
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों पर 10 जून को चुनाव है. विधायकों के आंकड़ों के लिहाज से बीजेपी की एक सीट पर जीत तय है, लेकिन दूसरी सीट पर कांग्रेस के अजय माकन और निर्दलीय उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा के बीच मुकाबला है. ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत के लिए 30 वोट चाहिए और कांग्रेस के पास अपने 31 विधायक हैं, पर असंतुष्ट चल रहे विधायक कुलदीप बिश्नोई ने माकन के लिए एक चिंता पैदा कर दी है. ऐसे में कुलदीप बिश्नोई को मनाने का दारोदमार अब राहुल गांधी पर है?
हरियाणा में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर कुलदीप बिश्नोई नाराज चल रहे हैं. ऐसे में बिश्नोई ने राज्यसभा चुनाव के बीच बगावती तेवर दिखा दिए हैं.
राहुल गांधी के पाले में डाली गेंद
उन्होंने कहा है कि राज्यसभा चुनाव में वो अपनी मर्जी से वोट करेंगे. किसे वोट करना है, इसका उन्होंने अब तक फैसला नहीं लिया है. उन्होंने कहा था, 'मैं एक मजबूत कांग्रेसी हूं और राहुल गांधी से मिलने से पहले कोई फैसला नहीं लूंगा, ना ही कांग्रेस के किसी मंच पर खड़ा होऊंगा.' इस तरह बिश्नोई ने राहुल गांधी के पाले में गेंद डाल रखी है.
राहुल गांधी विदेश से लौट आए हैं, लेकिन अभी तक कुलदीप बिश्नोई से मुलाकात नहीं हो सकी है. हालांकि, अजय माकन उन्हें साधने में जुटे हैं, लेकिन भूपेंद्र सिंह ने यह बयान देकर बात बिगाड़ दी कि अगर किसी की अंतरात्मा पार्टी के साथ नहीं है तो पार्टी में बने रहने का अधिकार भी नहीं है. इसके बाद से कुलदीप बिश्नोई ने सख्त तेवर अपना रखे हैं और राहुल गांधी से बात करके ही निर्णय लेने की बात कही है.
कुलदीप बिश्नोई नहीं माने तो..
पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई को कांग्रेस में राहुल गांधी लेकर आए थे, जिसके चलते किसी तरह का कोई फैसला लेने के पहले राहुल गांधी के साथ विचार-विमर्श करना चाहते हैं. सोमवार को राहुल गांधी और बिश्नोई की मुलाकात होनी थी, लेकिन वो नहीं हो सकी. ऐसे में अजय माकन के राज्यसभा पहुंचने के लिए राहुल गांधी ही कुलदीप बिश्नोई को समझा कर वोट डालने के लिए राजी कर सकते हैं. अगर बिश्नोई नहीं माने तो फिर माकन के सामने सियासी राह मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.
बता दें कि हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से बीजेपी के पास 40 और और जेजेपी के पास 10 विधायक हैं. वहीं, कांग्रेस के 31 विधायक हैं. इसके अलावा सात निर्दलीय, हरियाणा लोकहित पार्टी का एक और इनेलो का एक विधायक है. ऐसे में एक राज्यसभा सीट के लिए 31 वोटों का प्राथमिक आधार पर वोट चाहिए होगा. इस लिहाज से बीजेपी की एक सीट कन्फर्म है, जिसके बाद बचे 9 वोट अतरिक्त बचेंगे.
निर्दलीय को समर्थन देगी बीजेपी
बीजेपी ने अपने 9 विधायकों के वोट निर्दलीय कार्तिकेश शर्मा को देने का फैसला किया है. इसके अलावा बीजेपी के साथ सरकार में शामिल जेजेपी के 10 विधायक और 6 निर्दलीय विधायक भी कार्तिकेय के समर्थन में है. इस तरह से कार्तिकेय शर्मा के पक्ष में 25 विधायकों का समर्थन है. ऐसे में निर्दलीय कार्तिकेश शर्मा को जीतने के लिए महज 6 वोटों की अतिरिक्त जरूरत है, जिसके लिए वो जोड़तोड़ में जुटे हैं.
कांग्रेस ने विधायकों को छत्तीसगढ़ भेजा
वहीं, कांग्रेस के 31 विधायक हैं, जिसके दम पर अजय माकन जीत सकते हैं, लेकिन कुलदीप शर्मा और कुलदीप बिश्नोई के नाराज होने से कांग्रेस का सियासी समीकरण बिगड़ गया है. ऐसे में कांग्रेस के 28 विधायकों को छत्तीसगढ़ के रायपुर के एक रिसॉर्ट में रखा गया है, जहां पर कुलदीप शर्मा, कुलदीप बिश्नोई और चिरंजीवी नहीं पहुंचे थे. हालांकि, चिरंजीवी के पहुंचने के बाद कांग्रेस के विधायकों की संख्या 29 पहुंच गई है, लेकिन अभी भी उसे कुलदीप बिश्नोई को साधने की है.
कांग्रेस अभय चौटाला और हरियाणा लोकहित पार्टी के गोपाल कांडा को भी साथ लेने की कोशिश में है तो बीजेपी भी कार्तिकेय शर्मा के पक्ष में खुलकर खड़ी है. कार्तिकेय शर्मा जोड़तोड़ के जरिए राज्यसभा पहुंचना चाहते हैं तो कांग्रेस के सामने अपनी एक सीट जीतने की चुनौती है, जो कुलदीप बिश्नोई के मानने के बाद ही पूरी होगी.
कार्तिकेय शर्मा के पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा तीस साल पहले राज्यसभा पहुंचे थे, लेकिन अब विनोद शर्मा क्या अपने बेटे को राज्यसभा पहुंचाने में सफल हो पाते हैं, यह तो 10 जून को ही तय हो सकेगा.
कांग्रेस के प्रत्याशी अजय माकन को 31 वोट की जरूरत है. कुलदीप बिश्नोई को मिला कर पार्टी के पास 31 विधायक हैं. ऐसे में बिश्नोई साथ नहीं आए तो कांग्रेस की मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. कांग्रेस के दूसरे विधायक की तोड़फोड़ की भी कवायद हो रही है. कुलदीप शर्मा निर्दलीय प्रत्याशी कार्तिकेय शर्मा के ससुर हैं, जिसके चलते वो उन्हें वोट दे सकते हैं. ऐसे में कांग्रेस के सामने कुलदीप बिश्नोई को मनाने का जिम्मा राहुल गांधी पर होगा. अब देखना है कि अजय माकन की राह राहुल गांधी आसान करते हैं या फिर नहीं?