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'गवाह अमेरिका भाग गया', सबूत-जांच और दलीलों का पेच... गीतिका सुसाइड केस में कांडा के बरी होने की पूरी कहानी

हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा और उनकी सहयोगी अरुणा चड्ढा को दिल्ली की एक अदालत ने 2012 के गीतिका शर्मा आत्महत्या मामले में बरी कर दिया है. इस मामले में गोपाल और अरुणा पर आत्महत्या के लिए उकसाने, सबूत नष्ट करने, आपराधिक साजिश और जालसाजी के आरोप लगाए गए थे. गीतिका की मौत के बाद परिजन ने गोपाल पर परेशान करने के आरोप लगाए थे. पुलिस ने भी कई आरोपों की पुष्टि की थी.

गीतिका शर्मा आत्महत्या केस में गोपाल कांडा को बरी कर दिया गया है. गीतिका शर्मा आत्महत्या केस में गोपाल कांडा को बरी कर दिया गया है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 26 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 1:42 PM IST

एयर होस्टेस गीतिका शर्मा सुसाइड केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला आ गया है. कोर्ट ने 11 साल पुराने इस मामले में आरोपी गोपाल कांडा और अरुणा चड्ढा को बरी कर दिया है. इस मामले में पुलिस ने विशेष जज विकास ढुल की कोर्ट में 1800 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. 2012 में एफआईआर दर्ज होने के बाद गोपाल कांडा को गृह राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था और 18 महीने की जेल की सजा काटनी पड़ी थी. 

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पुलिस ने कोर्ट में जो चार्जशीट दाखिल की थी, उसमें बताया कि 5 अगस्त 2012 को दिल्ली के अशोक विहार फेज III में कुलाची के पास गीतिका शर्मा (23 साल) के सुसाइड करने के संबंध में सूचना मिली थी. गीतिका कमरे में बिस्तर पर पड़ी मिली थी. पूछताछ करने पर पता चला कि उसने कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली है. पिता दिनेश कुमार के पास से एक काले रंग की स्पाइरल डायरी बरामद हुई थी, जिसके कागज के दोनों तरफ एक सुसाइड नोट लिखा मिला था. सुसाइड नोट के एक तरफ 4 अगस्त 2012 लिखा था और दूसरी तरफ मृतिका गीतिका शर्मा के हस्ताक्षर के नीचे 4 मई 2012 अंकित था. 4 अगस्त 2012 और 4 मई 2012 के दोनों सुसाइड नोट में गीतिका ने अपनी मौत के लिए आरोपी गोपाल गोयल कांडा और अरुणा चड्ढा को जिम्मेदार ठहराया था. गीतिका का कहना था कि आरोपियों ने उसका भरोसा तोड़ा और अपने फायदे के लिए उसका दुरुपयोग किया. 

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पुलिस ने गीतिका की मां अनुराधा शर्मा के बयान दर्ज किए. मां ने कहा था- गीतिका 2006 में प्रशिक्षु केबिन क्रू के रूप में एमडीएलआर कंपनी में शामिल हुई थीं. 2008 में सीनियर केबिन क्रू के पद पर पदोन्नत किया गया. 31 मार्च 2009 को एमडीएलआर ग्रुप का को-ऑर्डिनेटर बनाया गया. उसके बाद जुलाई 2009 में एमडीएलआर ग्रुप ऑफ होटल्स में ट्रांसफर कर दिया गया. एमडीएलआर ग्रुप ऑफ कंपनीज के अध्यक्ष और सह-प्रबंध निदेशक यानी गोपाल गोयल कांडा हैं. 

