुष्यंत चौटाला, सुनैना चौटाला, दिग्विजय चौटाला, अमित सिहाग और अर्जुन चौटाला. इस फैमिली से केवल दो ही सदस्य अर्जुन चौटाला और आदित्य देवीलाल चुनाव जीत सके. इन दोनों ने ही INLD की टिकट पर चुनाव जीता.
देवीलाल परिवार का कौन सदस्य कहां से चुनाव लड़ा था?
देवीलाल के बेटे रणजीत चौटाला सिरसा की रानिया सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े थे. रणजीत को उनके ही भाई ओम प्रकाश चौटाला के पोते अर्जुन चौटाला (INLD) ने हरा दिया. रणजीत इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रहे. ओम प्रकाश चौटाला के बेटे अभय चौटाला आईएनएलडी की टिकट पर अपने परिवार की परंपरागत सीट ऐलनाबाद से चुनावी मैदान में उतरे थे. उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा. हालांकि ओपी चौटाला के छोटे भाई जगदीश के बेटे आदित्य देवीलाल INLD की टिकट पर डबवाली सीट से चुनाव जीत गए. इस सीट पर उनके सामने चौटाला फैमिली के ही जेजेपी से दिग्विजय चौटाला और कांग्रेस से अमित सिहाग थे. अमित सिहाग, ओमप्रकाश चौटाला के भतीजे और डबवाली सीट से ही विधायक थे. चौटाला फैमिली के लिए डबवाली सीट इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि देवीलाल का पैतृक गांव चौटाला इसी विधानसभा क्षेत्र में आता है. इसके अलावा उचाना कलां सीट से जेजेपी की टिकट पर दुष्यंत चौटाला ने चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें इस बार हार का सामना करना पड़ा. उनके साथ ही आईएनएलडी महिला विंग की महासचिव और अभय चौटाला के चचेरे भाई रवि चौटाला की पत्नी सुनैना चौटाला की फतेहाबाद सीट पर हार हुई. रवि चौटाला ओम प्रकाश चौटाला के भाई प्रताप सिंह चौटाला के बेटे हैं.
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बंसीलाल के परिवार की विरासत किसने बचाई?
अब बात करते हैं हरियाणा के दूसरे लाल- बंसीलाल की. इस परिवार की विरासत इस बार बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी ने संभाली. श्रुति ने भिवानी जिले की तोशाम सीट से बीजेपी की टिकट पर चुनाव जीता है. उनके सामने कांग्रेस की टिकट पर उनके ही चचेरे भाई अनिरुद्ध चौधरी थे. अनिरुद्ध बंसीलाल के बड़े बेटे महेंद्र के बेटे हैं. इससे पहले बंसीलाल का बहू किरण चौधरी तोशाम सीट से चुनाव लड़ती रही हैं. इस बार उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था, जिसके बाद उन्हें बीजेपी ने राज्यसभा भेज दिया था.
भजनलाल परिवार से कौन जीता चुनाव?
इस परिवार के लोग भी दो अलग-अलग पार्टियों में हैं. भजनलाल के छोटे भाई डूडाराम और बेटे कुलदीप बिश्नोई जहां बीजेपी में हैं तो वहीं दूसरे बेटे चंद्रमोहन कांग्रेस में. बीजेपी ने इस परिवार के दो सदस्यों को टिकट दिया था. डूडाराम को फतेहाबाद सीट से तो कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई को आदमपुर सीट से उतारा था, लेकिन ये दोनों ही चेहरे चुनाव हार गए. जहां डूडाराम को 2252 वोटों से हार का सामना करना पड़ा, वहीं भव्य बिश्नोई की हार का अंतर 1268 था. हालांकि कांग्रेस की टिकट पर पंचकूला से चुनाव लड़े चंद्रमोहन ने भजनलाल की विरासत बचाई और करीब दो हजार वोटों से जीतकर विधानसभा पहुंचे.
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हरियाणा में किस पार्टी को मिली कितनी सीटें?
हरियाणा में बीजेपी ने इस बार शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत की हैट्रिक लगाई है. बीजेपी को इस बार 48 सीटों पर जीत मिली है, जबकि कांग्रेस 37 सीटों पर ही जीत सकी. इस चुनाव में जनता ने दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी को पूरी तरह से नकार दिया. जेजेपी ने चंद्रशेखर की पार्टी एएसपी के साथ गठबंधन किया था. इसके बाद भी दोनों में से किसी का खाता नहीं खुला. इसके अलावा इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) का इस बार ठीक प्रदर्शन रहा. पार्टी दो सीटें जीतने में कामयाब रही. INLD और BSP ने मिलकर चुनाव लड़ा था. उसके बाद भी BSP अपना खाता नहीं खोल पाई. राज्य में तीन निर्दलीय उम्मीदवारों की भी जीत हुई है. इनमें हिसार से सावित्री जिंदल, गनौर से देवेंद्र काद्यान और बहादुरगढ़ से राजेश जून की जीत हुई है.