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सेना ने भी माना, शोपियां मुठभेड़ में जवानों ने किया नियमों का उल्लंघन, कार्रवाई के आदेश

शोपियां की घटना जुलाई 2020 की है. एक मुठभेड़ में जितने जवान शामिल थे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी. सेना ने इसका आदेश दिया है. सेना की तरफ से कहा गया है कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि मुठभेड़ में शामिल जवानों ने कानून की अवहेलना की.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
गौरव सावंत/शुजा उल हक
  • नई दिल्ली/श्रीनगर,
  • 18 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 9:37 PM IST
  • मुठभेड़ फर्जी होने का लगा था आरोप
  • सेना ने शुरू की थी कोर्ट ऑफ इन्क्वारी
  • कोर्ट ऑफ इन्क्वारी में कार्रवाई का आदेश

सेना ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर के शोपियां में एक मुठभेड़ के दौरान नियमों की अवहेलना पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है. सेना की कोर्ट ऑफ इन्क्वारी ने जवानों को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है.

शोपियां की घटना जुलाई 2020 की है. एक मुठभेड़ में जितने जवान शामिल थे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी. सेना ने इसका आदेश दिया है. सेना की तरफ से कहा गया है कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि मुठभेड़ में शामिल जवानों ने कानून की अवहेलना की. 

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बता दें, इस घटना के पीड़ितों ने सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाया था और तीन लोगों के पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह फर्जी एनकाउंटर था. इस घटना में जिन लोगों को मारा गया उनका आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं था. जो तीन लोग मारे गए थे उनका डीएनए रिपोर्ट भी अभी आना बाकी है. 

सेना के मुताबिक, प्रथम दृष्टया सबूत मिले हैं कि जवानों ने शोपियां मुठभेड़ में अफस्पा के तहत मिली शक्तियों का उल्लंघन किया. बता दें, इस साल जुलाई महीने में हुए इस मुठभेड़ में तीन लोग मारे गए थे. बाद में परिजनों की शिकायत पर सेना ने इसकी जांच शुरू की थी.

सेना की कार्रवाई पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया है. अब्दुल्ला ने कहा है कि जिन तीन लोगों की हत्या हुई उनके परिजन अपनी बेगुनाही साबित करते रहे हैं. अब सेना ने जब अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है, तो इससे तय है कि वह पीड़ित परिवार की बात से सहमत है. दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

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इसके बारे में डिफेंस पीआरओ ने बताया कि अम्शीपोरा, शोपियां ऑपरेशन को लेकर आर्मी की इन्क्वारी पूरी हो गई है. इसमें प्रथम दृष्टया संकेत मिले हैं कि ऑपरेशन के दौरान अफस्पा की शक्तियों का दुरुपयोग किया गया और सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों की अवहेलना हुई. घटना की शिकायत मिलने के बाद आर्मी एक्ट के दौरान जांच शुरू की गई. प्रथम दृष्टया जो लोग दोषी पाए गए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए. 

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