गीतिका की मां ने दर्ज कराए थे बयान

आगे बयान में अनुराधा ने कहा ने बताया कि जब भी आरोपी गोपाल गोयल कांडा का फोन आता था तो गीतिका शर्मा तनावग्रस्त हो जाती थी. 22 मई 2010 को गीतिका शर्मा ने एमडीएलआर ग्रुप से इस्तीफा दे दिया था और अमीरात एयरलाइंस में शामिल हो गई थी. उसके बाद आरोपी गोपाल गोयल कांडा ने कई बार गीतिका की मां को फोन कर उसे बुलाने का अनुरोध किया था. गीतिका दुबई से वापस आ गई. आरोपी गोपाल गोयल कांडा ने एमिरेट्स एयरलाइंस को एक फर्जी ईमेल भेजा था. जब उससे इस बारे में बात की तो उसने गीतिका की मां से माफी मांगी थी. उसके बाद गीतिका जनवरी 2011 में एमडीएलआर ग्रुप ऑफ कंपनीज में निदेशक के रूप में शामिल हो गई. बाद में उसने एमबीए करने के लिए वहां से इस्तीफा दे दिया. 

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कांडा की धमकी सुनकर तनाव में आ गई थी गीतिका

यह भी आरोप लगाया गया कि जब गीतिका एमबीए की पढ़ाई कर रही थी, तब आरोपी गोपाल गोयल कांडा और आरोपी अरुणा चड्ढा टेलीफोन करते थे और उस पर नौकरी जॉइन करने के लिए दबाव डालते थे. टेलीफोन कॉल से गीतिका तनावग्रस्त हो जाती थी. यह भी आरोप लगाया गया कि 4 अगस्त 2012 को आरोपी गोपाल गोयल कांडा ने मां अनुराधा को फोन करके बताया था कि गीतिका को कुछ कागजात पर हस्ताक्षर करने के लिए कार्यालय में आना होगा अन्यथा हरियाणा पुलिस एक्शन लेगी और एफआईआर दर्ज करेगी. जबकि गीतिका अपने भाई के फैशन शो में भाग लेने के बाद मुंबई से लौटी थी. पूरी बातचीत सुनने के बाद गीतिका तनावग्रस्त हो गई. उसके बाद वो कमरे में चली गई. 5 अगस्त 2012 की सुबह अपने कमरे में चुन्नी के सहारे पंखे से लटकी हुई मिली. मां ने आरोप लगाया था कि आरोपी गोपाल कांडा और अरुणा चड्ढा के द्वारा लगातार मानसिक प्रताड़ना के कारण गीतिका शर्मा ने आत्महत्या की है.

पुलिस ने जांच और आरोप पत्र में क्या

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जांच में रिकॉर्ड में आया कि गीतिका का एमडीएलआर एयरलाइंस में केबिन क्रू की नौकरी के लिए सितंबर, 2006 में इंटरव्यू हुआ था. उसे अक्टूबर 2006 में ट्रेनी केबिन क्रू के रूप में भर्ती किया गया. हालांकि उस समय वो 18 वर्ष की नहीं हुई थी. प्रशिक्षण के बाद गीतिका को 14 अप्रैल 2007 को केबिन क्रू के रूप में नियुक्त किया गया और 28 अगस्त 2008 को सीनियर केबिन क्रू के रूप में प्रमोशन किया गया.

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गोपाल कांडा को सीधे रिपोर्ट करती थी गीतिका

आश्चर्य की बात यह है कि एक वर्ष चार महीने की अवधि में ही गीतिका का प्रमोशन और वेतन दोगुना हो गया. इसके तुरंत बाद गीतिका की अगली बड़ी पदोन्नति 7 महीने के भीतर हुई. तब उसे 31 मार्च 2009 को एमडीएलआर समूह के समन्वयक के रूप में पदोन्नत किया गया. गीतिका को आरोपी गोपाल गोयल कांडा को दैनिक आधार पर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए. 30 जून 2009 को एमडीएलआर होटल समूह में ट्रांसफर कर दिया गया.

