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हरियाणा विधानसभा में 'राइट टू रिकॉल' बिल पास, काम नहीं करने वाले सरपंच को हटा सकेंगे ग्रामीण

डिप्टी सीएम ने बताया कि राइट टू रिकॉल का बिल पास होने के बाद अब ग्रामीणों के पास यह अधिकार आ गया है कि अगर सरपंच गांव में विकास कार्य नहीं करवा रहा तो उसे बीच कार्यकाल में ही पद से हटाया भी जा सकता है.

उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला बोले, पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल का सपना हुआ पूरा उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला बोले, पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल का सपना हुआ पूरा
मनजीत सहगल
  • चंडीगढ़,
  • 07 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:44 AM IST
  • हरियाणा सरकार को भरोसा, पंचायती राज संस्थाओं में बढे़गी कार्यकुशलता
  • 33 फीसदी मतों के साथ बीडीओ को भेजा जा सकेगा सरपंच हटाने का प्रस्ताव
  • पंचायत की बैठक में होगी सीक्रेट वोटिंग, 67 फीसदी वोट पर सरपंच की छुट्टी

हरियाणा विधानसभा के मौजूदा सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण बिल पारित हुए हैं. इनमें से एक शुक्रवार को ग्राम पंचायतों के लिए 'राइट टू रिकॉल' बिल भी पटल पर रखा गया जो पास हो गया. इस बिल के लागू होने के बाद अब ग्रामीणों को यह अधिकार मिल गया है कि अगर कोई सरपंच ठीक से काम नहीं कर रहा है तो उसे कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटाया जा सकता है. इस नए नियम के लागू होने के बाद सरपंच द्वारा ग्रामीण विकास के मामले में क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावनाएं बन गई हैं. 

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उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बताया कि 'राइट टू रिकॉल' का सपना देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल ने देखा था. विधानसभा में पास हुए इस 'राइट टू रिकॉल' बिल के बारे में डिप्टी सीएम ने बताया कि पंचायत विभाग के पास अक्सर इस तरह की शिकायतें आती थी कि सरपंच मनमानी करके ग्रामीणों की जनभावनाओं के खिलाफ कार्य कर रहा है. हर साल इस तरह के सैकड़ों शिकायतें ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर और प्रदेश मुख्यालय तक पहुंचती हैं.

डिप्टी सीएम ने बताया कि राइट टू रिकॉल का बिल पास होने के बाद अब ग्रामीणों के पास यह अधिकार आ गया है कि अगर सरपंच गांव में विकास कार्य नहीं करवा रहा तो उसे बीच कार्यकाल में ही पद से हटाया भी जा सकता है. डिप्टी सीएम ने बताया कि सरपंच को हटाने के लिए गांव के 33 प्रतिशत मतदाता, 'अविश्वास' लिखित में शिकायत संबंधित अधिकारी को देंगे. यह प्रस्ताव खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी तथा सीईओ के पास जाएगा. 

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इसके बाद ग्राम सभा की बैठक बुलाकर 2 घंटे के लिए चर्चा करवाई जाएगी. इस बैठक के तुरंत बाद गुप्त मतदान करवाया जाएगा और अगर 67 प्रतिशत ग्रामीणों ने सरपंच के खिलाफ मतदान किया तो सरपंच पदमुक्त हो जाएगा. सरपंच चुने जाने के एक साल बाद ही इस नियम के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकेगा.

दुष्यंत चौटाला ने बताया कि अगर अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरपंच के विरोध में निर्धारित दो तिहाई मत नहीं डलते हैं तो आने वाले एक साल तक दोबारा अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा. इस तरह 'राइट टू रिकॉल' एक साल में सिर्फ एक बार ही लाया जा सकेगा. 

दुष्यंत चौटाला ने बताया कि इस बिल के आने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों में अभूतपूर्व बदलाव आएगा. उन्होंने कहा कि सरपंच अब ग्रामीणों की भावना के अनुरूप ही विकास कार्यों को प्राथमिकता देंगे. 

 

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