
नए कृषि कानूनों के विरोध में सड़क पर उतरे किसान झुकने को तैयार नहीं हैं. किसानों की नाराजगी को देखते हुए बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए की सहयोगी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) और जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) की चिंता बढ़ गई है. किसान आंदोलन की रफ्तार और बढ़ती है तो हरियाणा में जेजेपी के सहयोग से चल रही खट्टर सरकार की परेशानी बढ़ सकती है. हरियाणा में एक निर्दलीय विधायक ने तो बीजेपी सरकार से समर्थन भी वापस ले लिया है और जेजेपी ने आंखे तरेरते हुए किसानों की समस्या का जल्द समाधान करने की मांग रख दी है.
किसान आंदोलन को हरियाणा के कांग्रेस नेता हवा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे. हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला सहित तमाम नेता किसान आंदोलन के पक्ष में खड़े हैं और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से लेकर हरियाणा की खट्टर सरकार तक पर हमला बोल रहे हैं. साथ ही हरियाणा की खाप पंचायत भी किसानों के समर्थन में खड़ी हो गई है, जिसके चलते दुष्यंत चौटाला के साथ-साथ जेजेपी के विधायक और सरकार को समर्थन करने वाले निर्दलीय विधायकों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं.
JJP और निर्दलीय MLA हो रही बागी
बीजेपी के लिए मुश्किल यह है कि हरियाणा में खट्टर के नेतृत्व वाली सरकार जेजेपी की बैसाखी पर टिकी है. ऐसे में हरियाणा में खट्टर सरकार के समर्थन कर रहे निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान ने अपना सहयोग वापस ले लिया. साथ ही उन्होंने पशुधन विकास बोर्ड के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया है. निर्दलीय विधायक के इस्तीफा देने के बाद जेजेपी के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है. यही वजह है कि मंगलवार को जेजेपी नेकिसानों की मांग का समर्थन करते हुए नए कानूनों में एमएसपी जारी रखने का लिखित आश्वासन देने की मांग उठाई है.
जेजेपी के अध्यक्ष अजय चौटाला ने कहा कि केंद्र सरकार को किसानों की समस्या का जल्द से जल्द हल निकालना चाहिए. किसानों की मांग के अनुरूप कृषि कानूनों में एमएसपी को शामिल करना चाहिए. देश के अन्नदाता सड़कों पर परेशान हो रहे हैं. ऐसे में सरकार को अपना दिल बड़ा करते हुए किसानों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए और उन्हें एमएसपी का लिखित में आश्वासन देना चाहिए ताकि उनकी चिंताएं दूर हों.
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने खोला रखा मोर्चा
वहीं, हरियाणा के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा किसानों के मुद्दे पर खट्टर और मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ हरियाणा के किसान आंदोलन कर रहे हैं और बार-बार सरकार से इन कानूनों को वापस लेने व एमएसपी की गारंटी देने का कानून बनाने की मांग कर रहे हैं. मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि क्या वे इन आंदोलनकारी किसानों को हरियाणा का किसान नहीं मानते? पिपली में सरकार ने क्यों लाठीचार्ज करवाया था? साथ ही हुड्डा ने कहा, 'मैं यह बात शुरू से कह रहा था कि चुनाव में जेजेपी ने बीजेपी के खिलाफ रहे वोटरों का वोट लिया और बाद में बीजेपी का समर्थन किया.'
दरअसल, पिछले साल 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में कुल 90 सीटों में से बीजेपी 40 सीटें जीती थी, जिसके बाद जेजेपी के 10 और निर्दलीय के पांच विधायकों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी. वहीं, कांग्रेस के 31 विधायक हैं और उन्हें चार निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल हैं. इसके अलावा 1 इनेलो, 1 एचएलपी और दो निर्दलीय विधायक हैं. हालांकि, सरकार के बनने के बाद से जेजेपी के करीब 4 विधायक बागी रुख अपनाए हुए हैं. इस तरह से अब किसान आंदोलन की रफ्तार और तेजी होती है तो जेजेपी के विधायकों में बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है.
वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा लगातार यह बात कह रही हैं कि दुष्यंत चौटाला को प्रदेश के किसानों की नहीं बल्कि बीजेपी के साथ सत्ता में बने रहने की चिंता है. उन्होंने कहा कि मनोहर लाल खट्टर सरकार की मनमानी और केंद्र की सख्ती के चलते हुए जेजेपी और निर्दलीय विधायक को सरकार से समर्थन वापस लेकर किसानों के साथ खड़े होने के लिए फैसला लेने का समय आ गया है.