गीतिका को प्रभाव में रखने के लिए रची साजिश

जांच के दौरान यह भी रिकॉर्ड में आया कि आरोपी अरुणा चड्ढा 1993 से एविएशन सेक्टर में काम कर रही थी और वह अगस्त 2006 में एमडीएलआर एयरलाइंस में हेड इन फ्लाइट के रूप में शामिल हुई. यहीं वह गीतिका के संपर्क में आई और उसकी प्रशिक्षक भी बन गई. घटना के समय आरोपी अरुणा चड्ढा एमडीएलआर ग्रुप ऑफ कंपनीज में को-ऑर्डिनेटर के पद पर थी और उसने गीतिका को अपने प्रभाव में रखने के लिए एक साजिश रची थी.

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ना अनुभव, ना जानकारी... फिर भी बड़ी जिम्मेदारी?

पुलिस ने गीतिका का मोबाइल फोन, लैपटॉप, एक नोटबुक समेत अन्य सामान जब्त किया था. लैपटॉप और मोबाइल फोन की हार्ड डिस्क को सील कर दिया गया. विशेषज्ञ की राय के लिए एफएसएल को भेज दिया गया. परिवार के सदस्यों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए. पुलिस जांच में सामने आया था कि गीतिका शर्मा को वेतन में भारी वृद्धि के साथ तेजी से प्रमोशन दिया गया. एमडीएलआर ग्रुप के समन्वयक जैसे वरिष्ठ प्रबंधन पदों पर नियुक्त किया गया. भले ही उस समय उसने सिर्फ 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी और उसके पास एयरलाइंस या होटल व्यवसाय का अनुभव या ज्ञान बिल्कुल भी नहीं था. कम उम्र होने पर भी प्रशिक्षु के रूप में भर्ती करना और बिना किसी योग्यता के तेजी से प्रमोशन करना और आरोपी गोपाल कांडा को प्रतिदिन रिपोर्ट करने के अनुबंध में तमाम पहलू गड़बड़ी की तरफ से इशारा कर रहे थे.

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गीतिका ने गोवा में दो महिलाओं पर कराई थी FIR

चार्जशीट में कहा गया कि आरोपी गोपाल गोयल कांडा की एमडीएलआर ग्रुप में शामिल होने के दिन से ही गीतिका पर बुरी नियत थी और वह उसे फंसाने के इरादे से अनुचित लाभ दे रहा था. चूंकि एमडीएलआर एयरलाइंस ने अपना परिचालन निलंबित कर दिया था, इसलिए आरोपी गोपाल गोयल कांडा ने गीतिका शर्मा को अपने कर्मचारी के रूप में बनाए रखने के लिए मिंट की देखभाल के लिए गोवा भेजा था. सितंबर 2009 में कैसीनो का स्वामित्व उसकी कंपनी के पास था. कैसीनो की देखरेख दो महिलाएं अंकिता सिंह और नुपुर मेहता कर रही थीं. गोवा में गीतिका के उन दो महिलाओं के साथ मतभेद थे, जिन्होंने उसके होटल के कमरे में जबरन प्रवेश किया था और उसकी सहमति के बिना उसका लैपटॉप और मोबाइल छीन लिया था.

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'सिख के भेष में गीतिका से मिलने जाने का दावा'

गीतिका ने पणजी के थाने में अंकिता सिंह और नुपुर मेहता के खिलाफ चोरी और आपराधिक धमकी की शिकायत दर्ज कराई थी. इस घटना से परेशान होकर गीतिका सितंबर, 2009 में ही दिल्ली लौट आईं और एमडीएलआर कार्यालय जाना बंद कर दिया. पत्राचार के माध्यम से अपनी स्नातक डिग्री पर फोकस कर दिया. इस दौरान आरोपी गोपाल कांडा ने हर संभव तरीके से गीतिका से संपर्क करने की कोशिश की और मई/जून 2010 में एक सिख व्यक्ति के भेष में उसके परीक्षा केंद्र पर भी गया. 

