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राजनेता, बिजनेसमैन और वकील... देखें ओम प्रकाश चौटाला की पूरी फैमिली ट्री

देवी लाल के बेटे ओमप्रकाश चौटाला भी भारतीय राजनीति के दिग्गजों में से एक थे. ओम प्रकाश चौटाला हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल के बेटे थे. सिरसा जिले की डबवाली तहसील का चौटाला गांव चौटाला परिवार की जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों रही है.

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला (फाइल फोटो) हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 20 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:27 PM IST

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के नेता ओम प्रकाश चौटाला का शुक्रवार को गुरुग्राम स्थित उनके आवास पर 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया. हरियाणा की सियासत के एक अहम किरदार रहे चौटाला रिकॉर्ड चार बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे और उनका अंतिम कार्यकाल 1999 से 2005 तक रहा.  'ताऊ' के नाम से मशहूर चौधरी देवी लाल चौटाला के परिवार का सियासी रसूख इतिहास में दर्ज है.

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जनवरी 1935 में जन्मे ओमप्रकाश चौटाला 'ताऊ' के नाम से मशहूर चौधरी देवी लाल के पुत्र थे, जिन्होंने भारत के 6वें उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया. देवी लाल 1971 तक कांग्रेस में रहे और दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे. 1977 में देवी लाल जनता पार्टी में शामिल हुए तो 1987 में लोकदल में आ गए. देवी लाल के बेटे ओमप्रकाश चौटाला भी भारतीय राजनीति के दिग्गजों में से एक थे. हालांकि उनका करियर विवादों से भी घिरा रहा, जिसमें एक भर्ती घोटाला भी शामिल है जिसके कारण उन्हें जेल जाना पड़ा.

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जब परिवार में पड़ी फूट

ओम प्रकाश चौटाला के परिवार का भी सियासत में दबदबा रहा है. हालांकि बाद में पारिवारिक अंतर्कलह के चलते उनकी पार्टी इंडियन नेशनल लोक दल में टूट हो गई और 2013 में इसकी शुरुआत हुई. बात तब की है, जब देवीलाल चौटाला के बेटे ओमप्रकाश चौटाला और पोते अजय चौटाला जेबीटी घोटाले में 10 साल के लिए जेल गए. इसके बाद इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो - INLD) की कमान अभय चौटाला के हाथ में आ गई. 2014 के चुनाव में अजय चौटाला के बड़े बेटे दुष्यंत चौटाला राजनीति में आए. 2014 में दुष्यंत हिसार लोकसभा सीट से कुलदीप बिश्नोई को हराकर सबसे युवा सांसद बने.

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दुष्यंत के सांसद बनने के बाद ही राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी हार गई. कारण था दुष्यंत के सांसद बनने के बाद पार्टी का दो खेमों में बंट जाना. पार्टी का एक गुट अभय चौटाला के साथ हो गया और दूसरा दुष्यंत के साथ. 2018 में पार्टी की फूट पूरी तरह से सामने आ गई. ओमप्रकाश चौटाला ने अजय के दोनों बेटों दुष्यंत और दिग्विजय को पार्टी से बाहर निकाल दिया. इनेलो की कमान अभय के पास पूरी तरह से आ गई. दिसंबर 2018 में दुष्यंत चौटाला ने जननायक जनता पार्टी की नींव रखी. तो आइए जानते हैं कि चौटाला परिवार में कौन-कौन है-

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कौन-कौन हैं ओमप्रकाश चौटाला के खानदान में

देवीलाल के चार बेटेः ओमप्रकाश चौटाला, स्व. प्रताप चौटाला, रंजीत सिंह (कांग्रेस) और स्व. जगदीश चौटाला.

ओमप्रकाश चौटाला के दो बेटेः अजय और अभय चौटाला.

अजय और अभय के दो-दो बेटे- अजय चौटाला के बेटेः दुष्यंत और दिग्विजय. दोनों राजनीति में.

अभय चौटाला के बेटेः कर्ण और अर्जुन. दोनों राजनीति में.

प्रताप चौटाला के दो बेटेः रवि और जितेंद्र. दोनों बिजनेसमैन.

रंजीत सिंह के दो बेटेः गगनदीप और स्व. संदीप सिंह. गगनदीप बिजनेसमैन.

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जगदीश चौटाला के तीन बेटेः आदित्य (भाजपा), अभिषेक (वकील) और अनिरुद्ध (वकील) 

1989 में ओमप्रकाश चौटाला ने की राजनीति में शुरुआत

जब देवीलाल डिप्टी पीएम बने तो उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला हरियाणा के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला 1989 से 91 तक मुख्यमंत्री रहे. 1991 में देवीलाल लोकसभा चुनाव हारे और यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा समाप्त हो गई. 1999 में ओमप्रकाश चौटाला ने भाजपा की मदद से हरियाणा में सरकार बनाई. 2005 तक वे हरियाणा के सीएम बने. 2001 में देवीलाल का देहांत हो गया.

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हरियाणा की राजनीति की धुरी थे देवीलाल

कहते हैं कि एक जमाने में हरियाणा में देवीलाल की राजनीति में तूती बोलती थी. करीब 4 दशकों तक इनके परिवार ने राज्य की राजनीति को तय किया है. आज भी राज्य में मजबूत पकड़ बना रखी है. इनकी तीसरी और चौथी पीढ़ी राजनीतिक मैदान में है. देवीलाल का जन्म हरियाणा के सिरसा जिले के तेजाखेड़ा गांव में वर्ष 1912 में हुआ था. 15 साल की उम्र में वे देश की आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए. 1930 में महात्मा गांधी के आंदोलन में शामिल हुए तो जेल जाना पड़ा. 1938 में देवीलाल कांग्रेस में शामिल हुए. 1942 में देवीलाल को 'अंग्रेजो भारत छोड़ो' आंदोलन के दौरान करीब दो साल तक जेल में रहना पड़ा.

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