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गुरुग्राम, सोनीपत, मानेसर से पटौदी तक... मेयर चुनाव के लिए हरियाणा में चल रही गजब रस्साकशी

हरियाणा में निकाय चुनाव चल रहे हैं. नामांकन की अंतिम तारीख बीत चुकी है और बीजेपी-कांग्रेस के बीच गुरुग्राम से मानेसर और पटौदी तक, मेयर पद के लिए गजब रस्साकशी चल रही है.

Haryana Municipal Elections 2025 Haryana Municipal Elections 2025
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 18 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

हरियाणा में एक साल के भीतर तीसरा चुनाव हो रहा है. 2024 के आम चुनाव और विधानसभा चुनाव के बाद हरियाणा की जनता गुरुग्राम से सोनीपत, मानेसर और पटौदी तक शहर की सरकार चुनने के लिए वोट करेगी. इसके लिए चुनावी कुरुक्षेत्र सज चुका है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस, दोनों प्रमुख दलों के साथ ही अन्य दलों ने भी अपने उम्मीदवार चुनावी रणभूमि में उतार दिए हैं. नामांकन की अंतिम तारीख बीत चुकी है और अब प्रचार ने रफ्तार पकड़ ली है. मेयर चुनाव में कांग्रेस ने कहीं  भी इस बार हर जगह गजब की रस्साकशी चल रही है.

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गुरुग्राम में बीजेपी-कांग्रेस की सीधी फाइट

गुरुग्राम के मेयर चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस की सीधी फाइट है. इस सीट पर मेयर के लिए दो ही उम्मीदवारों ने नामांकन किया है. सूबे की सत्ता पर काबिज बीजेपी से राजरानी मल्होत्रा उम्मीदवार हैं. वहीं, कांग्रेस ने सीमा पाहुजा पर दांव लगाया है. सीमा पाहुजा साल 2019 में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गई थीं. हालिया विधानसभा चुनाव में सीमा ने पार्टी छोड़ दी थी और निर्दलीय उम्मीदवार नवीन गोयल का समर्थन किया था. अब सीमा मेयर चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार हैं.

बीजेपी की राजरानी और कांग्रेस की सीमा, दोनों प्रमुख दलों की मेयर कैंडिडेट पंजाबी समुदाय से ही आती हैं. कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरीं सीमा बीजेपी में करीब पांच साल रही हैं और वह पार्टी में जिला उपाध्यक्ष भी थीं. वह सत्ताधारी दल की रणनीति जानती हैं. कांग्रेस और सीमा ने सीवर से जाम तक, गुरुग्राम की समस्याओं पर फोकस कर दिया है. जानकार बीजेपी को घेरने के लिए कांग्रेस के दांव को बेहतर कोशिश बता रहे हैं.

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सोनीपत में कांग्रेस ने पूर्व विधायक बेटे को उतारा

सोनीपत के मेयर उपचुनाव में कांग्रेस ने 2020 के फॉर्मूले पर ही कैंडिडेट दिया है. कांग्रेस ने सोनीपत मेयर के लिए कमल दीवान को उम्मीदवार बनाया है जो पूर्व विधायक देवराज दीवान के बेटे हैं. कमल पंजाबी समुदाय से आते हैं. 2020 के मेयर चुनाव में पार्टी ने निखिल मदान को उम्मीदवार बनाया था और वह चुनाव जीते भी थे.  बाद में निखिल बीजेपी में शामिल हो गए थे. हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी की बड़ी हार के पीछे पंजाबी समुदाय की नाराजगी को वजह बताया गया था. मेयर चुनाव में कांग्रेस ने पंजाबी समुदाय से ही उम्मीदवार उतारकर नाराजगी समाप्त करने की कोशिश की है.

मानेसर में कांग्रेस के दांव से रोचक हुई जंग

मानेसर नगर निगम के मेयर चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही दलों ने यादव उम्मीदवार उतारे हैं. बीजेपी ने सरपंच सुंदरलाल यादव को टिकट दिया है. सिकंदरपुर बढ़ा गांव के सरपंच रहे सुंदरलाल यादव पूर्व सीएम मनोहरलाल खट्टर और राव नरबीर के करीबी माने जाते हैं. मानेसर के मेयर चुनाव में अहीरवाल के कद्दावर राव इंद्रजीत सिंह अपने किसी समर्थक को टिकट दिलाने के लिए जोर लगाए हुए थे.

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राव इंद्रजीत मानेसर से बीजेपी उम्मीदवार के नामांकन में भी कहीं नजर नहीं आए. ऐसे में उनकी नाराजगी के भी कयास हैं. कांग्रेस ने मानेसर गांव के ही रहने वाले नीरज यादव पर दांव लगाया है. नवगठित मानेसर नगर निगम के पहले मेयर चुनाव में कांग्रेस ने सबसे अधिक वोट वाले गांव से उम्मीदवार देकर मुकाबले को रोचक बना दिया है.

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पटौदी में बीजेपी-कांग्रेस के लिए बागी बढ़ा रहे मुसीबत

गुरुग्राम जिले की पटौदी नगर परिषद से अध्यक्ष पद के लिए बीजेपी ने प्रवीण ठकारिया और कांग्रेस ने राजरानी को चुनाव मैदान में उतारा है. पटौदी नगर परिषद के अध्यक्ष चुनाव में दोनों ही दलों के लिए बगावत मुसीबत बढ़ा रही है. बीजेपी से टिकट नहीं मिला तो पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील पटौदी ने निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. वहीं, कांग्रेस को भी तगड़ा झटका लगा है. पूर्व विधायक रामबीर सिंह ने कांग्रेस छोड़ दी है और निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है.

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