'जाली कागजात देकर फंसाने का प्लान...'

जांच के दौरान यह रिकॉर्ड में आया कि जब गीतिका शर्मा के एमिरेट्स एयरलाइंस में सिलेक्शन हो गया और इसकी जानकारी आरोपी गोपाल कांडा को हुई तो उसे लगा कि गीतिका उसके चंगुल से बाहर निकल जाएगी. ऐसे में उसने गीतिका के रास्ते में रोड़े अटकाना शुरू कर दिया. गीतिका को अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार कर दिया. आरोपी गोपाल कांडा ने सह-आरोपी अरुणा चड्ढा के साथ आपराधिक साजिश रची और राजीव पाराशर के हस्ताक्षर वाली एक जाली एनओसी एमडीएलआर कंपनी की कर्मचारी मोनाल सचदेवा के माध्यम से जारी की गई. ऐसा इस मकसद से किया गया था कि भविष्य में आरोपी गोपाले कांडा आसानी से एनओसी को खारिज कर सके और जालसाजी के लिए गीतिका शर्मा को फंसा सके.

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'गीतिका को लेने खुद दुबई गए थे गोपाल'

29 जून 2010 को गीतिका शर्मा ने दुबई जाकर एमिरेट्स एयरलाइंस ज्वाइन किया. उसके बाद आरोपी गोपाल कांडा सह-आरोपी अरुणा चड्ढा के साथ 14 जुलाई को दुबई गया और गीतिका से मिले. उस पर भारत वापस आने और उसके साथ फिर से जुड़ने का दबाव डाला. हालांकि, गीतिका तैयार नहीं हुई. उसके बाद 30 जुलाई 2010 को फिर से आरोपी गोपाल दुबई गया और गीतिका को मनाने की कोशिश की. जब बात नहीं बनी तो उसने अरुणा चड्ढा के साथ एक आपराधिक साजिश रची और चनशिवरूप सिंह को असिस्टेंट एचआर मैनेजर के रूप में नियुक्त किया. सिंह ने गीतिका द्वारा एमिरेट्स एयरलाइंस को सौंपी गई जाली एनओसी के मामले की जांच करने और उसे एमिरेट्स एयरलाइंस से हटाने के प्लान के साथ दुबई भेजा गया.

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'दुबई में फर्जी कागजात के संबंध में शिकायत'

हालांकि, चनशिवरूप सिंह को अमीरात एयरलाइंस के एचआर विभाग से मनमाफिक रिस्पॉन्स नहीं मिला. उन्होंने वहां एयरलाइंस में जांच और सुरक्षा समूह के प्रमुख के पद पर तैनात शिरीष थोराट से मुलाकात की थी. बाद में दोनों आरोपी गोपाल और सह-आरोपी अरुणा चड्ढा ने अपनी एमडीएलआर एयरलाइंस कंपनी की तरफ से गुरुग्राम के सिविल लाइन्स थाने में शिकायत भेजी गई, जिसमें धोखाधड़ी, फर्जी और गलत अनुभव प्रमाण पत्र का प्रयोग करने का आरोप लगाया. साथ ही कंपनी के कुछ दस्तावेज और लैपटॉप भी अपने साथ ले जाने का आरोप लगाया. 

जांच में पता चला कि गीतिका को अमीरात एयरलाइंस से हटाने के लिए शिकायत फर्जी थी. इसके बाद शिरीष थोराट ने राजीव पाराशर से एनओसी जारी करने के बारे में पूछताछ की, जिन्होंने एनओसी जारी करने से इनकार कर दिया. बाद में आरोपी गोपाल गोयल कांडा ने भी शिरीष थोराट को 10 अगस्त 2010 को एक ईमेल भेजा, जिसमें फिर से आरोप लगाए गए गीतिका द्वारा फर्जी दस्तावेज पेश किये गए हैं.

