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1966 में रखी गई थी डेरा जगमालवाली की नींव, देशभर में फैले अनुयायी... पढ़ें- सिरसा के मस्ताना शाह बिलोचिस्तानी आश्रम की कहानी

मस्ताना शाह बिलोचिस्तानी आश्रम (डेरा जगमालवाली) की नींव संत गुरबख्श सिंह मैनेजर साहिब द्वारा 18 फरवरी 1966 में रखी गई थी. उस समय ये स्थान रेतीला और वीरान था. शुरू में एक फूस की झोपड़ी बनाई गई थी और फिर दो कमरे बनाए गए थे. बाद में थोड़ी और भूमि खरीदी गई और इस आश्रम का धीरे-धीरे विस्तार हुआ.

 मस्ताना शाह बिलोचिस्तानी आश्रम की नींव 18 फरवरी 1966 में रखी गई थी. मस्ताना शाह बिलोचिस्तानी आश्रम की नींव 18 फरवरी 1966 में रखी गई थी.
बलजीत सिंह
  • सिरसा,
  • 07 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 11:22 PM IST

हरियाणा सरकार ने सिरसा में बुधवार शाम 5 बजे से गुरुवार रात 12 बजे तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं. इसकी वजह है डेरा जगमालवाली में गद्दी विवाद. दरअसल, सिरसा के मस्ताना शाह बिलोचिस्तानी जगमालवाली के डेरा प्रमुख संत बहादुर चंद वकील साहब का 1 अगस्त को निधन हो गया था, इसके बाद से ही डेरा की गद्दी को लेकर विवाद शुरू हो गया. डेरा प्रमुख का 2 अगस्त को डेरा परिसर में बिश्नोई रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया था. डेरा प्रमुख की अंतिम अरदास का कार्यक्रम 8 अगस्त (गुरुवार) को रखा गया है, राज्य सरकार को आशंका है कि सिरसा में तनाव, दंगे, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के साथ ही शांति और सौहार्द बिगड़ने की आशंका है. ऐसे में ये समझना जरूरी है कि डेरा विवाद क्या है...?

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बता दें कि मस्ताना शाह बिलोचिस्तानी आश्रम (डेरा जगमालवाली) की नींव संत गुरबख्श सिंह मैनेजर साहिब द्वारा 18 फरवरी 1966 में रखी गई थी. उस समय ये स्थान रेतीला और वीरान था. शुरू में एक फूस की झोपड़ी बनाई गई थी और फिर दो कमरे बनाए गए थे. बाद में थोड़ी और भूमि खरीदी गई और इस आश्रम का धीरे-धीरे विस्तार हुआ. 

24 अप्रैल 1989 को रजिस्टर किया गया था ट्रस्ट

24 अप्रैल 1989 को दिल्ली में सच्चा सौदा रूहानी सत्संग ट्रस्ट के नाम से एक ट्रस्ट रजिस्टर किया गया था. इसके बाद 31 मई 1990 को दिल्ली के केशवपुरम में सच्चा सौदा रूहानी आश्रम के नाम से एक और आश्रम स्थापित किया गया. दिल्ली स्थित यह आश्रम आमतौर पर जहाजवाला डेरा के नाम से प्रसिद्ध है. संत गुरबख्श सिंह मैनेजर साहिब ने सनमत के विचारों का प्रचार करना शुरू किया और सतगुरु की कृपा से उन्होंने योग्य मनुष्यों को दीक्षा देना शुरू किया और उन्हें अपने भीतर सतगुरु का एहसास कराकर मोक्ष के मार्ग पर लगाना शुरू किया. 

ऐसे हुआ आश्रम का विस्तार

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संत गुरबख्श सिंह मैनेजर साहिब ने सावन शाही मस्तानी मौज हॉल नामक एक गोल सत्संग हॉल बनवाया था, जिसे सुचखंड के नाम से जाना जाता है. इस हॉल को संत मस्ताना शाह बलूचिस्तानी के आदेशानुसार बनाया गया था. सतगुरु की कृपा से संत गुरबख्श सिंह मैनेजर साहिब ने 30 जुलाई 1998 को अपना जीवन चक्र पूरा किया और अपने पवित्र कर्तव्यों को पूरा करने के बाद 83 वर्ष की आयु में अनामी (स्वर्ग) के लिए प्रस्थान किया और यह प्रमुख कार्य अपने उत्तराधिकारी (वकील साहब) को सौंप दिया. 

 

वकील साहिब को सौंपा सत्संग का जिम्मा

संत गुरबख्श सिंह मैनेजर साहिब हमेशा वकील साहब की सेवा और सिमरन के साथ-साथ उनकी सहनशीलता की भी प्रशंसा करते थे. मंडी डबवाली में संत मैनेजर साहिब के परिसर में साप्ताहिक सत्संग होता था, जिसे कुछ प्रेमी और साधु संचालित करते थे. एक बार संत मैनेजर साहिब के अनुयायी महेंद्र कुमार लूथरा ने संत मैनेजर साहिब से अनुरोध किया कि क्षेत्र में डेरा के कुछ साधुओं द्वारा साप्ताहिक सत्संग संचालित किया जाना चाहिए. क्योंकि उनकी वाणी में सतगुरु की छाप होती है, इससे प्रेमियों को आशीर्वाद मिलता है. बता दें कि महेंद्र कुमार लूथरा दिल्ली के रहने वाले थे, उस समय मंडी डबवाली में रहते थे. महेंद्र कुमार लूथरा के अनुरोध पर संत गुरबख्श सिंह मैनेजर साहिब ने वकील साहब को मंडी डबवाली में सत्संग आयोजित करने के लिए कहा. वर्ष 1991 में वकील साहिब ने पहली बार मंडी डबवाली में सत्संग किया था. इसके बाद वकील साहिब ने पंजाब और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों में सत्संग करना शुरू कर दिया. एक बार वर्ष 1991 में डेरा जगमालवाली में मासिक भंडारे के दौरान संत गुरबख्श सिंह मैनेजर साहिब की तबीयत खराब होने पर उन्होंने वकील साहिब से सत्संग करने को कहा, जिसे वकील साहिब ने किया. 

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देशभर में फैले हैं अनुयायी

चोला छोडऩे से पहले संत गुरबख्श सिंह मैनेजर साहिब ने वर्ष 1998 में सभी संगत से कहा कि अब वकील साहिब डेरा जगमालवाली की देखभाल करेंगे. संत गुरबख्श सिंह मैनेजर साहिब ने उन्हें 9 अगस्त 1998 को यह दायित्व सौंपा था और तब से वे मस्ताना शाह बलूचिस्तानी डेरा जगमालवाली के गद्दी पर बैठे हुए थे. वकील साहिब कहते थे कि नाम, सिमरन और सत्संग सतगुरु को पाने के रास्ते हैं. वकील साहब 1 अगस्त 2024 को चोला छोड़ गए. आज डेरा के साथ लाखों की संगत हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश समेत देश के अन्य प्रदेशों के साथ ही विदेशों के अनुयायी भी जुड़े हैं. जिस प्रकार से संतों का परिवार और डेरा के ट्रस्ट मेंबर और पंचायतें वीरेंद्र सिंह के पक्ष में है, ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि तीसरे संत और गद्दीनशीं वीरेंद्र सिंह होंगे. 

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