'कोर्ट का जाली आदेश अटैच करके भेजा था'

उसके बाद गीतिका ने 11 अगस्त 2010 को एमिरेट्स एयरलाइंस से इस्तीफा दे दिया और 24 अगस्त 2010 को भारत लौट आई. आरोपी गोपाल कांडा ने ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं, जिससे गीतिका को एक बेहद प्रतिष्ठित एयरलाइंस में अपनी सम्मानजनक नौकरी छोड़ने और भारत लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा. गीतिका पर एमडीएलआर एयरलाइंस में शामिल होने के लिए दबाव बनाया गया. एक अक्टूबर 2010 का फर्जी ईमेल भेजा गया. कथित तौर पर एमिरेट्स ग्रुप के निदेशक द्वारा कुछ लंबित मामलों के संबंध में गीतिका को दुबई प्रत्यर्पित करने की धमकी दी गई. इस ईमेल में दुबई कोर्ट का 13 सितंबर 2010 का जाली आदेश भी संलग्न था. गीतिका ने आरोपी गोपाल के खिलाफ एक शिकायत भी थी, जिसमें उसने आशंका व्यक्त की थी कि उसे परेशान किया जा रहा है. 

'केस का अहम गवाह अमेरिका भागा'

पुलिस ने गीतिका के आईफोन को हैदराबाद की सीएफएसएल भेजा. कुछ दस्तावेज, दो सिम कार्ड रोहिणी की लैब भेजे. आरोपी अरुणा चड्ढा के लैपटॉप और मोबाइल फोन भी रोहिणी को लैब में भेजे थे. माइक्रोसॉफ्ट कंपनी से राय मांगी. मामले में सुषमा गुप्ता, अतुल पुरी, राजीव पाराशर, मोनाल सचदेवा और शिरीष थोराट के बयान लिए. डॉक्टर भीम सिंह से राय ली गई. उसके बाद 5 अक्टूबर 2012 को आरोप पत्र दाखिल किया गया. बाद में जांच अधिकारी राजीव रंजन का ट्रांसफर हो गया. चनशिवरूप सिंह नायर से पूछताछ की गई. उसके बाद जनवरी 2013 को दूसरा पूरक आरोप पत्र दायर किया गया. इस दौरान पता चला कि चैनशिवरूप सिंह नायर की मिलीभगत से यूएसए भाग गया. 

शिरीष मारुति थोराट ने भी दस्तावेज सौंपने के संबंध में गवाही दी. गीतिका के भाई अंकित शर्मा ने विभिन्न ईमेल को जब्त करने के संबंध में गवाही दी. इंस्पेक्टर दिनेश कुमार ने भी मनदीप सिंह के बयान दर्ज करने के संबंध में शपथ पत्र दाखिल किया. मां अनुराधा शर्मा, पिता दिनेश शर्मा, भाई अंकित शर्मा और मनदीप सिंह के बयान दर्ज कराने के संबंध में आगे गवाही दी. दोनों आरोपियों ने बयान में कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है. बचाव साक्ष्य के आवेदन दस्तावेज को स्वीकार करने के लिए सीआरपीसी की धारा 294 के तहत हरियाणा सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दाखिल की गई.

फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने क्या कहा...

जज ने कहा कि गीतिका के कॉल डिटेल रिकॉर्ड के अनुसार, 4 अगस्त 2012 को उसके मोबाइल नंबर से करीब छह कॉल रिसीव और आउटगोइंग हुईं. इनमें से तीन कॉल उसके भाई अंकित की थीं. जांच अधिकारी (आईओ) ने शेष तीन कॉल के संबंध में कोई जांच नहीं की गई. आईओ के लिए उन तीन कॉलों की जांच करना जरूरी था, जिनमें से दो कॉल क्रमशः 192 और 155 सेकंड की अवधि के एक ही मोबाइल नंबर से थे. ये कॉल 4 अगस्त 2012 को गीतिका को रिसीव हुए थे. वे उसकी मृत्यु से पहले किए गए थे और आत्महत्या करने पर कुछ अहम जानकारी दे सकते थे.
- जज ने कहा, 4 अगस्त 2012 को गीतिका के किसी परिचित व्यक्ति द्वारा उसे फोन करने और उकसाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता, जिसके कारण उसने आत्महत्या कर ली. गीतिका की मां ने 5 अगस्त 2012 की सुबह दो बार अपनी बेटी को फोन किया था.
- 4-5 अगस्त, 2012 की रात को जब वह बगल के कमरे में सो रही थी, तब मां ने बेटी को टेलीफोन किया था, यह काफी असामान्य है. पिछले झगड़े के कारण मां द्वारा बेटी के हालचाल के बारे में पूछने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.
- कोर्ट ने कहा कि गवाहों के साक्ष्य से यह नहीं पता चलता कि गीतिका को प्रमोशन देकर या उसे एमडीएलआर ग्रुप के समन्वयक के रूप में नियुक्त करके कांडा का उसे अपना जीवन समाप्त करने के लिए उकसाने का मकसद था. यह रिकॉर्ड पर साबित हो चुका है कि आरोपी व्यक्तियों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गीतिका को आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई काम नहीं किया. उन्होंने यह भी कहा कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि दोनों आरोपी 2006 से जून 2012 तक गीतिका को परेशान कर रहे थे.
- अदालत ने कहा कि गीतिका और चड्ढा के बीच मित्रतापूर्ण संबंध थे और विभिन्न रेस्तरां में पार्टियों में भाग लेकर उसके साथ मेलजोल देखे गए. कोई भी समझदार और विवेकशील व्यक्ति उस व्यक्ति से मेलजोल नहीं रखेगा या लाभ या एहसान नहीं लेगा, जो उसके जीवन में तनाव पैदा करता है. 
- अदालत ने कहा कि यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कांडा, गीतिका के प्रति आकर्षित था और यही कारण हो सकता है कि कांडा और चड्ढा ने उसे अपनी कंपनी एमडीएलआर में फिर से शामिल होने का अनुरोध करने के लिए दुबई की यात्रा की.
- कांडा ने जो अन्य लाभ गीतिका को दिए थे, जैसे- उन्हें निदेशक बनाना, बीएमडब्ल्यू कार देना, एमबीए पाठ्यक्रम के लिए उनकी फीस को जमा करना, उन्हें अपने साथ सिंगापुर ले जाना, स्कूल चलाने का कोई अनुभव नहीं होने के बावजूद उन्हें सुंडेल एजुकेशनल सोसाइटी का अध्यक्ष बनाना... यह साबित करता है कि कांडा ने उन्हें उनकी पसंद या उनके प्रति आकर्षण के कारण लाभ दिए थे.
- इसलिए यह विश्वास नहीं किया जा सकता है कि कांडा, जो गीतिका के प्रति अपने आकर्षण के कारण इतने सारे लाभ प्रदान कर रहा था, उसके लिए ऐसी परिस्थितियां पैदा करने का आपराधिक इरादा करेगा, जिसमें उसके पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा या उसने अपने आचरण से, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, उसे आत्महत्या करने के लिए उकसाया था.
- जज ने बचाव पक्ष के वकील की इस दलील को खारिज कर दिया कि आरोपी गीतिका पर सुंडले एजुकेशनल सोसायटी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डाल रहा था. उन्होंने कहा कि यह किसी भी प्रकार का उत्पीड़न नहीं है. 
- ट्रायल कोर्ट ने कांडा के खिलाफ रेप आईपीसी की धारा (376) और 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) के आरोप भी तय किए थे. हालांकि, बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने इन आरोपों को रद्द कर दिया.
-  वहीं, बरी होने पर कांडा ने प्रतिक्रिया दी और कहा, मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं था. पूरी बात मनगढ़ंत थी.


 

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